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16 दिसंबर 2012 को हुई दरिंदगी को पांच साल पूरे होने जा रहे हैं. निर्भया कांड के बाद केंद्र सरकार ने देश की महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था के लिए निर्भया फंड का एलान किया था. लेकिन केंद्र सरकार निर्भया फंड का 50 फीसदी भी अभी तक खर्च नहीं कर पाई है. वहीं देश के हर जिले में ‘वन स्टॉप सेंटर’ का सपना भी अधर में लटका है.आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय निर्भया कांड के पांच साल बाद 660 वन स्टॉप सेंटर्स में से सिर्फ 148 ही खोल सका है. जबकि निर्भया कांड के बाद वन स्टॉप सेंटर को मंत्रालय ने पीडि़त महिलाओं के लिए सबसे जरूरी चीज माना था. सबसे खास बात है कि घटनास्थल रहे दिल्ली में ऐसा एक भी वन स्टॉप सेंटर नहीं खोला गया है.
न केवल केंद्र सरकार बल्कि दिल्ली सरकार का रवैया भी निर्भया फंड को लेकर बेहद चौंकाने वाला है. आरटीआई एक्टिविस्ट अजीत सिंह की आरटीआई में खुलासा हुआ है कि निर्भया कांड में आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले और बाद में दिल्ली के मुख्यमंत्री बने अरविंद केजरीवाल की सरकार ने निर्भया फंड का इस्तेमाल नहीं किया है.

निर्भया गैंगरेप के विरोध में उतरी लड़कियां Photo: File Photo.
इसके साथ ही मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2013-14 में पहली बार 1000 करोड़ रुपये की राशि के साथ शुरू हुए निर्भया फंड में वित्त वर्ष 2014-15, 2015-16, 2016-17 और 2017-18 में हर साल 1000 करोड़ रुपये आए. जिसमें से 3100 करोड़ रुपये सार्वजनिक खाते में ट्रांसफर किए गए.
इनमें से सिर्फ 2209 करोड़ रुपये के प्रस्ताव ही मेनका गांधी के मंत्रालय ने तैयार किए हैं. जिनके तहत काम किया जा रहा है. हालांकि ये पूरा पैसा अभी तक खर्च नहीं किया गया है. ऐसे में साफ है कि केंद्र सरकार निर्भया फंड का आधा भी खर्च नहीं कर पाई है और आधे से ज्यादा निर्भया फंड सरकारी खाते में ही पड़ा है.

16 दिसंबर 2012 को दिल्ली की पैरामेडीकल छात्रा के साथ गैंगरेप हुआ था. photo-file photo
केंद्रीय मंत्रालय ने अभी तक तय नहीं की 660 वन स्टॉप सेंटर की डेडलाइन
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की मीडिया डायरेक्टर नानू भसीन का कहना है कि महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी की इच्छा थी कि देश के हर जिले में वन स्टॉप सेंटर बनें इसलिए 660 वन स्टॉप सेंटर की बात की गई. 660 सेंटर का कोई आदेश नहीं था.
मंत्रालय की ओर से 2015 में वन स्टॉप स्कीम शुरू की गई. इसी के तहत काम चल रहा है. नवंबर 2017 तक देशभर में 165 वन स्टाॅप सेंटर बन चुके हैं. इन सेंटर्स में 34 हजार महिला और बच्चियों को सहायता मिल चुकी है. वहीं 150 सेंटर के लिए कैबिनेट से फिर मंजूरी मिल गई है. जिन्हें 2020 तक बनाना है.

निर्भया कांड के बाद केंद्र सरकार ने 2013-14 में निर्भया फंड की शुरूआत की
धीमी गति से चल रहे वन स्टॉप सेंटर के निर्माण कार्य पर भसीन ने बताया कि जैसे-जैसे कैबिनेट से मंजूरी मिलती जा रही है काम होता जा रहा है. 660 सेंटरों की कोई डेडलाइन तय नहीं की गई. कई राज्य ऐसे हैं, जिन्होंने वन स्टॉप सेंटर बनाने के लिए मांगें ही नहीं भेजी हैं.
जिस राज्य में मरी निर्भया, उस राज्य ने ही नहीं इस्तेमाल किया निर्भया फंड
बेहद दुखद है कि महिला सुरक्षा के लिए हल्ला मचाने वाली अरविंद केजरीवाल सरकार ने न केवल निर्भया को भुला दिया, बल्कि दिल्ली की बेटियों की सुरक्षा के लिए केंद्र की ओर से तय किए गए निर्भया फंड का भी इस्तेमाल नहीं किया है.

दिल्ली में हुए निर्भया कांड के विरोध में लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध किया. इंडिया गेट पर कई दिन विरोध प्रदर्शन चला. photo-file photo
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार ने निर्भया की माैत को पांच साल होने तक केंद्रीय मंत्रालय से निर्भया फंड के तहत कोई पैसा नहीं मांगा है. आरटीआई में मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली सरकार ने केंद्र को अभी तक वन स्टॉप सेंटर के लिए फंड की मांगें और सिफारिशें नहीं भेजी हैं. जबकि अन्य राज्यों ने भेज दी हैं.
इस मामले में अरविंद केजरीवाल का कहना है कि दिल्ली सरकार के अंतर्गत 11 वन स्टॉप सेंटर चल रहे हैं. जबकि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक दिल्ली सरकार के वन स्टॉप सेंटर मानकों को पूरा नहीं करते.
केंद्र ने कहा- बेकार हैं अरविंद केजरीवाल सरकार के वन स्टॉप सेंटर
केंद्रीय मंत्रालय ने दिल्ली में चल रहे सभी 11 वन स्टॉप सेंटर्स को नकार दिया है. मंत्रालय की ओर से नानू भसीन का कहना है कि दिल्ली में ये सेंटर्स कहां चल रहे हैं, किसी को पता नहीं है. जैसे दिल्ली में चल रहे हैं ऐसे सेंटर तो केंद्रीय मंत्रालय हर ब्लॉक में बना सकता है. दिल्ली के वन स्टॉप सेंटर्स सिर्फ नाम के हैं. उनमें न सभी सुविधाएं हैं न इन्फ्रास्ट्रक्चर है, न तकनीकी सुविधाएं हैं. दिल्ली के सेंटर सभी गाइडलाइंस को पूरा करते हैं. ज्यादातर वन स्टॉप सेंटर्स एक-एक कमरे में चल रहे हैं.
डीटीसी बसों में सीसीटीवी कैमरों पर विवाद

डीटीसी बस file photo
दिल्ली महिला आयोग की ओर से बताया गया कि दिल्ली सरकार ने डीटीसी बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग केंद्रीय मंत्रालय को भेजी थी और इसके तहत निर्भया फंड से पैसा मांगा था. लेकिन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मना कर दिया और कहा कि इससे महिलाओं को कोई फायदा नहीं होगा. डीसीडब्ल्यू का कहना है कि उन्होंने अपनी मांगें राज्य के डब्ल्यूसीडी को इस साल में भेज दी थीं.
जबकि केंद्रीय मंत्रालय का कहना है कि डीटीसी बसों में कैमरे व्यावहारिक नहीं हैं. इससे महिलाओं को कोई फायदा नहीं होने वाला है. बसों में भीड़ के दौरान अगर कोई वारदात होती है तो सीसीटीवी खास मददगार नहीं होंगे.

निर्भया के लिए निर्भया की मां ने सभी सरकारों से की न्याय की मांग. photo-file photo
निर्भया फंड मामले से दिल्ली सरकार ने झाड़ा पल्ला
निर्भया फंड को लेकर दिल्ली सरकार की ओर से प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया गया. इस मामले में जब दिल्ली सरकार के प्रवक्ता नगेंद्र शर्मा से बात की गई तो उन्होंने कुछ भी बोलने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि निर्भया फंड मामले पर दिल्ली महिला आयोग से बात कीजिए, वही बताएंगे.
निर्भया को किया याद, लेकिन राज्य की अन्य निर्भयाओं को भूल गईं ममता बनर्जी
निर्भया की बरसी पर हर साल याद करने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी निर्भया फंड से वन स्टॉप सेंटर बनाने के लिए फंड नहीं मांगा है. केंद्रीय मंत्रालय का कहना है कि उन्हें पश्चिम बंगाल से कोई मांग नहीं मिली है.
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