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शिक्षा सचिव अनिल स्वरूप ने शुक्रवार को जानकारी दी कि सीबीएसई को 10वीं के मैथ्स एग्जाम से करीब 9 घंटे पहले ही लीक्ड पेपर की कॉपी ईमेल पर मिल गई थी. इसके बावजूद पेपर रद्द नहीं करने के सीबीएसई के कदम पर स्वरूप ने सफाई दी कि इसके लिए सीबीएसई के पास पर्याप्त समय नहीं था.अनिल स्वरूप ने बताया कि उनके पास मेल पर लीक्ड पेपर की एक हैंडरिटन कॉपी आई थी. उन्होंने कहा, “मेल बुधवार 28 मार्च को रात 1.29 बजे आया लेकिन उसे उन्होंने सुबह 8:55 बजे देखा. इसके बाद उस पेपर को वेरिफिकेशन के लिए भेजा गया. एक अलर्ट के आधार पर हम परीक्षा रोक नहीं सकते थे.” शिक्षा सचिव ने कहा कि 10 बजे से परीक्षा शुरू होनी थी और एक संदेश के आधार पर बिना किसी जांच के परीक्षा रद्द नहीं की जा सकती है. लाखों छात्रों का भविष्य इससे जुड़ा था. पढ़ेंः एनएसयूआई ने हाईजैक किया स्कूली छात्रों का प्रदर्शन
हालांकि सीबीएसई ने जांच में पाया कि लीक्ड पेपर और असल एग्जाम पेपर एक जैसे हैं. 12वीं के इकोनॉमिक्स पेपर लीक की भी पुष्टि हुई. जिसके बाद सीबीएसई ने 10वीं मैथ्स और 12वीं इकोनॉमिक्स पेपर दोबारा करवाने का फैसला किया. हालांकि छात्र री-एग्जाम का विरोध कर रहे हैं. दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांग है कि या तो री-एग्जाम रद्द किया जाए या सभी विषयों की परीक्षा दोबारा आयोजित कराई जाए.
री-एग्जाम की तारीख घोषित करते हुए स्वरूप ने कहा कि 12वीं इकोनॉमिक्स की परीक्षा 25 अप्रैल को होगी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो 10वीं की परीक्षा जुलाई में सिर्फ दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में कराई जाएगी.
Article source: http://ibnlive.in.com/news/private-doctors-use-wrong-tb-test-to-earn-more/173130-17.html
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