Wednesday, 26 September 2018

आधार संवैधानिक खामियों का शिकार, इससे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: जस्टिस चंद्रचूड़


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सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की बेंच ने बुधवार को आधार को संवैधानिक रुप से वैध करार दिया. पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि आधार देश के हर नागरिक को एक अलग पहचान देता है. वहीं संविधान पीठ में शामिल जस्टिस डी. वाई. चन्द्रचूड़ ने बहुमत से इतर अपने फैसले में कहा कि आधार योजना संवैधानिक खामियों से ग्रस्त है, क्योंकि यह निजता के अधिकार सहित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है.उन्होंने ने कहा कि निजी कंपनियां बिना बिना सहमति के उसकी व्यक्तिगत सूचना कारोबारी मकसद से इस्तेमाल करती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि आधार नहीं होने तक सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ नहीं देना नागरिकों के मूल अधिकारों का उल्लंघन है. आधार योजना अपने अंदर की खामियों को दूर करने में असफल रही है. न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने अपने फैसले में सरकार को निर्देश दिया कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत संग्रहित डाटा को एक साल तक नष्ट नहीं करना चाहिए या किसी अन्य उद्देश्य से इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इस दौरान सरकार को व्यक्ति का डाटा सुरक्षित रहे एक नया कानून बनाना चाहिए.


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न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने लिखित अपने 481 पन्नों के फैसले में कहा कि एक साल बाद अगर सरकार नया कानून नहीं बनाती है तो डाटा नष्ट कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि आधार विधेयक को लोकसभा में धन विधेयक के रूप में पारित नहीं होना चाहिए था क्योंकि यह संविधान के साथ धोखा के समान है और निरस्त किए जाने के लायक है.पीठ में शामिल न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ ने अपना फैसला अलग लिखा है जिसमें उन्होंने बहुमत से अलग अपने विचार व्यक्त किए. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी के बहुमत वाले फैसले को न्यायमूर्ति सीकरी ने पढ़ा. जस्टिस चन्द्रचूड़ ने अपने फैसले में कहा कि आधार कानून को पारित कराने के लिए राज्यसभा को दरकिनार करना एक प्रकार का धोखा है और इस कानून को संविधान के अनुच्छेद 110 का उल्लंघन करने के लिए निरस्त कर दिया जाना चाहिए.


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उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 110 में धन विधेयक के लिए विशेष आधार हैं. लेकिन आधार कानून उससे आगे चला गया. इस कानून को मौजूदा स्वरूप में संवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने कहा कि महज कानून बना देने से केन्द्र की आधार योजना नहीं बच सकती है.


मोबाइल फोन के जीवन का महत्वपूर्ण अंग बन जाने और उसे आधार से जोड़ने को निजता, स्वतंत्रता, स्वायत्तता के लिए गंभीर खतरा बताते हुए न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ ने मोबाइल सेवा प्रदाताओं से कहा कि वे ग्राहकों का आधार डाटा नष्ट कर दें. उन्होंने कहा कि यूआईडीएआई ने स्वीकार किया है कि वह महत्वपूर्ण सूचनाओं को एकत्र और जमा करता है और यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है. इन आंकड़ों का व्यक्ति की सहमति के बगैर कोई तीसरा पक्ष या निजी कंपनियां दुरूपयोग कर सकती हैं.


Article source: http://hindi.news18.com/news/lifestyle/fitness-mantra-of-bollywood-actress-1031253.html

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