Sunday, 29 October 2017

अहमदाबाद के स्टूडेंट ने बनाया बुलेट ट्रेन का LOGO, 30 बार हुए थे नाकाम


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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी) अहमदाबाद के स्टूडेंट चक्रधर आला के क्रिएशन को बुलेट ट्रेन के लोगो (LOGO) के रूप में चुना गया है. 30 बार नाकाम होने के बाद 31वीं बार में उन्हें ये कामयाबी मिली. मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन पीएम मोदी के महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक है.एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, 27 साल के चक्रधर आला ने बुलेट ट्रेन के लोगो डिजाइनिंग के लिए MyGov.in पोर्टल पर अपने क्रिएशन भेजे थे. उनके कुछ डिजाइन पहले ही दौर में रिजेक्ट हो गए. लेकिन, चक्रधर ने हार नहीं मानी. हर बार नया डिजाइन बनाकर कॉम्पिटिशन में हिस्सा लिया.


31वीं कोशिश में चक्रधर का डिजाइन फाइनल कर लिया गया. उन्होंने हाई स्पीड के लोकोमोटिव इंजन पर चीता की रूपरेखा में (NHSRCL) नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन का लोगो तैयार किया है. इसे जल्द ही आधिकारिक रूप से इस्तेमाल किया जाएगा. चक्रधर को सरकार लोगो के लिए एक लाख रुपये का इनाम भी देगी.


ऐसे फाइनल हुआ लोगोइस कॉम्पिटिशन का आयोजन मशहूर सतीश गुजराल की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय स्क्रीनिंग कमिटी ने किया था. बाकी दो पैनलिस्ट नीति आयोग के सदस्य थे और अभी राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के अधिकारी थे. चीता को इसलिए चुना गया, क्योंकि यह गति को रिप्रेजेंट करता है. लोगो में नीली और लाल रेखाएं हैं, जो ‘शांत और विश्वसनीयता का प्रतीक है’.


‘लोगो मैन’ के नाम से जाने जाते हैं चक्रधर आला
एनआईडी अहमदाबाद में सेकेंड ईयर के स्टूडेंट चक्रधर आला को लोगो बनाने का जुनून है. उनके दोस्त उन्हें ‘लोगो मैन’ से बुलाते हैं. चक्रधर मूल रूप से हैदराबाद के हैं. उनके पिताजी सरकारी अफसर और मां एक स्कूल की प्रिंसिपल हैं.


लोगो के बारे में बताई ये बातें
चक्रधर कहते हैं, “मुझे उस दिन का बेसब्री से इंतजार है, जब बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से जुड़े सभी दस्तावेजों, लेटर हेड और फाइल पर मेरा लोगो होगा.” उन्होंने बताया, ”अगर कोई इस लोगो को करीब से देखे, तो उसे ट्रेन और चीते जैसी आकृति दिखेगी. इसमें बनाए गए प्वाइंट्स स्टेशन और इसके रूट को दिखाते हैं.”


कब से चलेगी बुलेट ट्रेन?
अहमदाबाद और मुंबई के बीच चलने वाली भारत की पहली बुलेट ट्रेन, 15 अगस्त, 2022 से शुरू हो रही है. तीन घंटों से कम समय में दोनों शहरों को कवर करने वाली इस परियोजना की नींव जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी.


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