
READ MORE
एक जासूस सिर्फ अपराध की तहकीकात ही नहीं करता बल्कि वह इंसानी मन और ज़िंदगी की परतों को भी टटोलता है. अपने पेशे में एक जासूस सामान्य दिखने वाले लोगों और रिश्तों के उन रहस्यों का पर्दाफाश करता है जो किसी जुर्म को बुन रहे होते हैं. hindi.news18.com की इस विशेष सीरीज़ में एक जासूस की ज़बानी रिश्तों में जुर्म की कहानी.#LoveSexaurDhokha: दौलत के लिए शादीशुदा मर्द पर चलाया ‘जादू’
मुंबई में दोहरे हत्याकांड के बाद हत्यारों को लेकर कश्मकश बनी हुई थी और ऐसा शक था कि शादीशुदा औरत ने अपने गुप्त प्रेमी के साथ मिलकर यह सब किया है लेकिन सबूत किसी के पास नहीं था. तब जासूसी करने के लिए एक अलग और जोखिम भरा रास्ता चुनना ही एकमात्र विकल्प था और जासूस ने उस घर में एक सर्वेंट की हैसियत से काम करते हुए एक्सट्रा मैरिटल रिलेशन और कातिलों की करतूत का पर्दाफाश किया.
#LoveSexaurDhokha: ‘उसने सेक्स के लिए मना किया तो अरेस्ट करवा दिया’मुंबई में 90 के दशक में एक केस अखबारों की सुर्खियों में छाया हुआ था जिसमें एक आदमी संजीव का घर पर ही कत्ल हो गया था. संजीव काफी अमीर परिवार से एक शादीशुदा आदमी था और उसके घर वालों का कहना था कि पिछले कुछ समय से संजीव और उसकी पत्नी राखी के बीच रिश्ता ठीक नहीं चल रहा था. हालांकि राखी ने यही बयान दिया था कि दोनों के बीच सब कुछ ठीक था और जिस रात कत्ल हुआ, वह नींद की गोलियां खाकर सोई थी इसलिए उसे सुबह ही पता चला.
ये खबरें चल ही रही थीं कि एक और खबर आई कि राखी के टीनेजर बेटे अतुल की भी हत्या हो गई. मीडिया में कुछ सूत्रों और कुछ पुलिस के हवाले से कई तरह की खबरें थीं. एक यह कि राखी को इस हत्या के बाद सदमा लगा है और वह खराब सेहत से गुज़र रही है. दूसरी यह कि संजीव और अतुल की हत्या के पीछे राखी का ही हाथ होने का शक है. काफी दिनों बाद आखिरकार आलम यह था कि पुलिस को इस केस में पूरा शक था कि राखी का कोई गुप्त प्रेमी है जिसके साथ मिलकर या जिसके ज़रिये कत्ल करवाए गए हैं.

उलझन यह बनी हुई थी कि न तो इस बात की तस्दीक हो पा रही थी और न ही राखी के उस प्रेमी को पुलिस खोज पा रही थी. जब यह पता ही नहीं था कि वो कौन है तो वो कहां है? यह सवाल तो वैसे भी किसी काम का नहीं था. इधर राखी की ससुराल वालों को शुरू से यही शक था कि इसमें राखी का ही हाथ है. लेकिन किसी के पास कोई सबूत या ऐसा कोई सुराग नहीं था जिससे राखी के खिलाफ कुछ भी किया जा सके.
दूसरी तरफ, राखी अकेली रह गई थी और उससे हमदर्दी जताती हुई कुछ कहानियां भी सामने आ रही थीं. वह अपने बड़े से घर में अकेली रह रही थी क्योंकि हत्याकांड के बाद से उसके ससुराल वालों ने उससे किनारा कर लिया था. बस एक दो नौकर—नौकरानियां उसके घर में काम के लिए आया करते थे. उनके ज़रिये भी यही बात सामने आती थी कि राखी बहुत परेशान और मायूस रहा करती है.
ऐसे में राखी की ससुराल के कुछ लोगों ने हमसे कॉंटैक्ट कर यह शक ज़ाहिर किया इस हत्याकांड की वजह राखी का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर ही है और काम यह करना था कि उस प्रेमी को पहचान कर सामने लाया जाए ताकि पुलिस भी शक की बिना पर उसे गिरफ्तार कर सके. काम मुश्किल था क्योंकि यह अंधेरे में तीर मारने जैसा था. फिर भी हमने यह केस हाथ में लिया और चूंकि इस केस को अखबारों में पढ़कर काफी दिलचस्पी पैदा हो गई थी इसलिए भी इस केस में काम करने का मन था.
अब सबसे पहला काम था यह पता करना कि राखी की ससुराल वालों का शक सही था भी कि नहीं. क्या सच में राखी का कोई गुप्त प्रेमी था? इस जवाब के लिए हमने राखी और उसके घर पर नज़र रखना शुरू की. पहले कुछ दिन तक तो दाल में कुछ काला नज़र नहीं आया क्योंकि राखी की फिक्स लाइफस्टाइल थी और उसके अलावा कुछ नहीं हो रहा था. वह ज़्यादातर घर पर ही रहती थी और कभी कार से आसपास घर के ही काम से जाया करती थी.
फिर हमने देर रात तक नज़र रखना शुरू किया तो आधी रात के बाद चुपके से एक शख्स उस घर में दाखिल हुआ. अब इस केस में दिलचस्पी पैदा हो चुकी थी. काफी देर रुकने के बाद सुबह होने से पहले वह शख्स चुपके से उस घर से चला भी गया. अगले दो हफ्तों में दो तीन बार ऐसा हुआ तो यह तो साफ था कि राखी के घर कोई आदमी आधी रात के बाद चुपके से आता है तो यह कोई राज़ का ही रिश्ता हो सकता है, सामान्य तो नहीं.

अब इस रिश्ते और राखी का पूरा सच जानने का वक्त आ गया था. वह आदमी अंधेरे में आता था और अंधेरे में चला जाता था इसलिए उस पर नज़र रख पाना मुमकिन नहीं था क्योंकि उस वक्त इतने साधन नहीं थे जितने आज हैं. ऐसे में इस शख्स की पहचान करने के लिए उस समय राखी के घर पर होना ज़रूरी था जिस समय यह राखी से मिलने आए. सब कुछ सोचने समझने के बाद एक प्लैन बनाया गया और अगले दिन हमने राखी के घर काम करने आने वाली नौकरानी से मुलाकात की.
राखी की नौकरानी सुनीता का खयाल राखी के बारे में अच्छा ही था और मैंने उसे अपनी ज़रूरत बताते हुए कुछ काम दिलवाने में मदद मांगी. सुनीता ने राखी से बातचीत की और राखी ने मुझे काम पर रख लिया. अब मैं रोज़ राखी के घर नौकरानी की तरह काम करने जाने लगी. सुनीता सुबह और शाम दो वक्त थोड़ी देर के लिए आती थी और मैं सुबह से शाम तक राखी के घर रहा करती थी. एक महीना हो चुका था लेकिन गड़बड़ यही थी कि सुबह से शाम के बीच वह अजनबी शख्स कभी उस घर में नहीं आ रहा था.
मुझे जल्द ही ऐसा रास्ता तलाशना था कि मैं रात के वक्त यहां किसी तरह रह सकूं. मैं इस बारे में सोच ही रही थी कि एक दिन राखी की तबीयत बहुत खराब हो गई और वह मेरे सामने बेहोश होकर गिर पड़ी. मैंने फौरन उसकी देखभाल शुरू करते हुए शुरुआती इलाज किया और डॉक्टर को फोन करके बुलाया. डॉक्टर ने जल्दी आकर हालत संभाल ली और राखी मेरी इस देखभाल से बेहद खुश हो गई. उसने खुद मुझे केयरटेकर की तरह घर में रहने के लिए कह दिया. मैं जो चाह रही थी, वह अपने आप हो गया था.
अब मैं पूरे वक्त इस घर में थी और जल्द ही मैंने राखी के घर रात को उसी शख्स को आते पहली बार देखा. मुझे पता चल गया था कि उसका नाम वैभव था. वैभव आता और राखी के कमरे में दरवाज़ा बंद करके ही दोनों के बीच बातचीत भी होती और फिर और भी कुछ. मैं सतर्कता से दरवाज़े पर कान लगाकर और कभी की होल से देखकर दोनों पर नज़र रख रही थी. दिन गुज़रते जा रहे थे और कई बातें साफ होती जा रही थीं.
करीब 6 महीने हो चुके थे मुझे राखी के घर नौकरानी बनकर आए हुए और अब यह कहानी मेरे सामने खुल चुकी थी कि इन दोनों ने ही मिलकर संजीव और अतुल को रास्ते से हटाया था. अपने एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के चलते पहले संजीव को इसलिए रास्ते से हटाया गया क्योंकि दोनों उसके बाद उसकी पूरी जायदाद अपने कब्ज़े में करना चाहते थे. और अतुल की जान इसलिए ली गई थी क्योंकि उसे इन दोनों के बीच एक ऐसे रिश्ते की भनक लग चुकी थी जो उसकी नज़र में नाजायज़ और खतरनाक था. इस गुत्थी के सुलझने पर मैंने एक दिन पुलिस के पास जाकर इस पूरे नाटक की कहानी सुना दी थी.
यह कहानी साफ होते होते अचानक एक रात राखी और वैभव के बीच जमकर झगड़ा हुआ. राखी ने वैभव से कहा कि वह फिर कभी यहां न आए. मैं सब कुछ चुपके से सुन रही थी और यह बात मेरे लिए ठीक नहीं थी कि वैभव यहां न आए. और उधर, राखी ने वैभव पर चिल्लाते हुए कहा — ‘तुम्हें समझ नहीं आता कि मैं क्या कह रही हूं! समझने की कोशिश करो कि कुछ लोग मुझ पर, हम पर नज़र रख रहे हैं, हमारी जासूसी की जा रही है इसलिए अब तुम यहां कभी नहीं आओगे.’

वैभव समझा रहा था कि इस तरह डरने की ज़रूरत नहीं है लेकिन राखी मानने को तैयार नहीं थी और उसकी ज़िद देखते हुए मुझे लग रहा था कि वैभव जल्द ही उसकी बात मानकर हमेशा के लिए यहां से चला जाने वाला है. यानी यही आखिरी मौका था जब वैभव को पकड़ा जा सकता था. मुझे पुलिस को फोन करना था लेकिन फोन घर के बाहर था. ज़ाहिरन पुलिस को आने में थोड़ा वक्त तो लगता ही इसलिए कुछ देर के लिए वैभव को यहीं रोकना भी था.
मैं इसी उधेड़बुन में थी और सोच रही थी कि बाहर किस बहाने से जा सकती हूं तभी किचन की तरफ मेरी नज़र पड़ी. वहां रखे चाकू से मैंने अपने ही पैर पर ज़ोरदार हमला कर लिया और फिर चीख पड़ी. दोनों वहां आए और मेरे पैर से बह रहे खून को देखकर उन्होंने डॉक्टर को बुलाने की बात की लेकिन मैंने कहा कि पास ही डॉक्टर है, मैं अभी वहीं चली जाती हूं. यह कहकर मैं फौरन घर से चली गई और तुरंत पुलिस को फोन किया.
मैं बाहर से नज़र रखे हुए थी कि वैभव घर से निकल न जाए. मैंने पुलिस को जल्द से जल्द पहुंचने के लिए कहा था और कुछ ही मिनटों में पुलिस वहां पहुंची और मेरी मौजूदगी में वैभव को गिरफ्तार किया गया और वैभव के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल रिलेशनशिप रखने वाली राखी को पूछताछ के लिए पुलिस साथ लेकर चली गई. कत्ल के केस के पीछे एक पत्नी के दूसरे आदमी के संबंध होने की यह कहानी जल्द ही सबके सामने आ गई और राखी के ससुराल वालों ने हमारे जुटाए तमाम सबूतों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई भी की.
(यह कहानी मुंबई की प्राइवेट जासूस रजनी पंडित के करियर में आए एक केस पर आधारित है जिसके किरदार वास्तविक हैं, बस उनके नाम नहीं.)
ये भी पढ़ें
माशूका का कत्ल करने के बाद गलती ये थी कि उसके फोन से मैसेज कर दिया
LoveSexaurDhokha: किसी और लड़की के लिए फ्लैट खरीद रहा था उसका पति
गाने के वीडियो की तर्ज़ पर लड़के ने किया कत्ल, लड़की की कविता बनी सबूत
LoveSexaurDhokha: बच्चे के अपहरण के केस ने खोला मां के अफेयर का राज़
LoveSexaurDhokha: ‘पैसे दो वरना वीडियो वायरल करके बदनाम कर दूंगी’
PHOTO GALLERY : रात ढाई बजे लड़की पर एसिड फेंकने वाला कौन था – प्रेमी या प्रेमिका?
Article source: http://www.jagran.com/west-bengal/kolkata-16534430.html
No comments:
Post a Comment