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संघर्ष की ऐसी ही कहानी अमरजीत सिंह कियाम की भी है जो टीम के कप्तान बनाए गए हैं. अमरजीत के पिता मणिपुर के छोटे से शहर थाबल में खेती और बढ़ई का काम करते हैं. उनकी मां वहां से 25 किमी दूर इंफाल में मछली बेचती हैं. अमरजीत ने कहा, ‘मेरे पिता किसान हैं और खाली समय में खेती करते हैं. मां मछली बेचती है लेकिन खेल से मेरा ध्यान ना भटके इसलिए वे मुझे कभी भी काम में हाथ बटाने के लिए नहीं कहते थे’. अमरजीत ने कहा, ‘मेरे चंडीगढ़ फुटबॉल अकैडमी में आने के बाद माता-पिता से बोझ थोड़ा कम हुआ क्योंकि वहां रहने, खाने और स्कूल का खर्च भी अकैडमी ही वहन करती है.’
Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/manoranjan/konkona-accept-apartheid-in-bollywood-412557.html
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