Tuesday, 30 January 2018

ब्लू मून.. ब्लड मून....सुपर मून... ये सब एक साथ देखना न भूलें


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31 जनवरी की शाम अगर आप ने चांद देख लिया तो यकीन मानिए चांद के लिए आपकी दीवानगी चार गुणा बढ़ जाएगी, क्योंकि ये चांद बहुत खास नज़र आने वाला है.  यानि पूर्णिमा के इस चांद में जो बात होगी, वो शायद ही देखने को मिले. इसमें चांद कई बार अपने रंग बदलेगा..इसलिए ये सिर्फ फुल मून ही नहीं होगा बल्कि ब्लू…ब्लड….सुपर मून सभी रूपों में नजर आएगा.क्या है ब्लू मून –


आम तौर पर पूर्णिमा एक महीने में एक ही बार आती है


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कभी-कभी पूर्णिमा एक महीने में दो बार भी हो जाती हैपहली या दूसरी तारीख को पूर्णिमा होने पर ऐसा होता हैएक महीने में दूसरी बार आने वाली पूर्णिमा को ब्लू मून कहते हैं.


क्या है ब्लड मून –


जब सूरज, धरती और चांद सीधी रेखा में आ जाए


और धरती की छाया चांद पर पड़े तो उसे चंद्र ग्रहण कहते हैं


धरती की छाया से जब पूरा चांद छिप जाए तो उसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं


पूर्ण चंद्र ग्रहण को ही अंग्रेजी में ब्लड मून कहा जाता है


ब्लड मून को यूं तो भारतीय ज्योतिष शास्त्र में खतरनाक समय माना जाता है क्योंकि चंद्रग्रहण के समय राहु और केतु की छाया सूर्य और चंद्रमा पर पड़ती है. इस कारण सृष्टि इस दौरान अपवित्र और दूषित को हो जाती है. यह बात मान्यताओं की है लेकिन ब्लड मून देखना अद्भुत अहसास है.


क्या है सुपरमून


चांद धरती के इर्द-गिर्द इलिप्टिकली यानी अंडाकार घूमता है


चांद जिस पथ पर धरती के चक्कर लगाता है उसे एलिप्स कहते हैं


एलिप्स की छोटी बाजू को पेरिजी और बड़ी बाजू को अपोजी कहते हैं


जब चंद्रमा पेरिजी पर होता है, तब वो धरती के सबसे पास होता है


पेरिजी पर चांद आम रातों के मुकाबले 14 फीसदी ज़्यादा बड़ा नजर आता है


पेरिजी पर चांद आम रातों के मुकाबले 30 फीसदी ज़्यादा चमकता भी है


जब पूर्णिमा हो और चांद पेरिजी पर हो तो उस रात सुपरमून दिखता है


Article source: http://hindi.pradesh18.com/news/live-news/nandini-sindar-says-chhattisgarh-police-trapped-me-and-other-activists-1508466.html

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