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सुप्रीम कोर्ट में आधार की संवैधानिक वैधता की चुनौती देने वालों में एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, सामाजिक कार्यकर्ता, नेता और कुछ राज्य सरकारें शामिल थीं. इनमें कर्नाटक हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश केएस पुत्तास्वामी, सर्वोच्च न्यायालय में आधार को चुनौती देने वाले पहले याचिकाकर्ताओं में से एक थे. 92 वर्षीय पुत्तास्वामी ने यह याचिका 2012 में दायर की थी. उन्होंने अपनी दलीलों के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान की सेवाएं लीं.उनका कहना था कि सरकारी सेवाओं को पाने के लिए आधार की अनिवार्यता उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा. आधार की वैधता पर लड़ी गई इस कानूनी लड़ाई में कुल 31 याचिकाकर्ता थे. इनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता वी एस अच्युतानंदन और सीपीआई नेता बिनय विश्वम भी थे. जिन्होंने आधार के विभिन्न पहलुओं को चुनौती दी.
न्यायमूर्ति पुत्तास्वामी ने अक्टूबर 2012 में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय ने आधार के लिए बायोमेट्रिक कलेक्शन को चुनौती दी थी. वहीं एक्टिविस्ट मेजर जनरल सुधीर जी वोम्बटकेरे ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर कहा था कि आधार के जरिए सरकार को लोगों की निगरानी की अनूठी ताकत मिल गई है.
मैगसायसाय पुरस्कार विजेता और बाल अधिकार कार्यकर्ता शांता सिन्हा भी याचिकाकर्ताओं में शामिल थीं. कार्यकर्ता और सफाई कर्मचारी आंदोलन के संस्थापकों में एक और राष्ट्रीय संयोजक बेजवडा विल्सन भी मामले में याचिकाकर्ता थे. उधर, पश्चिम बंगाल सरकार ने भी आधार कार्यक्रम को चुनौती दी थी.यह भी पढ़ें:
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Article source: http://aajtak.intoday.in/story/theft-on-dry-day-in-liquor-godown-police-search-1-947217.html
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