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बोर्ड परीक्षाओं के पेपर लीक होने के बाद सीबीएसई ने एक लीक प्रूफ फॉर्मूला तैयार किया है और स्कूलों का इस फॉर्मूला पर मोक ड्रिल भी कराई है. हालांकि इस फॉर्मूले को लेकर स्कूल नाराज हैं. उनका कहना है कि पेपर लीक न हो इसकी जिम्मेदारी खुद सीबीएसई को लेनी पड़ेगी. फिलहाल इस फॉर्मूले को फाइनल नहीं किया गया है.बता दें कि सीबीएसई एक नया फॉर्मूला ईजाद करने में लगा है ताकि भविष्य में कभी परीक्षा के पेपर लीक से बचा जा सके. बीते गुरुवार को सीबीएसई ने सभी स्कूलों में इसका मॉक ड्रिल किया.
कैसे काम करेगा सिस्टम
अब परीक्षा के दौरान सीबीएसई सभी एग्जाम सेंटरों को एक यूआरएल भेजेगा. इस यूआरएल को स्कूल का एग्जाम सुपरिटेण्डेन्ट खोल सकता है. उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक पासवर्ड आएगा. जिसके बाद वह प्रश्नपत्र प्रिंट कर छात्रों को देंगे.सीबीएसई को लगता है कि इस फ़ॉर्मूले से पेपर लीक से बचा जा सकता है. लेकिन कालका पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल डॉक्टर ओनिक मेरहोत्रा का कहना है कि यह फॉर्मूला बिलकुल भी कारगर नहीं है. उन्होंने सवाल किया कि अगर किसी कारण नेटवर्क प्रॉब्लम हो गयी तब क्या होगा? या फिर किसी कारण से अगर कंप्यूटर या प्रिंटर काम नहीं करेंगे तो ऐसी परिस्थिति में स्कूल को जिम्मेदार ठहराया जाएगा, इसलिए ये फॉर्मूला बिल्कुल सही नहीं है.
डॉ ओनिक मेरहोत्रा के मुताबिक एक साथ 200 बच्चों का पेपर निकाल कर उसे स्टेपल कर फिर क्लास रूम में बच्चों को देना आसान नहीं होगा. इससे और ज्यादा दिक्कते होंगी. खुद सीबीएसई को जिम्मेदारी लेनी होगी कि पेपर लीक न हो.
इस साल पेपर लीक कहां से हुआ ये जांच का विषय है लेकिन सीबीएसई को जल्द से जल्द फैसला लेना होगा कि री-टेस्ट कब तक होगा. आने वाले दिनों में एंट्रेंस एग्जाम भी शुरू हो जाएंगे. डॉ ओनिक मेरहोत्रा का ये भी कहना है कि सीबीएसई ने मॉक ड्रिल का डिसिशन अचानक लिया. किसी भी स्कूल से अभी इस फॉर्मूले पर राय नही मांगी गई है.
ये पहली बार नही है कि सीबीएसई का पेपर लीक हुआ है. इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं सामने आई हैं. बहरहाल, दिल्ली पुलिस इस पूरे मामले में जांच कर रही है और सीबीएसई को पुलिस से क्लीन चिट नहीं मिला है.
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