Saturday, 3 March 2018

Northeast Election Results: मोदी-अमित शाह की जोड़ी ने इस तरह किया पूर्वोत्तर में कमाल


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पूर्वोत्तर को लेकर कहा जा रहा था कि वहां बीजेपी सरकार नहीं बना सकती. खासतौर पर त्रिपुरा में, जहां लगातार 25 साल से वामपंथी सरकार थी. इसके बावजूद अमित शाह और मोदी की सियासी जोड़ी ने त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय के चुनाव प्रचार की कमान अपने हाथ में ली और जनता का विश्वास जीत लिया.वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु मिश्र के मुताबिक ” जीत का सेहरा अमित शाह और मोदी दोनों के सिर बंधता है. अमित शाह ने चुनावी गोटियां फिट कीं. आईपीएफटी (इंडिजीनस पिपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा)  से गठबंधन करके ट्राइबल वोटों को अपने पाले में किया, जबकि यही वोट वामपंथी पार्टी की जीत का आधार हुआ करता था.”


मिश्र के मुताबिक “बीजेपी संगठन ने नगालैंड, मेघालय और त्रिपुरा में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को भेजकर न सिर्फ हिंदुत्व का कार्ड खेला बल्कि बड़ी संख्या में नाथ संप्रदाय से जुड़े लोगों को बीजेपी के पक्ष में गोलबंद किया. तीसरा टर्निंग प्वाइंट था नरेंद्र मोदी का विकास कार्ड. इस समय मोदी सबसे बड़े सियासी ब्रांड हैं इसलिए उनके जरिए वहां के युवाओं को बीजेपी ने अपनी ओर करने की कोशिश की.”


नार्थ ईस्ट में बीजेपी के इस शानदार प्रदर्शन के कर्णधार माने जा रहे हिमंत बिस्व सरमा ने इस प्रदर्शन का सेहरा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह पर बांधा है. उन्होंने कहा, अमित शाह के फैसलों ने उनकी काफी मदद की. पार्टी के कई लोग यहां गठबंधन करना नहीं चाहते थे, उनका कहना था कि आईपीएफटी के साथ गठबंधन करना हमारे लिए आत्मघाती हो सकता है, लेकिन अमित शाह ने इसका समर्थन किया. उन्हें यकीन था कि इससे हमें अच्छे नतीजे मिलेंगे.”tripura, meghalaya, nagaland, election result 2018, live updates results assembly election results vidhan sabha chunav parinam, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड इलेक्शन रिजल्ट लाइव अपडेट, माणिक सरकार, अमित शाह, नरेंद्र मोदी, कांग्रेस, बीजेपी, लेफ्ट, Manik Sarkar, Amit Shah, Narendra Modi, Congress, BJP, Left, ahmed patel, kamal nath, mukul wasnik,manipur, goa, Left Front ruled Tripura,Chief Minister Manik Sarkar, त्रिपुरा में बीजेपी ने 25 पुरानी वामपंथी सरकार को उखाड़ फेंका


बीजेपी ने रणनीतिक तौर पर यह देखा कि दूसरी पार्टी के जो नेता उसमें शामिल हो रहे हैं वह कहीं न कहीं फायदा ही दिलाएंगे. इसलिए उसने दूसरी पार्टियों के नेताओं को भगवा रंग में रंगने से परहेज नहीं किया. दो साल पहले से बूथ स्तर पर संगठन खड़ा कर कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों में लगा दिया था.


प्रधानमंत्री ने नॉर्थ-ईस्ट में की गई अपनी चुनावी रैलियों में विकास पर फोकस करने के साथ भावनात्मक रूप से वहां के युवाओं को जोड़ने की कोशिश की. उन्होंने त्रिपुरा की अपनी एक रैली में कहा ‘त्रिपुरा के लोग अपने हक के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. लोग नई ऊंचाइयों को छूना चाहते हैं. यहां के लोगों को रोजगार के बेहतर अवसरों की जरूरत है. त्रिपुरा ने गलत माणिक पहन लिया है. जब तक आप ये गलत माणिक नहीं उतारोगे. तब तक त्रिपुरा का भाग्य नहीं बदलेगा. और जब त्रिपुरा का भाग्य बदलेगा, तभी देश का भाग्य बदलेगा.’


उनके हीरा (HIRA) का मतलब था H-Highways, I-ways, R-Roadways और A- Airways. इस तरह उन्होंने बताया कि बीजेपी नॉर्थ-ईस्ट के लिए अच्छा विकल्प है और लोगों ने उन्हें मौका दे दिया.


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बीजेपी बीजेपी की रणनीति लेफ्ट और पूर्वोत्तर की स्थानीय पार्टियों पर भारी पड़ी (file photo)

सरकार ने अपने मुख पत्र ‘कमल संदेश’ के जनवरी अंक में छापे गए एक विज्ञापन में यह दावा किया था कि 2014-15 के मुकाबले 2016-17 में पूर्वोत्तर के लिए दोगुनी परियोजनाएं दी गईं हैं. ब्रह्मपुत्र नदी के एको सिस्टम पर रिसर्च के लिए ब्रह्मपुत्र अध्ययन केंद्र की स्थापना की जा रही है. रेलवे, वायु परिवहन, खेती संबंधित कई योजनाएं चलाई जा रही हैं.


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