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तैंतीस साल पहले पिता ने जो फैसला दिया था उसे बेटे ने पलट दिया था. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के पिता वाईवी चंद्रचूड़ ने फैसला दिया था कि कुछ खास मामलों में अनुचित यौन संबंधों के लिए सज़ा का प्रावधान ज़रूर होना चाहिए. लेकिन गुरुवार को डीवाई चंद्रचूड़ ने एडल्टरी को असंवैधानिक करार दे दिया.ये भी पढ़ेंः SC ने क्यों माना कि शादी के बाहर संबंध बनाने वाले पुरुषों को जेल नहीं जाना चाहिए?
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आईपीसी का सेक्शन 497 लैंगिक भेदभाव पर आधारित है. शादी के बाद महिला की यौन संबंधी स्वायत्तता पर पति का एकाधिकार नहीं होता. जबकि जस्टिस चंद्रचूड़ के पिता जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ ने सेक्शन 497 को संवैधानिक करार दिया था.
लेकिन यह दूसरी बार है जब जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने पिता के फैसले को पलट दिया है. इससे पहले एडीएम जबलपुर के मामले में निजता के सिद्धांत पर भी अपना फैसला लिखते हुए उन्होंने अपने पिता के विचारों के विपरीत फैसला सुनाया था.ये भी पढ़ेंः रोम-यूनान में ऐसे थे स्त्री-पुरुष के शारीरिक संबंध, बेवफाई पर नहीं थी सजा
बता दें कि वरिष्ठ चंद्रचूड़ पांच जजों वाली बेंच में से उन चार जजों में से थे जिन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा इमरजेंसी को सही ठहराया था. लेकिन बेटे ने कहा कि चार जजों द्वारा दिए गए उस फैसले में कमियां थीं. जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता व्यक्ति के अस्तित्व से जुड़ी हुई चीज़ें हैं जिन्हें छीना नहीं जा सकता.
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