Tuesday, 28 November 2017

मौका मिलते ही रोहित, विजय और ईशांत यूं चमके..


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मौजूदा दौर में भारतीय क्रिकेट टीम प्रतिभाओं के लिहाज़ से दुनिया में सबसे बेहतर है. हालात कुछ ऐसे हैं कि प्लेइंग इलेवन में जगह बनाने की बात तो छोड़िए, आज बैंच पर बैठने के लिए भी खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है.इन परिस्थितियों में खिलाड़ियों को इस बात पर निर्भर रहना पड़ता है कि कब कौन सा साथी अपनी व्यक्तिगत वजहों से टीम का हिस्सा नहीं है या फिर चोटिल है.आप इस बात को कुछ इस तरह समझ सकते हैं कि जब कोलकाता टेस्ट के बाद तेज़ गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार और सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने व्यक्तिगत वजहों से नागपुर टेस्ट से आराम लिया तो मुरली विजय और ईशांत शर्मा को टीम एकादश में जगह मिली.


सीमित ओवरों की क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन के बावजूद एक अदद मौके की तलाश में जुटे रोहित शर्मा के लिए नागपुर में खेलने के चांस तब बने जब कप्तान विराट कोहली अपनी पांच गेंदबाज़ों को खिलाने वाली पॉलिसी के इतर चार गेंदबाज़ के साथ मैदान में उतरे.
संयोग की बात देखिए कोलकाता टेस्ट ड्रॉ होने के कारण टीम इंडिया पर नागपुर में जीतने का दबाव था और इस वजह से रोहित शर्मा, मुरली विजय और तेज़ गेंदबाज़ ईशांत शर्मा के सामने उम्मीदों पर खरा उतरने की कठिन चुनौती थी. इस तिगड़ी ने अपने कोच और कप्तान के अलावा अपने प्रशंसकों की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए बाजी मार ली.विजय ने बजाई वापसी की मुरली
टीम इंडिया के लिए टेस्ट क्रिकेट में पारी की शुरूआत करने वाले ​मुरली विजय ने करीब आठ महीने बाद मिले मौके का फायदा उठाते हुए नागपुर में 128 रन के रूप में शतक जड़ा. यह शतक ना सिर्फ विजय के लिए राहत देने वाला रहा बल्कि ये टीम इंडिया के लिए भी एक बहुत बड़ी राहत है, जिसे अगले महीने दक्षिण अफ्रीका के मुश्किल दौरे पर जाना है.


उन्होंने इस शतक के साथ उन आलोचकों को करारा जवाब दिया है जो कि उन्हें केएल राहुल और शिखर धवन की बेहतरीन फार्म की वजह से दरकिनार कर चुके थे. यह उनका दसवां टेस्ट शतक था. उनके आधे शतकों ने टीम इंडिया को जीत दिलाई है. बतौर सलामी बल्लेबाज़ वह गावस्कर और सहवाग के बाद सबसे अधिक शतक बनाने वाले खिलाड़ी हैं.


हिटमैन का कमाल
सीमित ओवरों की क्रिकेट में दो दोहरे शतक लगाने वाले रोहित शर्मा को जब साल 2013 में मेहमान वेस्टइंडीज के खिलाफ दो टेस्ट सीरीज़ के लिए टीम में शामिल किया गया था, तब उन्होंने कोलकाता में 177 और मुंबई में नाबाद 111 रन की पारी खेलकर जमकर वाहवाही लूटी थी.


इस तगड़ी शुरुआत के बाद वह अगले 19 टेस्टों में सिर्फ छह अर्धशतक लगा पाए. अन्य बल्लेबाज़ों से मिलती चुनौती के कारण उन्हें अपना स्थान गंवाना पड़ा. इसके बाद वह सीमित ओवर क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करते रहे, लेकिन आलोचकों से छुटकारा पाना उनके लिए मुश्किल था. स्थिति ऐसी बनी कि उन पर सीमित ओवर क्रिकेट का टैग चस्पा हो गया. लेकिन इन्दौर में न्यूजीलैंड के खिलाफ अक्टूबर 2016 में अपना आखिरी टेस्ट खेलने वाले रोहित ने नागपुर में कमाल कर दिया. यह पारी उनके लिए ​टर्निंग प्वाइंट भी साबित हो सकती है.


लम्बू का जलवा
78 टेस्टों में 36.46 की औसत से 223 विकेट लेने वाले भातरीय तेज़ गेंदबाज़ ईशांत शर्मा के लिए भी श्रीलंका के खिलाफ नागपुर टेस्ट वापसी का जरिया बना. नागपुर में कप्तान विराट चार गेंदबाज़ों के साथ मैदान में उतरे और ईशांत को प्लेइंग इलेवन में शामिल करने का साहसिक फैसला लिया.


‘लम्बू’ के उपनाम से अपने सा​थियों के बीच मशहूर इस गेंदबाज़ ने इस मौके को दोनों हाथों से लपका. करीब आठ महीने बाद मैदान में उतरते हुए 80 रन देकर मैच में पांच विकेट(पहली पारी में तीन और दूसरी में दो) लिए. यह कोई खास प्रदर्शन नहीं है लेकिन ये दक्षिण अफ्रीका दौरे पर टीम के साथ उनके होने की गारंटी जरूर देता है.

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