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सुप्रीम कोर्ट ने अपराध के आरोपी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने से भले ही इनकार कर दिया हो लेकिन प्रत्याशी के क्रिमनल रिकॉर्ड की जानकारी अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए तीन बार जनता को देने का निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, इस तरह का रिकॉर्ड संबंधित पार्टी को अपनी वेबसाइट पर भी डालना होगा. कानून के जानकारों का कहना है कि ये ठीक उसी तरह होगा जैसे कोई चोर या बलात्कारी खुद को चोर और बलात्कारी कहे. अखबार में ऐसा विज्ञापन छपवाने से उस पार्टी की इमेज खराब होगी और वह कोशिश करेगी कि अपराधियों को मजबूरी में ही टिकट देना पड़े. लेकिन यह तभी होगा जब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनाव आयोग लागू करवा पाए.सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आने वाले हर चुनाव पर लागू होगा. कोर्ट ने कहा कि एक वोटर को हर बात की जानकारी होनी चाहिए. ये उसका अधिकार है, ताकि वो अपनी मर्जी से चुनाव कर सके. अगर वोटर को पूरी जानकारी नहीं मिलेगी तो ये लोकतंत्र को बर्बाद करेगा.
सुप्रीम कोर्ट के वकील पद्मश्री ब्रह्मदत्त कहते हैं, ‘सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राजनीति में अपराधीकरण को खत्म करने के लिए एक सकारात्मक कदम है. आपराधिक रिकॉर्ड तीन बार अखबार में छपवाने से काफी फर्क पड़ेगा. जनता को पता चलेगा कि कौन व्यक्ति अपराधी है तो फिर उसे वो क्यों वोट देगी. पार्टी अपनी इमेज बचाने के लिए कोशिश करेगी कि ऐसे उम्मीदवार को न उतारना पड़े. जिसका प्रत्याशी साफ-सुथरा है वो उस पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलेगा जिसका प्रत्याशी अपराधी है. यह बहुत दिलचस्प होगा कि अपराध का आरोपी नेता खुद के बारे में विज्ञापन छपवाकर बताएगा कि वो चोर, लुटेरा बलात्कारी है.’
सुप्रीम कोर्ट- News 18 क्रिएटिवहालांकि ब्रह्मदत्त ये भी मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर तभी होगा जब इसे चुनाव आयोग सख्ती से लागू करवा पाएगा. जनता चाहती है कि आपराधिक रिकॉर्ड वाला नेता चुनाव न लड़ पाए. इसलिए यदि वोटर को नेताओं की कुंडली बताई जाएगी तो वो सही फैसला ले पाएगा कि उसे क्या करना है. इससे राजनीति की गंदगी साफ करने में मदद मिलेगी.
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वहीं राजनीतिक विश्लेषक आलोक भदौरिया कहते हैं, ‘अच्छी बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्याशियों के आपराधिक रिकार्ड अखबारों में छपवाने को कहा है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या चुनाव आयोग इस आदेश को प्रभावी तरीके से लागू करवा पाएगा. आयोग को सुनिश्चित करवाना होगा कि उस विज्ञापन का स्वरूप क्या होगा. वो किस पन्ने पर छपेगा. कहीं खोया-पाया और वैवाहिक विज्ञापन जैसा तो नहीं छाप दिया जाएगा. किसी भी सरकार की मंशा आज तक राजनीति से अपराधीकरण खत्म करने की नहीं दिखी. वरना अब तक राजनैतिक दल आरटीआई के दायरे में आ चुके होते और अपराधियों को चुनाव लड़ने पर रोक भी लग चुकी होती.”
कितने दागी हमारे नेता
चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाली गैर सरकारी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की ओर से 2017 में देश के 4896 जन प्रतिनिधियों में से 4853 के आपराधिक रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया था. इसके मुताबिक लोकसभा और राज्यसभा के 770 सांसदों में से 364 (47%) और 4083 विधायकों में से 2246 (55%) दागी हैं. लोकसभा के 179 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं. इनमें से 114 पर गंभीर केस हैं. राज्यसभा के 51 सांसदों पर आपराधिक मामले हैं, जिनमें से 20 पर गंभीर केस हैं. 48 सांसदों पर महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं.
कितने नेताओं पर है महिलाओं के खिलाफ अपराध के केस
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने मंगलवार को फैसला दिया है कि दोष सिद्ध होने से पहले सांसदों और विधायकों को अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता है. दागी नेताओं से जुड़ी याचिका पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोप झेल रहे किसी नेता को चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता है.
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कोर्ट ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह जल्द से जल्द ऐसा कानून लाए जिससे आपराधिक मामलों में शामिल लोग राजनीति में ना आ सकें. कुछ लोग पैसे और गुंडों के बल पर राजनीति में आते हैं और सुप्रीम पॉवर बन जाते हैं. देश की जनता ऐसे कानून का इंतजार कर रही है जिससे ऐसे लोग राजनीति में ना आ सकें.
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Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/politics/mulayam-singh-yadav-akhilesh-yadav-shivpal-yadav-samajwadi-party-up-assembly-election-2017-lucknow-523146.html
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