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भवदीप कंगजनरल डायर, अलाउद्दीन खिलजी, टीपू सुल्तान और चाणक्य गुजरात में क्या कर रहे हैं? इतिहास के इन नायकों और खलनायकों को एक बार फिर इतिहास के पन्नों से निकालकर जनता के सामने पेश करने की जद्दोजहद इस बार के चुनाव में शुरू हो चुकी है.
इस बार गुजरात चुनाव को अगर देखें तो चुनाव अभियानों में वास्तविक और कल्पना के बीच ऐसे नायकों को पेश करने की कोशिश की जा रही है, जिनका भारतीय इतिहास से गहरा नाता रहा है.
इस समय पूरे भारत में संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती को लेकर जिस तरह से विवाद खड़ा हुआ है उसे भाजपा हाथों हाथ ले रही है. भाजपा ने अपने चुनाव अभियान के दौरान राहुल गांधी की तुलना अलाउद्दीन खिलजी से की है. जिस तरह से सुल्तान ने रानी को हासिल करने के लिए गुजरात का रास्ता चुना था और सोमनाथ में मंदिरों को नष्ट कर दिया था.इसी तरह चुनाव अभियान में भाजपा इतिहास के इन कलाकारों का इस्तेमाल करते हुए मतदाताओं को यह समझाने की कोशिश कर रही है कि किसी भी बाहरी ताकत को गुजरात में पैर जमाने न दें और भाजपा को वोट दें जो भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद के साथ गड़बड़ी करने वालों का बिल्कुल भी समर्थन नहीं करती.
2002 वाली गलती दोहराना नहीं चाहती कांग्रेस
भाजपा वोटरों को बताने में जुटी हुई है कि कांग्रेस सही मंशा के साथ चुनाव नहीं लड़ रही है. उनके अनुसार, खेल का नियम है कि कांग्रेस 2002 के भूत को खोदकर निकाले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ ‘मौत का सौदागर’ जैसे विशेषण फेंकेेे, मस्जिदों-मजारों का दौरा करे और अल्पसंख्यकों की तुष्टीकरण की राजनीति करे.
इसके बजाय राहुल गांधी मंदिर गए, खुद को शिवभक्त बताया, जातियों को साथ लेने पर काम किया और पद्मावती विवाद में भी अपना मुंह बंद रखा.
कांग्रेस ने चुनावी रणनीति बदली
गुजरात में जमीन तलाश रही कांग्रेस ने इस बार अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव किया है. इस बार उनका फोकस (पटेल 12 प्रतिशत, ओबीसी 40 प्रतिशत और मुसलमान 10 प्रतिशत) पर है. विपक्ष के तौर पर हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकुर और जिग्नेश मेवाणी भी इस बार चुनाव को पलटने का माद्दा रखते हैं.
साल 2002 में पटेल और मुस्लिम संघर्ष को देखते हुए इस बार कांग्रेस ने अपनी लिस्ट से मुसलमानों को दूर रखा है. वैसे भी वे कहां जाएंगे? इस बार अशोक गहलोत के पास गुजरात चुनाव की जिम्मेदारी है लेकिन पहली चोट अहमद पटेल ने राज्यसभा चुनाव जीतकर की.
कांग्रेस की मंशा अल्पसंख्यक-राष्ट्र को आगे बढ़ाना
भाजपा मतदाताओं को हर बार यह याद करा रही है कि कांग्रेस एक मुस्लिम पार्टी है. इसी लिए उन्होंने राहुल गांधी की तुलना अलाउद्दीन खिलजी से की है जिससे उनकी याददाश्त में इस बात को बैठा दिया जाए कि कांग्रेस हमेशा से मुसलमानों के पक्ष में रही है. भाजपा के प्रवक्ता जीवीएल नरिसंह राव ने कहा कि कांग्रेस शासित कर्नाटक में टीपू सुल्तान जंयती का जश्न इस बात का संकेत है कि कांग्रेस की मंशा अल्पसंख्यक-राष्ट्र को आगे बढ़ाना है. उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस ने टीपू को सम्मानित किया है जो जाहिर तौर पर हिंदुओं को इस्लाम के तौर पर बदलना चाहता था.
अमित शाह की तुलना जनरल डायर से
राहुल गांधी की तुलना खिलजी के बीच कांग्रेस ने गुजरात में हार्दिक पटेल की अगुवाई में आरक्षण आंदोलन चला रहे राजनीतिक रूप से दबंग पाटीदार समुदाय को रिझाने के प्रयास में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की तुलना जालियांवाला बाग कांड के खलनायक जनरल डायर से की. हालांकि अमित शाह को भाजपा के चाणक्य के रूप में देखा जाता है. उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी कई बार अमित शाह को चाणक्य कहा है लेकिन गुजरात चुनाव में भाजपा को चाणक्य की नहीं दीन दयाल उपाध्याय की जरूरत है.
Article source: https://hindi.news18.com/videos/nation-bhaiyaji-kahin-63-1170554.html
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