Saturday, 1 September 2018

आज भी नहीं बदला है दुष्यंत का भारत


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दुष्यंत कुमार गज़ल को आम लोगों की भाषा हिंदी में लाए. उनकी निगाह सड़क पर रहने वाले सच्चे हिंदुस्तान की थी. दुष्यंत कुमार की ओजस्वी भाषा की आत्मा वही थी जिसमें हिंदुस्तान बसता है. अक्खड़ सी बोली लेकिन बात ऐसी जो चीर जाए.वो इंसान के अनकहे बयान जनता तक पहुंचाते थे. उनके लिए भारत रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ इंसान था. दुष्यंत कुमार ऐसे सवाल उठाते थे जो बरसों बाद भी हमारे सामने चुनौती बने हुए हैं. दुष्यंत कुमार ने भारत का हाल बयान किया है. इस कविता में जिस भारत देश की बात कही गई है…वो अलग अलग नामों से रोज़ हमें मिलता है.


वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है
माथे पे उसके चोट का गहरा निशान है – दुष्यंत कुमार


अगर दुष्यंत कुमार आज होते तो शायद कुछ ऐसे लिखते


नक्शा भर नहीं है जो हिंदुस्तान है
कहीं टूटी कुटिया, उजड़ी दुकान है


हल्की सी बारिश में जो टूट गया था
सिर्फ इमारत नहीं किसी का मकान है


गद्दियों पे जो दावा ठोक रहा है
वो नेता है या कोई खानदान है


गरीबी हो चुकी है लाइलाज बीमारी
किस वैद्य के पास इसका निदान है


दुष्यंत कुमार शायर भर नहीं थे, बल्कि अपने दौर की ज़ुबान थे. उनकी भाषा में झुंझलाहट थी. समाज से कट चुकी सरकार को आइना दिखाते थे. वो चिर युवा थे. फ़ैज़ अहमद फैज़ के घराने से ग़ज़लकार, जय प्रकाश को आवाज़ देता युवा. गद्दी पर जमी सत्ता की आंखों में आंखें डाल कर चुनौती देता. नौकरी-खुशहाली की तलाश में भटक रहा युवा. दुष्यंत सरीखे कवि बहुत कम हुए हैं,जो इश्क की बात भी करते तो उसमें रोमांस से ज़्यादा ज़िंदगी की सच्चाई होती.


तू किसी रेल सी गुज़रती है,
मैं किसी पुल सा थरथराता हूं – दुष्यंत कुमार


इस शेर पर मसान फिल्म में पूरा गाना बना दिया गया. इसी गज़ल का एक और शेर नया मायने देता है.


ये वो बेबसी है जो मसान का गाना बयां नहीं कर सकता लेकिन जब तक भारतीय समाज में कसक रहेगी. दुष्यंत गूंजते रहेंगे. बहुत कम शायर वक्त के साथ और प्रासंगिक हो पाते हैं लेकिन दुष्यंत कैलेंडर के परे हैं. वो प्रेरणा देते हैं, चुनौती देते हैं. किसी भी रूप में सड़क के किनारे चाय की दुकान में मिल जाएंगे. आप बस नज़र रखिए दुष्यंत आज भी आस-पास हैं.


(मोहित मिश्रा- लेखक वरिष्ठ टीवी पत्रकार हैं और न्यूज़18 इंडिया में कार्यरत हैं )


Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/khel/kohli-and-gayle-dance-465086.html

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