Monday, 26 March 2018

किस्सा क्रिकेट का..पिता का अंतिम संस्कार और विराट का मैच


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19 दिसंबर 2006 की शाम 18 साल के विराट कोहली अपने घर की सीढियां चढ़ रहे थे. उनके दिमाग में एक ही बात घूम रही थी. वहीं दिल्ली ठंड से ठिठुर रही थी.



 उनकी टीम दिल्ली कर्नाटक के खिलाफ फिरोजशाह कोटला मैदान पर रणजी मैच खेल रही थी. कर्नाटक ने 446 रनों का बड़ा स्कोर बनाया था. दिल्ली 103 रनों पर पांच विकेट खो चुकी थी. फॉलोआन का खतरा सामने था. विराट 40 रन बनाकर खेल रहे थे.



 वह सोच रहे थे कि उन्हें हर हाल में शतक बनाना है, अन्यथा टीम में जगह मुश्किल में पड़ जाएगी. उनके पिछले कुछ मैच खराब गए थे.



 घर में कदम रखते ही विराट ने पिता को बिस्तर पर देखा. पिता को कुछ दिनों पहले ही स्ट्रोक पड़ा था. शरीर का दायां हिस्सा लकवे का शिकार हो चुका था.





 20 दिसंबर की सुबह ठंड कुछ और ज्यादा ही थी. घर में सभी लोग सो ही रहे थे कि तीन बजे तड़के पिता को हार्टअटैक पड़ा. तमाम कोशिश के बाद भी कोई डॉक्टर नहीं आ पाया. पिता गुजर गए.




 पूरा घर सदमे में था. रिश्तेदारों को दुखद खबर की सूचना दी जा चुकी थी. .. विराट सोच नहीं पा रहे थे कि वो अब क्या करें…



 सुबह छह बजे उन्होंने कोच राजकुमार शर्मा को फोन मिलाया. बातचीत में ये निष्कर्ष निकला कि उन्हें मैच खेलने जाना चाहिए.



 विराट घर से निकले. साथी क्रिकेटर ईशांत को साथ लिया. रास्ते में उन्हें बताया कि क्या हो गया है. ईशांत को विश्वास ही नहीं हुआ कि विराट जो कह रहे हैं, वो सही है.





 दोनों मैदान पर पहुंचे. विराट ने किसी को कुछ नहीं बताया. वह नार्मल लगने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन ईशांत ने जरूर सबको बता दिया.



 जब टीम के साथी ढांढस देने तब विराट खुद को रोक नहीं पाएं…फूट-फूट कर रोने लगे…तभी उन्हें ये भी महसूस हुआ कि पिता का साया उनके जीवन से उठ चुका है.



 उन्होंंने बैट उठाया. विकेट पर पहुंचे… चुपचाप बैटिंग करते रहे ..जब 90 रन पर पहुंचे तो एक गलत फैसले से आउट दे दिए गए..हालांकि टीम फॉलोआन के संकट से निकल चुकी थी.



 मैदान से सीधे अंतिम संस्कार में पहुंचे. विराट ने मां को भी नहीं बताया था कि वो मैच खेलने जा रहे हैं..बताया तो केवल चुपचाप बड़े भाई को..



 ..कई सालों बाद विराट ने इस बात फिर याद करते हुए कहा ..अब अगर ऐसा हो जाए..तो नहीं कह सकता कि मैं फिर ऐसा कर पाऊंगा..जैसा उस दिन हो गया था.

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