Sunday, 1 October 2017

जब शिवसैनिकों से हंस कर मिले राज ठाकरे


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सियासत में बहुत कम ऐसे मौके आते हैं जब नेता अपने पार्टी की विचारधारा, पार्टी के प्रोटोकॉल को तोड़कर विपक्षी पार्टी के नेताओं को गले लगाते हो और इससे भी कम या फिर ना के बराबर ऐसे लम्हे आते हैं जब नेता अपने विरोधी पार्टी के कार्यकर्ताओं से हंस कर मिले या फिर उनसे हाथ मिलाए.ऐसा ही कुछ दशहरे के दिन मुंबई में देखने को मिला. मुंबई के शिवाजी पार्क में शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की सालाना दशहरा रैली चल रही थी. इसी शिवाजी पार्क के मैदान को लगकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे का घर है.


हज़ारों की संख्या में शिवसैनिक उद्धव का भाषण सुनने के लिए शिवाजी पार्क आए थे. जब उद्धव ठाकरे का भाषण चल रहा था तब राज ठाकरे अपने घर के ग्राउंड फ्लोर पर किताब पढ़ रहे थे.


हर बार की तरह उद्धव अपने सियासी दुश्मनों पर गरजें. लेकिन भाई राज ठाकरे पर निशाना नहीं साधा. उद्धव की सभा ख़त्म होने के बाद शिवसैनिक अपने मंजिल की ओर निकल पड़े.जब राज ठाकरे ने मिलाया शिवसैनिकों से हाथ


चूंकि, राज ठाकरे का घर रास्ते में ही पड़ता है, शिवसैनिक राज ठाकरे के घर के बगल से गुज़र रहें थे. उन्होंने उत्सुकतावश उनके घर की खिड़की में झांका. उन्होंने देखा कि राज ठाकरे कुछ पढ़ रहे थे. बड़ी संख्या में राज ठाकरे के घर के बाहर शिवसैनिक जमा हो गए. उनके घर के बाहर बड़ा पुलिस बंदोबस्त था.


लेकिन शिवसैनिकों ने सुरक्षा की परवाह किए बिना ‘राज साहेब बाहर आओ’ के नारे लगाना शुरू कर दिया. राज ठाकरे ने पहले तो अपने घर के अंदर से ही शिवसैनिकों का अभिवादन किया लेकिन शिवसैनिक नहीं माने. वो लगातार उनसे बाहर आने का आग्रह करते रहे. आखिरकार राज ठाकरे ने शिवसैनिकों की ज़िद्द पूरी करते हुए ना सिर्फ अपने घर के बाहर आए बल्कि शिवसैनिकों से हाथ मिलाकर उनका अभिवादन भी किया.


शिवसैनिकों के लिए कभी ना भुला पाने वाला पल


दरअसल, राज ठाकरे जब शिवसेना में थे तब उनको चाहने वाले लाखों शिवसैनिक थे. लेकिन मतभेदों के चलते राज ने शिवसेना छोड़ दी और अपनी नई पार्टी एमएनएस बना ली. लेकिन राज के अलग हो जाने के बाद भी आजतक शिवसैनिक उन्हे नहीं भुले हैं. राज ठाकरे में आज भी शिवसैनिकों को बालासाहेब ठाकरे की छवि दिखती है.


उनका इस तरह से शिवसैनिकों से हाथ मिलाना राजनीतिक लिहाज़ से एक बड़ी बात मानी जा सकती है और आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरणों का तरफ भी इशारा करती है.

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