Monday, 27 November 2017

एक तांत्रिक ने पद्मावती के रूप की तारीफ कर खिलजी को उकसाया था


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फिल्म पद्मावती के विरोध में हाल ही में जयपुर के नाहरगढ़ किला में चेतन सैनी नाम के युवक का शव लटका मिला. पास के पत्थर पर दो बातें लिखी थीं- ‘पद्मावती का विरोध, हम पुतले नहीं जलाते, लटकाते हैं.’ दूसरी बात लिखी थी ‘चेतन तांत्रिक मारा गया.’ दरअसल चेतन तांत्रिक ही वो शख्स था, जिसने अलाउद्दीन खिलजी को चित्तौड़ पर हमले के लिए उकसाया, जिसमें पद्मावती के रूप की तारीफ भी थी.इसी शख्स ने शुरू की थी बर्बादी की कहानी
मलिक मोहम्मद जायसी के रूपक काव्य ‘पद्मावत’ की माने तो चित्तौड़गढ़ की बर्बादी की कहानी चेतन तांत्रिक से शुरू होती है. जिसका असल नाम राघव चेतन था.


जवाहर लाल नेहरू की किताब ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ में भी चेतन का जिक्र है. जब इसी किताब के आधार पर जाने माने फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल ने भारत एक खोज नाम से टीवी सीरियल बनाया, तो इसमें सारी घटना को बखूबी पेश किया गया.राघव चेतन महाराजा रतन सिंह का राजपुरोहित बनना चाहता था. वो पंडित होने के साथ- साथ तंत्र मंत्र का साधक भी था. पद्मावत के मुताबिक, राघव चेतन ने ऐसी तंत्र सिद्धी कर ली थी, जिससे वह प्राकृतिक घटनाओं को बदलने की ताकत रखता था.


एक बार तांत्रिक ने पूर्णिमा की रात पहले ही तंत्र विद्या से पूर्णिमा का चांद दिखा दिया. इससे पंडितों के साथ राजा रतनसेन भी खासे नाराज हुए. वह तंत्र विद्या के सख्त विरोधी थे. उन्होंने राघव चेतन को सजा देते हुए काला मुंह करते हुए उसे गधे पर बिठाया और राज्य से बाहर निकाल दिया. राजा रतन सिंह को क्या पता था कि जिस चेतन को वह सजा दे रहे हैं, वही उनकी बर्बादी की वजह बनेगा.


रानी पद्मावती डर गईं थीं
रानी पद्मावती को जब इस सजा के बारे में मालूम हुआ तो वो डर गईं. उन्होंने तांत्रिक को मनाने की कोशिश भी की लेकिन चेतन अपमान से बहुत बुरी तरह चिढ़ा हुआ था. उसे ऐसे शख्स की तलाश थी जो चित्तौड़ के किले को तबाह कर दे. उसकी तलाश ख़त्म हुई दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी पर.


खिलजी का खास बन गया
चित्तौड़ से निकाले जाने के बाद राघव चेतन ने दिल्ली में पनाह ली. जल्दी ही अपनी तंत्र विद्या से उसने खिलजी पर जादू कर दिया. वह दिल्ली के सुल्तान का खास बन गया. उसने विशाल किले, सोने से भरे मंदिरों, उर्वर ज़मीन और  बड़ी संपदा का लालच देते हुए खिलजी को उकसाना शुरू किया. जब उसने खिलजी के सामने रानी पद्मावती के रूप का बखान किया तो उसका तीर निशाने पर लगा.


फिर खिलजी ने किया आक्रमण
इसके बाद जो हुआ वो हर कोई जानता है. वो सारी बातें इतिहास में दर्ज हैं. जब खिलजी ने चित्तौड़गढ़ पर हमला किया तो रानी पद्मावती ने उसकी बुरी नजर से बचने के लिए खुद को अग्नि के हवाले कर लिया. खिलजी रानी को छू भी नहीं पाया. जाहिर है कि न राघव चेतन नाम का ये तांत्रिक दिल्ली के सुल्तान को उकसाता और न ये हमला होता. इतिहास में इस तांत्रिक की जगह खलनायक की तरह है, जिससे आज भी राजस्थान में घृणा की जाती है.


Article source: http://www.jagran.com/bihar/gaya-16371095.html

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