Tuesday, 30 January 2018

कासगंज हिंसा: पुलिस का दावा, गोलियां बरसा कर हमें मारने की कोशिश की गई


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सुहास मुंशीकासगंज हिंसा मामलों में दर्ज एफआईआर (FIR) में दावा किया गया है कि हिंदुओं और मुसलमानों की भीड़ ने एक-दूसरे के खिलाफ पत्थरबाज़ी की और दोनों समुदायों ने एक दूसरे पर गोलियां भी चलाई. इसके अलावा भीड़ ने उन पुलिसकर्मियों को भी मारने की कोशिश की, जिन्होंने इस हिंसा के दौरान हस्तक्षेप किया. कासगंज हिंसा को लेकर 5 FIR दर्ज की गई हैं. न्यूज़ 18 के पास FIR की कॉपी मौजूद है.


हिंसा को लेकर 3 FIR पुलिस ने दर्ज की हैं. चौथी FIR इस हिंसा में मारे गए 22 साल के चंदन के पिता ने की है. जबकि पांचवी और आखिरी FIR हिंसा में घायल नासिर के परिवारवालों ने की है.


स्थानीय SHO ने FIR ने लिखा है कि 26 जनवरी को जब हिंसा के दौरान पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो आस-पास के लोगों ने उन पर गोलियां चलाई.FIR में लिखा है “एक समुदाय ने दूसरे पर आरोप लगाया की उन लोगों ने तिरंगे की रैली के दौरान बाधा पहुंचाने की कोशिश की. पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन कोई सुनने के लिए तैयार नहीं था. दोनों समुदायों ने एक दूसरे पर पत्थरबाजी शुरु कर दी. हमारी तरफ भी पत्थर फेंके गए और हम पर गोलियां बरसा कर हमें जान से मारने की कोशिश भी की गई.”


FIR की कॉपी में आगे लिखा है कि एक समुदाय के लोगों ने पूजा के स्थलों पर आग लगा दी जिससे की मामले को सांप्रदायिक रंग दिया जा सके. दो मस्जिदों में आग लगा दी गई.


FIR में एक नसरुद्दीन नाम के शक्स का जिक्र किया गया है जो आर्म के साथ लोगों को मारने के लिए गोलियां चला रहा था. FIR में लिखा है “लोगों के बीच आंतक का माहौल था. लोग चारों तरफ शहर में घूम कर गोलियां चला रहे थे. सड़क पर 10 बुलेट के शेल्स भी मिले.


चंदन के पिता सुशील गुप्ता ने अपने FIR में दावा किया है कि जब उनका बेटा ‘तिरंगा मार्च’ निकाल रहा था उस वक्त कुछ मुसलमानों ने उन्हें रोक दिया. उसे मारने के लिए पहले से ही प्लान तैयार कर लिया गया था. चंदन के पिता ने FIR में आगे लिखा है कि मुसलमानों ने “पाकिस्तान ज़िन्दाबाद’’ के नारे लगाए  और जब उनके बेटे ने इसका विरोध किया तो उन पर गोलियां चला दी गई.


नासिर जिसके बेटे को जांघ पर गोलियां लग गई थी उसने अपने FIR में लिखा है कि उग्र भीड़ में से किसी ने मेरे लड़के पर गोलियां चला दी. एक अन्य FIR में SHO ने ज़िक्र किया है कि कैसे 30 से 40 लोगों की ग्र भीड़ ने दुकानों में आग लगा दी और फिर सांप्रदायिक  हिंसा शुरू हो गई.


कासगंज में 26 जनवरी की सुबह उस वक्त सांप्रदायिक हिंसे शुरू हुए जब तिरंगा यात्रा पर कुछ अज्ञात लोगों ने पत्थर फेंकने शुरु कर दिए. इस यात्रा में विश्व हिंदू परिषद और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता शामिल थे. अब तक पुलिस ने कासगंज हिंसा में कथित तौर पर शामिल करीब सौ लोगों को हिरासत में लिया है.


Article source: http://feedproxy.google.com/~r/ndtvkhabar/~3/oK66WBavCUE/story01.htm

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