Friday, 27 October 2017

रहस्यमयी गुरमीत राम रहीम की फिल्मों में भी छिपा होता था गहरा रहस्य


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डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के जेल जाने के बाद उसकी रहस्यमयी दुनिया की हर परत से पर्दा हटना शुरू हो गया है. बाबा से जुड़ा हर रहस्य और राज बेपर्दा होकर धीरे-धीरे दुनिया के सामने आता जा रहा है. बाबा की एक ऐसी ही मायावी दुनिया थी फिल्मों की दुनिया.इस दुनिया में राम रहीम खुद को एक ऐसा धर्मगुरु और विद्वान बताने की कोशिश करता था कि फिल्म देखने वाले उसके अनुयायी ना सिर्फ उसके भक्त हो जाएं बल्कि वो फिल्म देखने के बाद उसके भक्त समाज के अन्य लोगों के सामने भी उसका गुणगान करें. इसलिए गुरमीत राम रहीम की हर फिल्म में उसको मैसेंजर ऑफ गॉड के तौर पर दिखाया जाता था और ये जताने की कोशिश की जाती थी कि पूरे विश्व में उससे बड़ा कोई गुरु नहीं है. और जितने काम वो समाज के लिए कर रहा है उतने काम किसी और धर्म गुरु ने आज तक दुनिया के किसी भी हिस्से में समाज की भलाई के लिए नहीं किए हैं.


डेरा प्रमुख की पहली फिल्म की शूटिंग शायद बाहर हुई लेकिन उसके बाद की शूटिंग सिरसा और बाहर की लोकेशन पर हुई है जिसके बाद डेरा ने खुद का स्टूडियो बनाया और बाहर से टेक्नीशियन बुलाकर पोस्ट प्रोडक्शन का काम डेरा के स्टूडियो में ही किया जाता था. काफी टेक्नीशियन और क्रू मेंबर ऐसे हैं, जिनकी काफी पेमेंट डेरा विवाद और राम रहीम के जेल जाने के बाद डेरे की तरफ बाकी रह गई. बताए जा रहा है ये लगभग 80 लाख रुपए हैं जिनका कोई हिसाब नहीं हुआ क्योंकि डेरा के खाते सील हैं.


बाबा अब तक पांच फिल्में बना चुका था और छठी फिल्म लाइव गुरुकुल लगभग बन कर तैयार थी जिसका ट्रेलर भी लॉन्च कर दिया गया था. फिल्म की कमाई के बारे में जो सूचना थी जितने भी इनके फॉलोअर्स थे, वो फिल्म की टिकट खरीदते थे और लोगों को फिल्म फ्री में दिखाते थे. और इस तरह से बाबा अपना ब्लैक मनी फिल्मों के रास्ते व्हाइट भी कर लिया करता था.इसमें कोई दो राय नहीं कि हरियाणा सरकार ने बाबा की मदद की और बाबा की फिल्में टैक्स फ्री करके बाबा को कमाई करवाई गई. सिरसा के वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र भाटिया के मुताबिक अगर डेरा सच्चा सौदा की फिल्मों में लगे पैसे की भी जांच हो तो ये साफ हो सकता है कि किस तरह से फिल्मों के माध्यम से काले धन को सफेद किया जाता था.


गुरमीत राम रहीम की किसी भी फिल्म को अगर आप गौर से देखेंगे तो उससे साफ हो जाता है कि गुरमीत राम रहीम की कोशिश थी कि वो अपनी फिल्मों के माध्यम से खुद को भगवान के समान एक धर्मगुरु के तौर पर प्रोजेक्ट करें और फिल्म देखने वाले अपने अनुयायियों और अन्य आम लोगों को ये दिखाने की कोशिश करें कि वो उनके लिए भगवान के समान है. इसके अलावा जितने काम वो समाज की भलाई के लिए करता है उतने ना तो इस देश में सरकार की ओर से किये जाते हैं और ना ही कोई ऐसी अन्य संस्था या धर्मगुरु हैं जो कि इतने ज्यादा सामाजिक भलाई और सरोकार के काम करते हो.


गुरमीत राम रहीम अपनी फिल्मों के माध्यम से ये संदेश देने में काफी कामयाब भी रहा और इसी वजह से कई बार डेरा सच्चा सौदा की तरफ से दावा किया गया कि गुरमीत राम रहीम की हर फिल्म 100 करोड़ से ऊपर का बिजनेस करती है और उस पैसे का इस्तेमाल सामाजिक कार्यों में किया जाता है.


लेकिन डेरा सच्चा सौदा और गुरमीत राम रहीम के फिल्मों से कमाए जाने वाले पैसे को सामाजिक कार्यों में लगाया जाता है या कहीं और इसका खुलासा खुद डेरा सच्चा सौदा की कंपनी एमएसजी के सीईओ सी पी अरोड़ा ने कर दिया. अरोड़ा को पंचकूला में 25 अगस्त को गुरमीत राम रहीम को सीबीआई कोर्ट के द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद फैलाई गई हिंसा की साजिश रचने के आरोप में हरियाणा पुलिस की एसआईटी ने गिरफ्तार किया है. सी पी अरोड़ा ने पुलिस को बताया कि फिल्मों से गुरमीत राम रहीम ने जो पैसा कमाया था उसके फर्जी दस्तावेज उसने ही तैयार किए और उसके बाद इस पैसे को पंचकूला में हिंसा फैलाने और लोगों को इकट्ठा करने के लिए डाइवर्ट किया गया.


सूत्रों के मुताबिक गुरमीत राम रहीम को फिल्मी दुनिया में लाने वाली कोई और नहीं बल्कि उसकी कथित मुंह बोली बेटी हनीप्रीत थी. हनीप्रीत गुरमीत राम रहीम के कपड़ों की डिजाइनिंग से लेकर उसके स्टाइल और मेकअप का पूरा ख्याल रखा करती थी और गुरमीत राम रहीम ने हनीप्रीत को मेकअप और स्टाइल आर्टिस्ट दे रखे थे और हनीप्रीत इन लोगों के साथ मिलकर गुरमीत राम रहीम की हर फिल्म में उसके मेकअप उसके लुक्स और स्टाइल पर पूरी रिसर्च करती थी और उसके बाद गुरमीत राम रहीम उसी रंग-रूप में फिल्मों में दुनिया के सामने आता था.


पहली फिल्म आने के बाद गुरमीत राम रहीम और हनीप्रीत पर फिल्मों का इस कदर क्रेज चढ़ गया कि उन्होंने सिरसा में डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के अंदर ही रिकॉर्डिंग से लेकर फिल्मों की एडिटिंग और अन्य ग्राफिक डिजाइनिंग और लेटेस्ट टेक्निक के स्टूडियो बना डाले और फिल्मों के प्रोडक्शन से लेकर फिल्मों को एडिट करना और तमाम अन्य तकनीकी काम डेरा सच्चा सौदा से ही करने शुरू कर दिए और इसके लिए साउथ की फिल्म इंडस्ट्री के तकनीकी कलाकारों के साथ मुंबई में स्ट्रगल कर रहे तकनीकी, ग्राफिक डिजाइनिंग, एक्शन, और इफेक्ट्स आर्टिस्ट को सस्ती सैलरी पर डेरा सच्चा सौदा की प्रोडक्शन कंपनी हकीकत एंटरटेनमेंट ने हायर कर लिया और इन लोगों के रहने-खाने की व्यवस्था भी डेरा सच्चा सौदा में ही कर दी गई.


लेकिन जैसे ही गुरमीत राम रहीम जेल में गया तो इन लोगों को समझ में आ गया कि अब इनका कुछ नहीं हो सकता और इन लोगों ने हकीकत एंटरटेनमेंट के सीनियर अधिकारियों से अपनी सैलरी और अन्य फंड्स की डिमांड की लेकिन कंपनी की तरफ से कोई पुख्ता जवाब ना मिलने के बाद इन लोगों ने सिरसा के लेबर कोर्ट में जाकर डेरा सच्चा सौदा की प्रोडक्शन कंपनी हकीकत एंटरटेनमेंट के खिलाफ केस दायर कर दिया.


कुल मिलाकर फिल्में गुरमीत राम रहीम के लिए जहां एक ओर ब्लैक मनी को व्हाइट करने का जरिया थी तो वहीं फिल्मों के माध्यम से गुरमीत राम रहीम पूरी दुनिया को ये दिखाना चाहता था कि वो फिल्मों से जुड़े हर काम में माहिर है इसीलिए फिल्म के आख़िर में जब फिल्म की सपोर्ट कास्ट के नाम का स्क्रॉल चला करता था, तब एक्शन से लेकर म्यूजिक, प्लेबैक सिंगिंग, प्रोडक्शन, क्रिएटिव आर्टिस्ट, सिनेमेटोग्राफी, कोरियोग्राफी और हर जगह गुरमीत राम रहीम का नाम जरूर लिखा जाता था ताकि उसके अनुयायी ये समझ सके कि उनका गुरु फिल्म बनाने में भी एकदम माहिर है और दुनिया का कोई भी ऐसा काम नहीं है जो उसकी पहुंच से बाहर हो.


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