Wednesday, 1 November 2017

Movie Review: अपनी बहन से दुनिया को बचाने में लगे हैं थॉर


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मार्वल की इस साल की आखिरी फिल्म थॉर राग्नारॉक 3 नवंबर को बड़ी स्क्रीन पर दस्तक देने जा रही है. हल्क की एक बार फिर से वापसी हो चुकी है. थॉर सीरीज़ की ये फिल्म कई मायनों में खास है. इस बार आपको थॉर की बहन भी देखने को मिलेगी. थॉर की बहन हेला इस फिल्म में गॉडेस ऑफ डेथ के किरदार में है. इसी के खिलाफ थॉर और लोकी साथ दिखाई देंगे.कहानी
फिल्म की कहानी शुरू होती है सर्टर पर बेड़ियों में जकड़े थॉर से, सर्टर यूनिवर्स का दूसरा हिस्सा है. वहां से थॉर सर्टर का मुकुट ले आता है जिसका असली इस्तेमाल फिल्म के आखिर में पता चलता है. फिल्म की पूरी कहानी हेला को हराकर शांति कायम करने के इर्द-गिर्द घूमती है. फिल्म में थॉर का एकमात्र मकसद ऐज़गार्ड को राग्नारॉक से बचाना.


इस बार मार्वल ने थॉर के भाई की बजाए उनसे लड़ने के लिए उनकी बहन को चुना है. लोकी, थॉर के साथ ही लड़ते नज़र आते हैं. जैसा कि बताया गया थॉर के साथ ही यूनिवर्स के इस हिस्से में कई लोग कैद हैं और इन कैदियों का एक भीषण युद्ध करवाया जाना है. इस तरह से मार्वल अपने एक लोकप्रिय किरदार हल्क को थॉर से इस भीषण लड़ाई में डालकर फिल्म का लुत्फ बढ़ा देता है. ये फाइटिंग सीक्वेंस पैसा वसूल हैं. हल्क पहले भी थॉर के साथ दिख चुके हैं और उनके साथी अवेंजर भी हैं.थॉर की ये लड़ाई उन्हें वक्त के साथ लड़ने पर मजबूर करती है क्योंकि थॉर को अपनी शक्तिशाली बहन हेला से अपनी दुनिया को भी बचाना है. हेला फिल्म में गॉडेस ऑफ डेथ के किरदार में हैं. ऐसे में थॉर की दुनिया यानि असगार्डियन सिविलाइजेशन में उनका आतंक छाया हुआ है. वो हर चीज तबाह करने पर तुली हुई हैं. ऐसे में थॉर उनसे लड़ने तो आते हैं पर जरा ध्यान दें कि महाबली थॉर का हथौड़ा आपको फिल्म में नहीं दिखेगा. ऐसे में थॉर के फैन थोड़ा निराश हो सकते हैं पर फिर भी उसकी भरपाई करने को आपको हल्क के साथ के धांसू सीन भी दिखेंगे.


राग्नारॉक क्या है?
राग्नारॉक ‘नॉर्स’ नाम की माइथोलॉजी का एक टर्म है, जो हिंदू धर्म के प्रलय और मुस्लिमों के कयामत के दिन और ईसाईयों के डूम्स डे की तरह ही है. पर इसमें खास ये है कि इसमें बस इंसानों का खात्मा नहीं होता, देवताओं का भी खात्मा हो जाता है. बल्कि कहें तो देवताओं का ही खात्मा होता है, जिससे इंसानों का खुद-ब-खुद खात्मा हो जाता है. इस माइथोलॉजी के किस्से यूरोप के उत्तरी जर्मनी से लेकर सारे नार्वे के तमाम भागों में प्रचलित हैं. इस अवधारणा को ही फिल्म का आधार बनाया गया है.


फिल्म में थॉर गॉडेस ऑफ डेथ से भले ही ब्रम्हाण्ड को छुटकारा दिला पाने में सफल हो जाता हो पर अपनी बहन हेला के प्रकोप से अपनी दुनिया असगार्डियन सिविलाइजेशन को नहीं बचा पाता है. और उसकी अपनी दुनिया का अंत हो जाता है पर खुशी की बात ये है कि ये अंत हमेशा के लिए नहीं होता, कई बार ये कुछ ही समय के लिए होता है. दरअसल इसे नई शुरुआत का सूत्रपात मान सकते हैं तो आगे की फिल्मों में आपको प्लैनेट वैसा ही फिर से बसा दिख सकता है.


मार्वल की फिल्मों में ग्राफिक्स और वीएफएक्स वगैरह जमकर यूज किया जाता है, इस मामले में आपको इस फिल्म में भी निराशा हाथ नहीं लगेगी. आप इंज्वाय करने के लिए फिल्म देखना चाहें तो थ्रीडी में ये फिल्म देखना एक जबरदस्त एक्सपीरियंस हो सकता है. फिल्म थॉर के नए दर्शकों के लिए थोड़ी सी उलझी हो सकती है. कहा जा रहा था कि डायरेक्टर ताइका वेटिटी ने इसमें ह्यूमर डालने की पूरी कोशिश की है जो कहीं कहीं सफल भी दिखती है पर ऐसा नहीं कि फिल्म आपको हंसाती ही रहे. स्क्रिप्ट राइटिंग के लिए फिल्म में उनका नाम नहीं है.

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