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(संजय कचोट)गुजरात में इस बार का विधानसभा चुनाव अत्यंत दिलचस्प बना हुआ है. ‘विकास पागल हुआ है’ का कांग्रेस का सोशल मीडिया में प्रभावी नारा, नोटबंदी, जीएसटी के अमल को लेकर चुनावी सभाओं में राहुल गांधी के प्रहार और दोनों ही पॉलिटिकल पार्टियों में उम्मीदवारों की पसंदगी को लेकर चल रही नाराज़गी और खींचातानी अपने चरम पर है.
इस बीच बीजेपी की राजनीति के दो कद्दावर नेता अमित शाह और आनंदीबेन पटेल के बीच में चल रही खींचातानी चर्चा का विषय बानी हुई है. राजनीतिक गलियारों में जो सब से ज्यादा चर्चित बात है वो ये है कि, किस नेता (शाह या पटेल) के कौन से उम्मीदवार को टिकट मिला या फिर कटा? कौन आगे रहा, कौन पीछे रह गया?
समग्रता में देखें तो पता लगता है कि उम्मीदवार के चयन में अमित शाह का पलड़ा भारी रहा है. जामनगर से वसुबेन त्रिवेदी (जो की आंनदीबेन पटेल की बहन हैं) का टिकट काटने या फिर अहमदाबाद के एलिसब्रिज एरिया से राकेश शाह, धारी से दिलीप संघानी, वाव से शंकर चौधरी, अहमदाबाद से ही जगरूपसिंह राजपूत, भरत बारोट, जगदीश पांचाल, दसक्रोई से बाबू जमनादास पटेल और कच्छ से डॉ नीमबेन आचार्य को टिकट दिलवाने में अमित शाह मुख्य रूप से सफल रहे हैं.उस तरफ आनंदीबेन पटेल उंझा से नारायण लल्लू पटेल, घाटलोडिया से भूपेंद्र पटेल, पूर्व गृह मंत्री रह चुके रजनी पटेल और अहमदबाद के साबरमती क्षेत्र से अरविन्द पटेल को टिकट दिलवा सकी हैं.
कई उम्मीदवार ऐसे भी हैं जिसके सपने चकनाचूर भी हुए हैं. जिसमे खासकर पूर्व गृह मंत्री रह चुके स्वर्गस्थ हरेन पंड्या की पत्नी जागृति पंड्या, अहमदाबाद के पूर्व मेयर अमित शाह, युवा भाजपा नेता अमित ठाकर, डॉ. ऋत्विज पटेल, अहमदाबाद के प्रवर्तमान मेयर गौतम शाह और कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए नरहरी अमीन जैसे नामांकित नेताओं को इस बार टिकट नहीं मिले हैं, जो कि बड़े ही आश्चर्य की बात है.
यहां तक कि भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता भरत पंड्या और इन्द्रविजय सिंह जडेजा को बावजूद उनकी इच्छा के विपरीत टिकट न मिलने से आमलोगों में और राजनीति के गलियारों में इसकी भारी चर्चा हो रही है.
टिकट के चयन में घाटलोडिया मतक्षेत्र से अमित शाह अपने उम्मीदवार बिपिन पटेल उर्फ़ सिक्का को टिकट देना चाहते थे, हालांकि आंनदीबेन यहां पर अपना प्रभाव साबित करने में सफल रहीं और अगमदाबाद म्युनिसिपल कारपोरेशन के चेयरपर्सन और अपने उम्मीदवार भूपेंद्र पटेल का नाम फाइनल करवाने में सफल रही हैं.
इन दोनों के बीच की तनातनी से आनंदीबेन पटेल ने अपनी पुत्री अनार पटेल को भी इस बार चुनाव लड़ने से दूर रखा है. इस निर्णय के पीछे कारण जो भी हो, लेकिन इतना तो तय है कि इन दोनों नेताओं के बीच का अंतर घटने से ज्यादा और बढ़ता जा रहा है.
Article source: https://hindi.news18.com/news/nation/mothers-love-prevailed-to-get-majid-arshid-khan-to-quit-militancy-and-return-home-mehbooba-mufti-1170387.html
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