Tuesday, 27 March 2018

मंदिरों के फूलों को यमुना में बहाने के बजाए आश्रय गृहों में दिया जाए-SC


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उच्चतम न्यायालय ने उत्तरप्रदेश के मथुरा जिले में वृंदावन के मंदिरों से कहा है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए फूलों को विधवाओं और निराश्रित महिलाओं के लिए चलाए जा रहे आश्रय गृह को दे दिया जाए ताकि वहां रह रही महिलाएं उनसे इत्र, रंग- बिरंगे पाउडर या अगरबत्तियां आदि बना सकें जिससे उनकी आजीविका का स्रोत बना रहे.उच्चतम न्यायालय ने कहा कि केंद्र यह योजना वाराणसी, तिरूपति और पुरी सहित देश के सभी बड़े मंदिरों में लागू करने पर विचार कर सकता है. न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की पीठ ने कहा कि वृंदावन के मंदिर श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए फूलों को यमुना में प्रवाहित कर देता है जिससे प्रदूषण फैलता है. पीठ ने कहा, ‘‘ अगर इन फूलों को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विधवाओं और निराश्रित महिलाओं के लिए संचालित आश्रम को दे दिया जाए तो इससे उनकी आजीविका चलेगी.’’


महिला और बाल विकास विभाग इस योजना को सभी बड़े मंदिरों में लागू कर सकता है ताकि विधवाओं और निराश्रितों का कल्याण हो. इसने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए कि आश्रय गृहों का ब्यौरा दें और इन संस्थानों में रह रहीं विधवाओं और निराश्रितों की संख्या बताएं.


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Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/politics/sacked-aap-minister-asim-ahmed-khan-addresses-a-press-conference-416124.html

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