Wednesday, 28 March 2018

‘आज महंगाई के दौर में किसकी हैं चार बीवियां’- प्रो. अब्दुल


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सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने और कोर्ट द्वारा उस पर एक्शन लेने के बाद से देश में एक बार फिर से बहुविवाह पर चर्चा शुरु हो गई है. ये याचिका खासतौर से मुस्लिम समाज में चार-चार बीवियां रखने की इजाजत पर दाखिल की गई है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी इस याचिका के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है.क्योंकि तीन तलाक, बहु विवाद, हलाला जैसी प्रथाएं बोर्ड से ही जुड़ी हुई हैं. लेकिन क्या वास्तव में आज किसी भी समुदाय में कोई चार-चार बीवियां रखता है. क्या कोई ऐसा भी है जो चार-चार शादियां करता है. इसी बारे में जानने के लिए न्यूज 18 की टीम ने बात की समाजशास्त्री, बोर्ड के सदस्य और एक आम नगारिक से.


चार बीवियां रखने के बारे में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र के प्रोफेसर अब्दुल मतीन का कहना है कि ‘महंगाई के जमाने में आज एक बीवी रखना मुश्किल हो रहा है तो चार बीवी के बारे में तो सोचा भी नहीं जा सकता है. कोई मुझे बता दे कि आज किसकी हैं चार बीवियां. दूसरी बात ये है कि चार बीवी वाले मामले को समाज ने कभी भी इज्जत की नजर से नहीं देखा है. अब कानून तोड़ने वाले दो-चार तो हमेशा से रहे हैं.


दूसरी बात ये कि यह कभी भी किसी एक धर्म का मामला बनकर नहीं रहा है. चार बीवी रखने वाले इक्का-दुक्का इंसान तो हर किसी मजहब में मिल जाते हैं. लेकिन ऐसे इंसानों की वजह से किसी एक बुराई को किसी धर्म के ऊपर नहीं थोपा जा सकता है. अब ऐसे तो लिव इन रिलेशन को आप क्या कहेंगे. एक लड़का या लड़की लिव इन रिलेशन में पता नहीं कितने लोगों के साथ रह लेते हैं.’वहीं चार बीवियों के बारे में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कमाल फारुखी का कहना है कि ‘हलाला तो हराम है फिर इस पर चर्चा कैसी. रहा सवाल बहुविवाह का तो तीन और चार बीवी रखने की बात उस वक्त के हालातों के हिसाब से होती थी. वो परिस्थतियां भी दूसरी हुआ करती थीं. लेकिन मौजूदा वक्त में तो वो भी नहीं हो रहा है. मैं अपनी ही जानकारी से बता देता हूं कि पर्सलन लॉ बोर्ड, मेरे आस-पड़ोस, मेरी रिश्तेदारी और दूर-दूर तक मेरे जानने वालों में किसी ने चार शादियां नहीं की हैं. सच तो ये है कि यह सब 2019 के चुनावों के लिए एक प्रोपेगेंडा है.’


मुजफ्फरनगर निवासी और कपड़े का होलसेल में कारोबार करने वाले अमजद का कहना है कि ‘मेरी एक बीवी है और तीन बच्चे हैं. इस एक परिवार को पालने के लिए ही मैं दिन-रात मेहनत करता हूं कि मेरे बच्चों को अच्छे से अच्छा पहनने और खाने के लिए मिले. उन्हें अच्छी तालीम दिला सकूं. ऐसे में चार बीवी तो दूर की बात मैं दूसरी रखने के बारे में नहीं सोच सकता हूं.’

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