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साल 1993 में जब निर्माता निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग ने ‘जुरासिक पार्क’ फ़िल्मों की पहली फ़िल्म को रिलीज़ किया था तो इस फ़िल्म ने विश्वभर में तहलका मचा दिया था.विलुप्त हो चुके डायनोसॉर को एक बार फिर से ज़िंदा कर इंसानो के बीच लाने की इस कहानी को विश्वभर में 900 अरब रुपयों से ज़्यादा का कारोबार मिला. इस फ़िल्म के बाद डायनोसॉर खिलौने, डायनो म्युज़ियम और डायनो फ़न पार्क की जैसे बहार ही आ गई.
फ़िल्म की कहानी 1990 में लिखे गए माइकल क्रिच्टन के नॉवेल जुरासिक पार्क पर आधारित थी और सिर्फ़ इतनी ही बात थी की एक अमीर व्यापारी ने विज्ञान के ज़रिए करोड़ों साल पहले विलुप्त हो चुके डायनोसॉरों को एक थीम पार्क में फिर से ला दिया है और दुनियाभर से दर्शक इस जुरासिक पार्क में डायनो सफ़ारी के लिए आ सकते हैं.
फ़िल्म के पहले भाग में डायनो सफ़ारी के दौरान आई ख़राबी के बाद डायनोसोर पूरे पार्क को तहस नहस कर डालते हैं, इसके बाद साल 1997 में इस फ़िल्म का सीक्वल लाया गया ‘दि लॉस्ट वर्ल्ड’ जिसमें डायनोसॉर शहर पहुंच जाते हैं और तबाही मचाते हैं.इस फ़िल्म का तीसरा भाग 2001 में रिलीज़ किया गया जिसमें एक क्रैश लैंडिंग के यात्रियों को बचाने के लिए एक टीम को फिर से उस आईलैंड पर आना पड़ता है जहां डायनो का घर है.
लेकिन इस सीरीज़ की तीसरी फ़िल्म को वो रिस्पॉन्स नहीं मिला जिसकी उससे उम्मीद की जा रही थी. ज़ाहिर है निर्माताओं को एक नई कहानी चाहिए थी और इसलिए है साल 2015 में जुरासिक वर्ल्ड नाम की एक नई फ़िल्म बनाई गई.
इस फ़िल्म की कहानी पहली फ़िल्म के साथ शुरु होती है, जहां बॉलीवुड अभिनेता इरफ़ान जुरासिक पार्क को फिर से खोल देते हैं और इस बार उनके पास पहले से भी भयानक डायनोसॉर हैं.
फ़िल्म एक लंबे अंतराल के बाद रिलीज़ हुई तो ज़ाहिर है कि इसे दर्शक मिलने ही थे उपर से क्रिस प्रैट और इरफ़ान जैसे अभिनेताओं ने इस फ़िल्म को चर्चा दिलाई लेकिन आलोचकों ने फ़िल्म को बहुत कोसा.
दरअसल इस फ़िल्म मेें जुरासिक पार्क सीरीज़ की पहली फ़िल्म से मिलती जुलती कई समानताएं थी और कई फ़िल्म समीक्षकों को इसकी कहानी ‘डीप ब्लू सी’ से मिलती जुलती भी लगी, जिसमें शार्कों को कंप्यूटर की मदद से ज़्यादा ताकतवर और समझदार बनाया जाता है.
जुरासिक पार्क फ़िल्मों के निर्माता स्टीवन स्पीलबर्ग जो इस नई फ्रैंचाइज़ी से सलाहकार के तौर पर जुड़े हैं कह चुके हैं कि जुरासिक पार्क फ़िल्मों की कहानी के साथ यह समस्या रहती है.
वो कहते हैं,”इस प्लॉट की समस्या ये है कि आपको जुरासिक पार्क दिखाने के लिए हर बार एक पार्क बनाना होगा, फिर वहां लोग आकर मरेंगे या फिर डायनोसॉर लोगों के बीच आ जाएंगे, कुल मिलाकर कहानी वही सर्किल लेगी और यही कारण था कि लंबे समय तक इन फ़िल्मों का निर्माण नहीं हो सका.”
दरअसल जुरासिक पार्क फ़िल्मों के साथ यह समस्या शुरु से ही रही है कि कैसे इंसानो और डायनोसॉर का टकराव करवाया जाए. कोई भी इंसान जानते बूझते डायनो के सामने क्यों जाना चाहेगा. क्या आप जानते बूझते अफ्रीका के शेरों के मैदान में घूमना पसंद करेंगे?
सोशल मीडिया पर लगातार इस बात की चर्चा है कि 2018 में रिलीज़ होने वाली जुरासिक वर्ल्ड की दूसरी और जुरासिक सीरीज़ की पाँचवी फ़िल्म की कहानी क्या होगी.
ये तो तय है कि इस फ़िल्म में क्रिस प्रैट नज़र आने वाले हैं क्योंकि एक ट्वीट में उन्होनें नई फ़िल्म का टीज़र दिया है लेकिन इसके बाद क्या फिर वही कहानी दोहराई जाएगी, सोशल मीडिया और फ़िल्म समीक्षकों में इस बात को लेकर चर्चा है.
ऐसा होने का एक बड़ा कारण ये भी है कि हाल ही में जुरासिक वर्ल्ड दि फ़ॉलेन किंगडम का पोस्टर जारी किया गया है और ये हॉलीवुड की सबसे महंगी फ़िल्मों में से एक हो सकती है ऐसे में अगर दर्शकों को वही बासी कहानी परोसी गई तो फ़ॉलेन किंगडम के साथ ही जुरासिक फ़िल्मों का भी अंत तय है.
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