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फिरोज गांधी का उत्तर प्रदेश सरकार के एक मुस्लिम मंत्री की बेटी से जबरदस्त रोमांस चल रहा था. दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया. फिरोज ने मौजूदा पत्नी इंदिरा गांधी से दो टूक कहा कि उन्हें तलाक चाहिए. रिश्ते इतने तल्ख हो चले थे कि इंदिरा ने कहा, ले लो तलाक मुझे कोई दिक्कत नहीं. लेकिन फिर फिरोज ने जो कुछ कहा, उस पर इंदिरा आगबबूला हो गईं. उन्होंने उस प्रस्ताव पर सोचने तक से इनकार कर दिया.बताते हैं कि जिस लड़की से फिरोज का इश्क चल रहा था, वो दिल्ली के आल इंडिया रेडियो में काम करती थी. उत्तर प्रदेश के मशहूर मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती थी. फिरोज ने जब इंदिरा से तलाक की बात की तो इंदिरा को कोई आपत्ति नहीं थी लेकिन जब उन्होंने इंदिरा से कहा कि वह बड़े बेटे की कस्टडी भी चाहते हैं. जिसे इंदिरा ने सिरे से खारिज कर दिया. हालात ऐसे बने कि दोनों अलग रहते रहे लेकिन तलाक नहीं हो सका.
प्ले बॉय फिरोज
एम ओ मथाई की किताब “रेमनिसन्सिज़ ऑफ द नेहरू एज” में इस घटना का जिक्र किया गया है. इस किताब में उस लड़की का नाम बेशक नहीं है, लेकिन बाद में पता लगा कि ये लड़की महमूना सुल्तान थीं. किताब कहती है कि जब इस रोमांटिक रिश्ते की खबर लखनऊ में मुस्लिम मंत्री के पास पहुंची. तो वह परेशान हो गए. आखिरकार वह दिल्ली पहुंचे. बेटी को दिल्ली से ले गए. फिरोज 50 के दशक में भारतीय राजनीति के प्ले बॉय थे. कैथरीन फ्रेंक की किताब “इंदिराः द लाइफ ऑफ इंदिरा नेहरू गांधी” कहती है कि फिरोज बिंदास जिंदगी जीने में यकीन रखते थे, जिसमें खाने-पीने और सेक्स की कोई सीमा नहीं थी. किताब के अनुसार, “इंदिरा से शादी के बाद भी फिरोज दूसरी महिलाओं से फ्लर्ट करते थे. महमूना सुल्तान के अलावा उनके रोमांटिक रिश्ते संसद की ग्लैमर गर्ल कही जाने वाली तारकेश्वरी सिन्हा, सांसद सुभद्रा जोशी से रहे. उनकी एक और गर्लफ्रेंड थी, जो खूबसूरत नेपाली महिला थी, तलाकशुदा थी. आलइंडिया रेडियो में काम करती थी. उसके ससुराल पक्ष के लोग केरल के बड़े अभिजात्य परिवार से थे.”इंदिरा को पहला प्रोपोज 16 की उम्र में
फ्रेंक ने इंदिरा और फिरोज के रिश्तों में आई दिक्कतों पर विस्तार से लिखा है. फिरोज ने इंदिरा को उनके 16वें जन्मदिन के एक महीना पहले प्रोपोज किया था, तब इंदिरा ने उन्हें झिड़क दिया था. कमला दोनों के बीच रिश्ते के सख्त खिलाफ थीं. हालांकि फ्रेंक की किताब तो ये भी कहती है कि इलाहाबाद में कमला और फिरोज के रिश्तों को लेकर किस्से चर्चित थे. कमला ने फिरोज से इंदिरा की शादी का विरोध करते हुए कहा था, “इंदिरा अगर ये शादी करती हैं तो ये उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती होगी.”
कमला ने शादी का विरोध किया था
हालांकि वीकिपीडिया और फिरोज गांधी की बॉयोग्राफीज में उनके बारे में लिखा है कि वह मुंबई के एक पारसी फेरदून जहांगीर घेंदी के बेटे थे, जो मैरीन इंजीनियर थे लेकिन एम ओ मथाई की किताब सिरे से उनकी इस पहचान को खारिज करती है. मथाई ने लिखा, “फिरोज के पिता इलाहाबाद में एक शराब और प्रोविजनल स्टोर चलाते थे. उनके परिवार की हैसियत नेहरू परिवार के सामने कहीं कुछ नहीं थी.” किताब के अनुसार, “फिरोज को उनके युवाकाल में कमला नेहरू की सहायता के लिए वालिंटियर के रूप में लिया गया था ताकि वह कांग्रेस के काम के लिए इलाहाबाद से जहां भी बाहर जाएं, फिरोज उनकी मदद करें.” मथाई तो ये भी कहते हैं कि फिरोज ज्यादा पढ़े लिखे भी नहीं थे. जब इंदिरा ब्रिटेन में थीं तो वह उनकी करीबी पाने के लिए लंदन पहुंच गए, जहां उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में दाखिला ले लिया, लेकिन उनकी ये पढ़ाई वहां पढ़ने वाले भारतीयों के बीच किसी मजाक से कम नहीं थी, जो पूरी भी नहीं हो सकी.

इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी.
कमला की नजर में फिरोज
“रेमनिसन्सिज़ ऑफ द नेहरू एज” के अनुसार, कमला इलाज के लिए जर्मनी के बेडनवीलर में थीं. कमरे में कमला के अलावा नेहरू और एसीएन नांबियार मौजूद थे. इसके दो महीने बाद ही कमला का निधन हो गया. कमला ने कहा, “वह इंदिरा के भविष्य के लिए परेशान हैं.” उन्होंने फिरोज से इंदिरा की शादी की संभावना का जबरदस्त विरोध किया. किताब के अनुसार, कमला फिरोज को अस्थिर शख्स मानती थीं, साथ ही फिरोज की पढ़ाई लिखाई ऐसी भी नहीं कि वह कोई अच्छा प्रोफेशन करके इंदिरा की जिम्मेदारी उठा सके. वह भावुक हो गईं, “मैं नहीं चाहती कि मेरी बच्ची अपनी पूरी जिंदगी दुखी रहे.” तभी नेहरू ने मुलायमियत से कहा, “इस मामले को तुम मुझ पर छोड़ दो.” इसके बाद जब कमरे से बाहर निकले तो कमला ने नांबियार से कहा, “आपने सुना उन्होंने क्या कहा, इंदु मेरे अलावा और किसी की नहीं सुनेगी. अभी तक तो मैं उसे फिरोज से दूर रख सकी लेकिन मेरा अंत करीब है. जवाहर कभी उसे कोई गाइडेंस नहीं दे पाएंगे. आखिरकार वह उसे जिंदगी में गलती करने के लिए अनुमति दे ही देंगे.”
नेहरू ने किया विरोध
कमला के निधन के बाद इंदिरा अकेली पड़ गईं थीं. मानसिक तौर पर उन्हें सहारे की जरूरत थी. पिता जवाहर व्यस्त रहते थे और अक्सर बाहर. बर्टिल फॉक की किताब “फिरोज गांधीः द फारगाटेन गांधी” के अनुसार, 1936 में कमला के निधन के बाद जिस तरह फिरोज ने इंदिरा को संबल दिया, उससे दोनों की नजदीकियां बढ़ीं. कहा जाता है कि उसी दौरान दोनों ने गुप्त विवाह कर लिया. नेहरू और उनका परिवार इस शादी के सख्त खिलाफ था. मथाई की किताब कहती है कि पद्मजा नायडु ने नेहरू से कहा, उनकी बेटी बड़ी हो चुकी है, अगर दोनों ने शादी करनी चाही तो वह उसे रोक नहीं पाएंगे, लिहाजा उन्हें इसकी अनुमति दे देनी चाहिए. नेहरू ने अनिच्छा से अनुमति दे दी.
विजय लक्ष्मी पंडित की बेटी के प्यार में
इंदिरा से शादी के बाद नेहरू ने फिरोज को नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमीआवाज को प्रकाशित करने वाली कंपनी एसोसिटेड जर्नल्स लिमिटेड का मैनेजिंग डायरेक्टर बना दिया. 1951-52 के लोकसभा चुनावों में फिरोज प्रतापगढ़ से चुने गए. इसके बाद वह 1961 में अपने निधन तक सांसद बने रहे, हालांकि उन्होंने 1956 का अगला चुनाव रायबरेली से लड़ा था. मथाई के अनुसार, 1947 में फिरोज विजय लक्ष्मी पंडित की एक बेटी के प्यार में पड़ गए. वह नेशनल हेराल्ड लखनऊ में पत्रकार थी. जब श्रीमती पंडित ने ये बात सुनी तो वह मास्को से अपने खर्चे पर विमान से आईं और लड़की को मास्को ले गईं.

फिरोज गांधी पर लिखी गई किताब ‘फिरोज- द फॉरगॉटन गांधी’ का कवर
शादी के कुछ समय बाद दरार
इंदिरा और फिरोज के रिश्तों में दरार शादी के कुछ समय बाद ही पड़नी शुरू हो गई थी. कुछ सालों बाद ही इंदिरा बच्चों को लेकर पिता के पास आ गईं. हालांकि दोनों के बीच कई बार सुलह समझौते हुए. फिरोज कुछ समय तक प्रधानमंत्री हाउस में इंदिरा के साथ रहे लेकिन फिर वह पूरी तरह अलग हो गए. मथाई ने खुद इंदिरा के साथ अपने रिश्तों की बात लिखी है. लगता है कि इंदिरा और फिरोज दोनों ही अपनी अलग तरह की जिंदगियां जी रहे थे. कैथरीन फ्रेंक और मथाई दोनों लिखते हैं कि फिरोज अक्सर संसद में सांसदों के बीच मथाई को नेहरू का दामाद होने का आरोप लगाते थे. मथाई लिखते हैं, 1948 में स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर ने मुझसे कहा, उनकी मौजूदगी में ही फिरोज गांधी ने सेंट्रल हाल में सांसदों के एक ग्रुप से कहा, वह नहीं बल्कि मथाई प्रधानमंत्री के दामाद हैं. फिरोज लगातार अपनी ही सरकार के विरोध में लाठियां भांजते रहते थे.
इंदिरा तब गर्भवती थीं
इंदिरा गांधी की जीवनी लेखिका पुपुल जयकर के अनुसार, इंदिरा जब फिरोज के प्रेम में पड़ीं तो वह राजनीति की चकाचौंध से दूर होकर शादी करना और सादगीभरी जिंदगी बिताना चाहती थीं, जिसमें वह और उनका परिवार हो लेकिन शादी के बाद जब दूरियां बढने लगीं तो इंदिरा ने राजनीति में शिरकत करनी शुरू कर दी. इसने फिरोज के साथ उनके मतभेदों को और बढ़ा दिया. वह लिखती हैं कि जब इंदिरा गांधी दूसरी बारी गर्भवती हुईं तो उन्हें पता लगा कि फिरोज का अफसाना किसी से चल रहा है.
फिरोज का निधन
1958 में जब फिरोज को हार्ट अटैक हुआ तो इंदिरा वापस उनकी सेवा करने के लिए लौटीं लेकिन जल्दी ही फिर खटास शुरू हो गई. जब ये चर्चे चल रहे थे कि दोनों का तलाक होने वाला है और फिरोज दूसरी शादी करेंगे तभी 1961 में उनकी मृत्यु हो गई.
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