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चबाने वाले तंबाकू (एसएलटी) से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों पर चिंता जताते हुए देशभर के विशेषज्ञों ने पान मसाला और सुपारी के विज्ञापनों पर रोक लगाने की तथा तंबाकू उत्पादों की खुली बिक्री को प्रतिबंधित करने की सिफारिश की है.वैज्ञानिकों के एक समूह ने धूम्ररहित तंबाकू (एसएलटी) पर नियंत्रण के लिए इस तरह की अनेक सिफारिशें कीं और ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन के एफसीटीसी (तंबाकू नियंत्रण पर रूपरेखा का समझौता) ग्लोबल नॉलेज हब’ के रूप में कार्य कर रहे एनआईसीपीआर ने इन सिफारिशों को स्वीकार करते हुए इन्हें नीति निर्माताओं के साथ साझा करने का आश्वासन दिया.
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के तहत आने वाले राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम और अनुसंधान संस्थान (एनआईसीपीआर), नोएडा ने ‘धूम्ररहित तंबाकू के नियंत्रण में प्राथमिकताएं: अनुसंधान और प्रशिक्षण की ज़रूरतें’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया था जो मंगलवार को समाप्त हुई.
कार्यशाला में एसएलटी उत्पादों के सरोगेट विज्ञापनों और मार्केटिंग के प्रभाव का अध्ययन करने की जरूरत बताते हुए सिफारिश की गयी कि खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत पान मसाला और सुपारी के विज्ञापनों पर रोक लगनी चाहिए.किशोरों द्वारा एसएलटी के उत्पादों के इस्तेमाल की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए विशेषज्ञों ने सिफारिश की कि जीएसटी व्यवस्था के तहत करों के प्रभाव का अध्ययन कराया जाए और तंबाकू के सभी पैक की कम से कम मात्रा के साथ बिक्री का मानकीकरण तय करने के लिए अध्ययन कराया जाए. इसके लिए तंबाकू उत्पादों की खुली बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने की सिफारिश की गयी. टिन के बड़े पैक में एसएलटी की बिक्री का भी सुझाव आया और इसके लिए भी अनुसंधान की ज़रूरत बताई गयी.
वैज्ञानिकों के समूह ने कहा कि सरकारों को अपने राष्ट्रीय स्वास्थ्य निगरानी कार्यक्रमों के जरिये वयस्कों, युवाओं और किशोरों के बीच समय समय पर सर्वेक्षण कराने चाहिएं ताकि सिगरेट आदि उत्पादों से अलग तंबाकू उत्पादों और सुपारी के इस्तेमाल पर निगरानी रखी जा सके. एनआईसीपीआर और एसएलटी पर डब्ल्यूएचओ एफसीटीसी ग्लोबल नॉलेज हब के निदेशक प्रोफेसर रवि मेहरोत्रा ने विशेषज्ञ समूह की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि प्रमुख हितधारकों और नीति निर्माताओं के साथ इन्हें साझा किया जाएगा ताकि आगे उचित तरीके से अमल में लाया जा सके.
Article source: http://www.jagran.com/news/national-indians-money-in-swiss-banks-hit-record-low-at-rs-4500-crore-16281906.html
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