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कांग्रेस गुजरात में खोई जमीन तलाशने के अभियान में गंभीरता से खुद को आदिवासी इलाकों में फोकस कर रही है. एक जमाने में पार्टी का आदिवासी बेल्ट पर प्रभुत्व था लेकिन वर्ष 2002 के विधानसभा चुनावों के बाद से उसका ये वोटबैंक कमजोर पड़ा है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी जिस तरह लगातार आदिवासी इलाकों में दौरे कर रहे हैं, उससे लगता है कि इस बार के चुनावों में आदिवासी सीटें कांग्नेस की रणनीति का मुख्य हिस्सा हैं. नवंबर के पहले सप्ताह में भी राहुल का तीन दिवसीय दौरा भी ऐसे तीन जिलों में हो रहा है, जहां आदिवासियों की 11 सुरक्षित विधानसभा सीटें हैं.
नवंबर में राहुल ने नवसृजन यात्रा के तीसरे चरण की शुरुआत भरूच के जामबुसर में एक मंदिर में दर्शन के साथ की. तीन नवंबर को उनकी तीन दिवसीय यात्रा खत्म होगी. इस दौरान वह भरूच के साथ सूरत और तापी का दौरा करेंगे. अलग अलग वर्गों के साथ चार चौपाल में शिरकत करेंगे.आदिवासियों की 27 सुरक्षित सीटें
गुजरात में आदिवासियों की तादाद करीब 90 लाख है, यानि राज्य की कुल आबादी का 16-17 हिस्सा. भाजपा को डर है कि पाटीदार पटेलों के साथ आदिवासियों पर उनकी पकड़ कमजोर पड़ रही है. फिलहाल गुजरात में 27 आदिवासी सुरक्षित सीटें हैं, पिछले चुनावों में कांग्रेस ने इसमें 12 सीटें जीती थीं. जबकि सत्ताधारी पार्टी ने 14 पर जीत हासिल की थी. केंद्र और राज्य की सत्ताधारी पार्टी ने पिछले कुछ सालों में आदिवासियों के विकास के लिए तमाम योजनाएं चलाई हैं.
कांग्रेस की रणनीति
सूरत और दक्षिण गुजरात में कुल 35 विधानसभा सीटें हैं, जिसमें 11 सुरक्षित सीटें हैं. इसके अलावा दाहोद, पंचमहल, वलसाड, आनंद और वडोदरा में भी आदिवासियों की मजबूत उपस्थिति है. असल में कांग्रेस का ध्यान इसबार विधानसभा चुनावों में इन सीटों पर है, जहां वो अधिकतम सीटें जीतना चाहती है. वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने अगर सूरत में सभी 12 सीटें जीती थीं तो दक्षिण गुजरात की 35 में 28 सीटों पर कब्जा किया. सूरत वो इलाका भी है, जहां पाटीदार पटेल का वर्चस्व है.दक्षिण गुजरात के सूरत, भरूच और तापी जिलों में कांग्रेस कम से कम 12 सीटें जरूर जीतना चाहती है. इसके लिए रणनीति भी बदली है. कांग्रेस का मानना है कि पिछले कुछ सालों में बड़े प्रोजेक्ट्स के चलते आदिवासियों ने बड़े पैमाने पर जमीनें गंवाईं हैं, उनकी दिक्कतों पर सरकार में कहीं कोई सुनवाई नहीं है.
राहुल ने किया तिमिल डांस
अक्टूबर में अपनी नवसृजन यात्रा के दूसरे चरण में भी राहुल आमतौर पर उन जिलों में गए, जहां आदिवासी बहुल्य है. उन्होंने उनका दिल जीतने की कोशिश की. चहोटा उदेपुर जिले में राहुल ने ड्रम बजाया और आदिवासियों के लोकनृत्य तिमिल में हिस्सा लिया. बाद में ये वीडियो वायरल भी हुआ. साफ लगता है कि कांग्रेस पुराने वोटबैंक को रिझाने के लिए सबकुछ करने में लगी है.

राहुल गांधी अक्टूबर में गुजरात के नर्मदा जिले के दौरे में आदिवासियों के बीच तिमिल लोकनृत्य करते हुए (फोटोःप्रेट्र)
भाजपा पर आरोप
अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में भी राहुल ने ट्राइबल बेल्ट में तीन दिवसीय यात्रा के दौरान चहोटा उदेपुर, दाहोद, पंचमहल और गोधरा जिलों में लोगों से मिलने जुलने के कार्यक्रमों में शिरकत की. वह अपनी सभाओं में भाजपा पर लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि गुजरात का विकास मॉडल किस तरह खोखली जमीन पर रखा गया है.
सभाएं और रैलियां
राहुल इस साल लगातार आदिवासियों के क्षेत्र में जाकर सभाएं और रैलियां कर रहे हैं. उन्होंने तकरीबन गुजरात के सभी आदिवासी इलाकों में पहुंचने की कोशिश की है. मई में उन्होंने नर्मदा जिले में आदिवासियों की बड़ी रैली को संबोधित किया. इससे पहले वह स्थानीय आदिवासी देवता देव मोगरा के मंदिर में जाकर उनके दर्शन किए.
भाजपा भी आदिवासियों को आदिवासियों को
भाजपा खुद आदिवासियों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही. पिछले साल 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने अपना जन्मदिन गुजरात के आदिवासियों के बीच मनाया था. तब उन्होंने 4800 करोड़ की सिंचाई और जल परियोजनाओं की घोषणा की थी. वर्ष 2017-18 में राज्य सरकार के बजट में नर्मदा जिले में आदिवासी विश्वविद्यालय बनाने के लिए 200 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया. ये अपनी तरह की पहली यूनिवर्सिटी होगी.
Article source: https://hindi.news18.com/news/nation/nia-preliminary-investigation-suggests-that-shah-received-funding-from-dubious-sources-1117011.html
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