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यूपी में मेयर चुनाव की बात हो रही है तो जरा देश की पहली किन्नर मेयर आशा देवी उर्फ अमरनाथ यादव की बात भी कर ली जाए. जिन्हें योगी के गढ़ गोरखपुर की जनता ने नेताओं से खिन्न होकर चुना था.आशा देवी ने वर्ष 2001 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप चुनाव लड़ा था. जब भी यूपी के मेयरों की बात होगी, उन्हें याद किया जाएगा. आशा देवी ने सियासत को जानने-पहचानने के बाद सार्वजनिक तौर पर बयान दिया था कि “राजनीति की गंदगी में रहने से तो अच्छा था कि मैं किन्नर के रूप में ढोलक ही बजाती.”
जब आशा देवी मेयर चुनी गईं थीं उस वक्त बीजेपी अंतर्कलह से गुजर रही थी. योगी आदित्यनाथ बीजेपी से नाराज चल रहे थे. इस समय केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला उस वक्त यूपी के कैबिनेट मंत्री थे. योगी का उभार हो रहा था. इसलिए दोनों नेताओं के बीच की तल्खी से मुकाबला दिलचस्प हो गया था. कहा जाता है कि योगी के समर्थकों ने अंदरखाने आशा देवी का सपोर्ट किया था.
आशा देवी को चूड़ी निशान मिला था. लोग उन्हें लड़ाई से बाहर मान रहे थे. लेकिन जब परिणाम आया तो सभी दलों के प्रत्याशियों की जमानत जब्त थी. आशा देवी मेयर बन चुकी थीं. किन्नर आशा ने लालबत्ती और शानोशौकत से परहेज किया. उन्होंने एक रिक्शे में लालबत्ती लगाकर घूमना शुरू किया. राजनीतिक दलों के खिलाफ जनता के आक्रोश की वजह से मेयर चुनी गईं आशा देवी अब इस दुनिया में नहीं हैं.यूपी चुनाव के पल-पल की खबर जानने के लिए पढ़ें: https://goo.gl/cxwm9k
Article source: http://hindi.pradesh18.com/news/bihar/congress-says-rjd-is-free-to-left-grand-alliance-1485184.html
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