Wednesday, 31 January 2018

चेकन्नूर मौलवी ने उठाई थी तीन नमाज और महिला इमाम की बात


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पुरुषों को नमाज पढ़ाने वाली ज़मीदा और दिन में सिर्फ तीन नमाज होने की बात कहने वालों के पीछे केरल की कुरान सुन्नत सोसाइटी है. नमाज तीन होती हैं और नमाज पढ़ने के तरीके में बदलाव की बात कोई पहली बार नहीं हुई है. न्यूज18 हिन्दी की खास पड़ताल में ये बात सामने आई है कि 1990 के दशक में भी केरल से ये बात उठी थी. और इस आवाज को बुलंद करने वाले थे पीके मोहम्मद अबुल हसन मौलवी उर्फ चेकन्नूर मौलवी.कौन थे पीके मोहम्मद अबुल हसन मौलवी


चेकन्नूर मौलवी अरबी विषय के रिसर्च स्कॉलर थे. ये केरल के मलप्पुरम में 1936 में चेकन्नूर मौलवी का जन्म हुआ था. कॉलेज के समय से ही चेकन्नूर मौलवी ने सिर्फ कुरान को मानने की बात कहते हुए हदीस (जिसमे कुरान के अलावा बहुत सारी बातें बताई गई हैं और जो हुजूर ने फरमाई थी.) को मानने से इंकार करते थे. चेकन्नूर मौलवी ने ही सबसे पहले दिन में पांच वक्त पढ़ी जाने वाली नमाजों को तीन बताया था. उनका कहना था कि सिर्फ सुबह, शाम और रात के वक्त ही नमाज पढ़ी जानी चाहिए.


मौलवी ने बनाई थी कुरान सुन्नत सोसाइटीज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने साथ जोड़ने के लिए चेकन्नूर मौलवी ने एक संस्था कुरान सुन्नत सोसाइटी का भी गठन किया था. ये सोसाइटी आज भी केरल में काम कर रही है. ज़मीदा के अनुसार इस सोसाइटी में केरल से एक लाख लोग जुड़े हुए हैं. वहीं सऊदी अरब, सिंगापुर और मलेशिया के लोग भी इस सोसाइटी के साथ जुड़े हैं.


1993 से गायब हैं चेकन्नूर मौलवी


चेकन्नूर मौलवी की पत्नी उम्मा के अनुसार एक दिन शाम के वक्त दो लोग उनके घर पर आए. और जगह पर भाषण (तकरीर) कराने के लिए चेकन्नूर मौलवी को ले गए. लेकिन उसके बाद से चेकन्नूर मौलवी का कोई पता नहीं चला है. सीबीआई भी इस मामले में जांच कर चुकी है. सीबीआई कोर्ट दो लोगों को इस मामले में दो-दो साल की सजा भी सुना चुकी है. वहीं सुप्रीम कोर्ट में भी ये मामला उठ चुका है. चेकन्नूर मौलवी की सूचना देने वाले को तीन लाख रुपये तक का इनाम देने की घोषणा की गई थी. लेकिन अभी तक चेकन्नूर मौलवी की बॉडी भी बरामद नहीं हो पाई है.


क्या कहते हैं भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष


भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्दुल रशीद अंसारी का कहना है कि ‘नमाज और नमाज पढ़ने के तरीकों के बारे में कुरान और हदीस से सब कुछ जाहिर है. इसलिए जो बात कुरान और हदीस से जाहिर है तो वो किसी एक शख्स के कहने से पांच से तीन या छह नहीं हो जाएंगी. कुरान और हदीस में किसी शख्स की मर्जी नहीं चलती है.’


Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/manoranjan/konkona-accept-apartheid-in-bollywood-412557.html

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