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लोकसभा ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2017 यानी ट्रिपल तलाक बिल पर अपनी मुहर लगा दी. यह बिल आज राज्यसभा में पेश होने वाला है. ट्रिपल तलाक बिल के पक्ष और विपक्ष में कई तर्क दिए जा रहे हैं. भारत के पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बिश्वजीत भट्टाचार्या ने अपने ब्लॉग में ट्रिपल तलाक बिल पर अपना नजरिया रखा है. बिश्वजीत भट्टाचार्या का मानना है कि ट्रिपल तलाक को लेकर लोकसभा ने जो कानून बनाए गए हैं, वो किसी बुराई से कम नहीं हैं. पढ़ें उनका पूरा ब्लॉग…1996 में सरला मुदगल केस से पहली बार यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बहस छिड़ी. 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर अपना रुख साफ करे.
संविधान के आर्टिकल 44 के मुताबिक, “राज्य का यह दायित्व है कि राज्य एक समान नागरिक संहिता का निर्माण करे. यानी विवाह, तलाक उत्तराधिकार से संबंधित कानून का निर्माण किया जाए, जिससे सभी लोगों को समान स्थिति मिल सके.” शहबानो मामले (1986), सरला महशूरी मामले (1995) और सायरा बानो मामले (2015) में न्यायपालिका ने राज्य को निर्देश दिया कि राज्य समान नागरिक संहिता को लेकर एक दिशा निर्देश भी दे.
दुर्भाग्य से आर्टिकल 44 ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. यह मुद्दा तब उठाया जाता है जब वोट बैंक की राजनीति होती है. जब भी यूनिफॉर्म सिविल कोड की बात आती है, सभी सरकार संवेदनहीन हो जाती है. हमारे समाज में कई तरह की बुराइयां हैं. ट्रिपल तलाक बिल भी एक तरह की बुराई है. इस बुराई को एक अच्छे यूनिफॉर्म सिविल कोड से खत्म किया जा सकता था, लेकिन ऐसा किया नहीं गया.
अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को अवैधानिक घोषित किया. तीन तलाक पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस्लामिक देशों में तीन तलाक खत्म किए जाने का हवाला दिया, कोर्ट ने पूछा कि स्वतंत्र भारत इससे निजात क्यों नहीं पा सकता है? सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उन मुस्लिम महिलाओं को राहत मिली, जो सालों से ट्रिपल तलाक के खिलाफ लड़ रही थीं.
इसके बाद चार महीने के अंदर संसद में ट्रिपल तलाक को लेकर कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई. सरकार ने ट्रिपल तलाक को अपराध की श्रेणी में रखा. हाल ही में लोकसभा ने इस बिल को पास किया है.
मसौदे के मुताबिक, एक बार में तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत किसी भी तौर पर गैरकानूनी ही होगा. जिसमें बोलकर या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (यानी वॉट्सऐप, ईमेल, एसएमएस) के जरिए भी एक बार में तीन तलाक देना शामिल है. इसमें जेल और जुर्माने का प्रावधान है. ऐसे में बीवी की वजह से जेल काटने के बाद कौन ऐसा शौहर होगा, जो बीवी के साथ रहना चाहेगा? वहीं, जेल में रहने वाला शौहर कैसे यह सुनिश्चित कर पाएगा कि उसके बच्चों और बीवी को गुजारा भत्ता मिल पा रहा है या नहीं?
इस बिल में क्रिमिनल पार्ट शामिल कर इसके असली उद्देश्यों को दरकिनार कर दिया गया है. इस बिल से मुस्लिम महिलाओं की शादी टूटेने से बचेगी नहीं, बल्कि उनका परिवार और बिखर जाएगा. इस बिल में अभी संशोधन की जरूरत है. जल्दबाजी में एक बिल के जरिए मुस्लिम पुरुषों और मुस्लिम महिलाओं को मत बांटे.
(बिश्वजीत भट्टाचार्य भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं.)
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Article source: https://hindi.news18.com/news/nation/raj-thackeray-appeals-people-to-contact-him-if-trolled-1121094.html
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