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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली मेट्रो के खातों की ऑडिट होने तक इसके किराए में प्रस्तावित वृद्धि रोकने की रविवार को अपील की. उन्होंने कहा कि डीएमआरसी की आमदनी और ख़र्च के बारे में लोगों को बताया जाना चाहिए.केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल निगम के खातों की ऑडिट ज़रूरी है क्योंकि अतीत में निजी बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) कथित फर्ज़ी नुक़सान दिखा कर बिजली का शुल्क बढ़ाती रही थी.
गौरतलब है कि डीएमआरसी किराए बढ़ाना चाहता है क्योंकि इस पर कर्ज़ का भारी बोझ है और तेज़ी से इसका परिचालन अनुपात भी बढ़ रहा है, जिसका मतलब है कि प्रत्येक रुपए की कमाई की तुलना में इसका ख़र्च बढ़ रहा है.
डीएमआरसी की दलील को केजरीवाल ने त्रुटिपूर्ण बताया है. उन्होंने कहा कि मेट्रो को अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि मेट्रो और यात्रियों की ज़रूरतों के बीच संतुलन कायम रखने की फौरन ज़रूरत है.दिल्ली सरकार की ओर से जारी एक बयान में केजरीवाल ने ये भी कहा है कि डीएमआरसी की आमदनी और ख़र्च को लोगों के बीच रखा जाना चाहिए.
उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी किराए में बढ़ोतरी का विरोध करते हुए कहा कि मेट्रो का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं है, बल्कि एक सुरक्षित और विश्वसनीय परिवहन प्रणाली मुहैया करना है. शहरी मामलों के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया ज़ाहिर करते हुए सिसोदिया ने कहा कि डीटीसी घाटे में हो सकती है, लेकिन कम से कम ये लोगों की सेवा तो कर रही.
पुरी ने कहा है कि केंद्र मेट्रो को एक और दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) नहीं बनने देगा. सिसोदिया ने कहा कि आरटीआई आंकड़ों के मुताबिक अगर मेट्रो के यात्रियों में कमी आ रही है तो निजी वाहनों के इस्तेमाल का इसका पूरा उद्देश्य ख़त्म हो गया.
उन्होंने और केजरीवाल ने सुझाव दिया कि 10 अक्तूबर से किराया बढ़ोतरी के प्रभावी होने के प्रस्ताव को और तीन-चार महीने के लिए रोक कर रखा जाए, जब तक कि केंद्र और दिल्ली सरकारें प्रस्ताव की जांच नहीं कर लेती.
अगर बढ़ोतरी प्रभावी होती है तो किराए में अधिकतम 10 रुपए तक की बढ़ोतरी होगी. इस बीच, दिल्ली बीजेपी प्रमुख मनोज तिवारी और विधानसभा में विपक्षी नेता विजेंद्र गुप्ता ने एक बयान में मेट्रो किराया मुद्दे पर केजरीवाल सरकार पर अपनी ज़िम्मेदारियों से बचने का आरोप लगाया. उन्होंने ये भी कहा कि वो गंदी राजनीति के ज़रिए लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं.
बीजेपी नेताओं ने कहा कि दिल्ली सरकार की डीएमआरसी में 50 फीसदी की हिस्सेदारी है और इसकी सहमति के बिना किराया में वृद्धि नहीं की जा सकती. हालांकि, केजरीवाल सरकार ने अपने बयान में ये रुख अपनाया है कि इसने पिछले साल सितंबर में किराया निर्धारण कमेटी की बैठक में किराए में किसी तरह की वृद्धि का विरोध किया था.
वहीं, दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने एक बयान में कहा कि दिल्ली के मुख्य सचिव और परिवहन आयुक्त आठ मई की डीएमआरसी बोर्ड की बैठक में उपस्थित नहीं थे जब किराया बढ़ाने का फैसला किया गया था.
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