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गुजरात विधानसभा की 182 सीटों में से भावनगर वेस्ट एक सबसे अहम सीट है. यहां से भाजपा और कांग्रेस के दो दिग्गज मैदान में हैं. सत्ताधारी भाजपा ने अपने प्रदेश अध्यक्ष जीतू वघानी को उम्मीदवार बनाया है तो कांग्रेस ने अपने कद्दावर नेता शक्ति सिंह गोहिल को मैदान में उतारा है.यह वघानी का गृह क्षेत्र है और पिछली बार उन्होंने आसानी से जीत हासिल की थी. लेकिन इस बार गोहिल के साथ युवा पाटीदार नेता हार्दिक पटेल उनके लिए गंभीर चुनौती बन गए हैं.
वघानी खुद पाटीदार समुदाय से आते हैं. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के ‘मिशन 150’ में उनकी जीत की बेहद अहम भूमिका है. गोहिल के मैदान में कूदने के कारण वघानी के लिए यह सीट नाक का सवाल बन गया है. यहां कांग्रेस पार्टी विशेष तौर पर जोर लगा रही है. हार्दिक पटेल के भी यहां ठीक-ठाक समर्थक हैं. इस कारण भाजपा की चिंता बढ़ गई है.
यहां से चुनावी मैदान में उतरा कोई भी खिलाड़ी कोई मौका गवांना नहीं चाहता. संभवतः इसी कारण हार्दिक पटेल ने भावनगर शहर में उसी दिन रोड शो किया जिस दिन गोहिल और वघानी ने ‘स्नेह मिलन’ कार्यक्रम किया था.इस सीट पर अभी तक वघानी को पटेल समुदाय का समर्थन प्राप्त था, लेकिन इस बार इस समुदाय को भाजपा से दूर करने के लिए हार्दिक पटेल एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं. इतना ही नहीं इस बार वघानी को राजपूत समुदाय को भी अपने पाले में लाने में परेशानी से जूझना पड़ रहा है. यहां वघानी के राजपूत समुदाय के एक सरपंच के खिलाफ जाने के कारण इस समुदाय में उनको लेकर नाराजगी है.
दूसरी तरफ कच्छ के अब्दासा से विधायक शक्तिसिंह गोहिल ने भावनगर में वघानी की ‘प्रतिकूल’ स्थिति को भांपकर ही इस सीट से चुनाव लड़ने की रणनीति बनाई.
वघानी के समर्थकों में सेंध लगाने के लिए गोहिल जोर-शोर से पाटीदारों के अधिकार को मुद्दा बना रहे हैं. साथ ही वह क्षत्रिय मतदाताओं को साधने पर भी उतना ही ध्यान लगा रहे हैं. वह पाटीदारों के लिए आरक्षण के मसले पर बोलने में यह ख्याल भी रख रहे हैं कि उनके बयानों से दूसरे समुदाय के हितों को चोट न पहुंचे.
हालांकि, वघानी भाजपा के विकास के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं. वह हार्दिक पटेल को कांग्रेस का एजेंट बता रहे हैं. साथ ही जाति की राजनीति करने को लेकर वह कांग्रेस पार्टी की आलोचना भी कर रहे हैं. वह कांग्रेस पर आरोप लगा रहे हैं कि वह चुनाव जीतने के लिए समुदाय को बांटना चाहती है.
भावनगर वेस्ट पहले भावनगर साउथ सीट के नाम में पहचानी जाती थी. वर्ष 2007 में गोहिल ने सात हजार वोटों के अंतर से वघानी को मात दी थी. 2012 में इस सीट का नाम फिर से भावनगर वेस्ट कर दिया गया. उस वक्त गोहिल ने यहां से चुनाव नहीं लड़ा और वह कांग्रेस से इस सीट को छिनने में कामयाब हुए. गोहिल ने अब्दास सीट से चुनाव लड़ा और वह वहां से जीत गए. एक बार फिर इस सीट से दोनों दिग्गज मैदान में हैं.
भावनगर वेस्ट सीट का नतीजा काफी हद तक जाति आधारित गणना पर निर्भर कर सकता है. इस निर्वाचन क्षेत्र में कुल 2,41,282 वोट हैं, जिनमें से कोली समुदाय के मतदाताओं की संख्या 54 हजार से अधिक हैं. यहां पर 36 हजार पटेल और 23 हजार क्षत्रिय मतदाता हैं. यहां करीब 12 हजार बनिया, 14 हजार अनुसूचित जाति, 22 हजार अल्पसंख्यक और 50 हजार से अधिक ओबीसी मतदाता हैं.
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Article source: http://www.jagran.com/uttar-pradesh/meerut-city-16483546.html
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