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कॉग्रेस से नाता तोड़ चुके नारायण राणे ने अपनी नई पार्टी बना ली है. उन्होंने इस पार्टी का नाम महाराष्ट्र स्वाभिमानी पार्टी रखा है. इस पार्टी के निशाने पर कौन होगा… झंडा कैसा होगा… ये अब तक तय नहीं हो पाया है.अपने पार्टी के ऐलान के साथ ही नारायण राणे ने अपनी वो इच्छा व्यक्त कर दी जो आमतौर पर सियासत में बहुत से नेता खुलकर कहते आए हैं. राणे ने सरेआम ऐलान किया कि उनकी मुख्यमंत्री बनने की महत्वकांक्षा अब भी जिंदा है और वो मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं.
राणे पहली बार कब बने थे सीएम ?
नारायण राणे ने अपने सियासी जिंदगी की शुरुआत शिवसेना से की थी. पहले कार्यकर्ता, फिर पार्षद और फिर विधायक बनने के साथ ही शिवसेना में राणे का कद बढ़ता गया. एक वक्त ऐसा भी आया जब वो बाल ठाकरे के सबसे करीबी और विश्वासपात्र बन गये. शायद यही वजह है कि 1995 में जब महाराष्ट्र की सत्ता पर शिवसेना काबीज हुई तब पहले मनोहर जोशी को मुख्यमंत्री बनाया गया. लेकिन कुछ साल बाद बाल ठाकरे ने जोशी को हटाकर नारायण राणे को मुख्यमंत्री बन दिया.मुख्यमंत्री बनने की खुशी ज्यादा दिन तक नहीं टीक सकी. राणे सिर्फ छह महीने तक ही मुख्यमंत्री रहे और 1999 में चुनाव हो गए. जिसमें शिवसेना सत्ता से बेदखल हो गई और उनका दोबारा मुख्यमंत्री बनने का सपना टूट गया. 2005 में राणे मुख्यमंत्री बनने का सपना लेकर कॉग्रेस में दाखिल हुए. लेकिन कांग्रेस ने 9 साल तक नारायण राणे को लटका कर रखा और सीएम बनाने का वादा कभी पूरा नहीं होने दिया.
क्या कभी पूरा भी हो पायेगा दोबारा मुख्यमंत्री बनने का सपना?
नारायण राणे ने नई पार्टी तो बना ली है, लेकिन अपनी पार्टी की जड़ें जमाने के लिये सत्तापक्ष पर निशाना साधने के बजाय राणे बीजेपी के विकास मॉडल की कसीदें पढ़ रहें हैं. खुद को महाराष्ट्र लेवल का नेता बता रहें हैं.
सूत्रों की माने तो जल्द राणे की पार्टी बीजेपी को महाराष्ट्र में समर्थन भी दे देगी और उन्हें फडणवीस सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बनाया जा सकता है. लेकिन राणे की मौजूदा सियासी ताकत देखते हुए उनका दोबारा सीएम बनने का सपना बहुत मुश्किल या कहें ना के बराबर ही लगता है.
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