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आधार योजना पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया और कहा कि यह ऐतिहासिक निर्णय है जो आम जनता को बड़ी राहत देगा, वहीं कुछ ने इस फैसले को निराशाजनक बताया.सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने कहा, ‘शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कुछ हिस्सों को हटा दिया और कुछ अन्य को आधार कानून के साथ शामिल किया. उसने इसे असंवैधानिक नहीं कहा, लेकिन कहा कि सरकारी योजनाओं में सब्सिडी पाने के लिए यह जरूरी है.’
अदालत ने केंद्र की प्रमुख योजना आधार को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया लेकिन बैंक खातों, मोबाइल नंबर और स्कूल में बच्चों के प्रवेश से आधार को लिंक करने समेत कुछ प्रावधानों को निष्प्रभावी कर दिया.
भूषण ने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह ऐतिहासिक फैसला है और आम आदमी को बड़ी राहत देगा. पहले निजी कंपनियां सेवाएं देने के लिए आधार मांगती थीं. आधार नहीं होने पर बैंक खाते खुलने, स्कूलों में प्रवेश और मोबाइल सिम कार्ड मिलने में बाधा आती थी. इस फैसले से नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी.’दिल्ली के एनजीओ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन राइट्स के निदेशक राहुल राय ने कहा कि यह ‘संतुलित फैसला’ है.
भूषण ने कहा, ‘आधार को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा है और इसे किसी दिन तो रोकना होगा. इसलिए मैं खुश हूं कि शीर्ष अदालत के फैसले में ऐसा हुआ है. यह भी सुनकर खुशी हुई कि फैसले में कहा गया है कि निजी कंपनियां आधार पर जोर नहीं दे सकतीं, चाहे बैंक हों या दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियां.’
लेकिन ऐसा नहीं है कि फैसले से सब खुश हैं.
नंदन निलेकणी ने आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा, ‘यह इस कानून की संवैधानिकता पर बस कोई राय भर नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने आधार के संस्थापक सिद्धांतों को स्पष्ट रूप मान्य किया है. आधार एक अद्वितीय पहचान परियोजना है जो देश के विकास लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण है.’
This is a landmark judgement in favour of #Aadhaar. More than just opining on the constitutionality of the act, the SC has unequivocally validated the founding principles for Aadhaar. Aadhaar is a unique identity project that is critical to the developmental goals of the nation.
— Nandan Nilekani (@NandanNilekani) September 26, 2018
एमनेस्टी इंडिया ने ट्वीट किया, ‘कई जरूरी सेवाओं और लाभ प्राप्त करने के लिए आधार कार्ड बनवाना जरूरी करने से कई संवैधानिक अधिकारों के उपयोग में बाधा आएगी मसलन भोजन का अधिकार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा का अधिकार.’
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, ‘उनकी पार्टी के लिए आधार सशक्तिकरण का माध्यम था और आज सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कांग्रेस के इसी नजरिये का समर्थन किया है.’
राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, ‘कांग्रेस के लिए आधार सशक्तिकरण का माध्यम था. भाजपा के लिए यह यह दमन और निगरानी का साधन है. कांग्रेस के नजरिये का समर्थन करने और उसकी सुरक्षा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया.’
For Congress, Aadhaar was an instrument of empowerment.
For the BJP, Aadhaar is a tool of oppression and surveillance.
Thank you Supreme Court for supporting the Congress vision and protecting 🇮🇳. #AadhaarVerdict
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 26, 2018
खाद्य अधिकार कार्यकर्ता दीपा सिन्हा ने कहा, ‘हम लोगों के भोजन के अधिकारों के लिए लड़ते रहे हैं और हम उम्मीद कर रहे थे कि ये कल्याणकारी योजनाएं भी आधार से अलग कर दी जाएंगी. इसलिए, इस मायने में फैसला थोड़ा निराशाजनक है.’
वकील-सामाजिक कार्यकर्ता अशोक अग्रवाल ने इसे खासतौर पर स्कूलों में प्रवेश के नजरिये से बहुत अच्छा फैसला बताया.
मानवाधिकार कार्यकर्ता रंजना कुमारी ने दावा किया कि इस फैसले के बाद लोगों को अपनी निजता के उल्लंघन को लेकर संशय कम होगा.
Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/politics/mulayam-singh-yadav-akhilesh-yadav-shivpal-yadav-samajwadi-party-up-assembly-election-2017-lucknow-523146.html
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