Monday, 1 January 2018

इन दो जजों की वजह से सुप्रीम कोर्ट में आए कई बदलाव


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सुप्रीम कोर्ट के रूम नंबर 11 में बैठने वाले दो जज अपनी व्यवहार कुशलता और किसी मसले पर तुरंत फैसला लेने के लिए जाने जाते हैं. आपसी तालमेल, आत्मविश्वास और मामले को समझने की क्षमता की वजह से दोनों जज काफी लोकप्रिय हैं.कोर्ट के रूम नंबर 11 में बैठने वाले ये जज हैं, जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस उदय यू ललित. पिछले 15 महीनों के दौरान सुप्रीम कोर्ट के इन दोनों जजों की बेंच ने कई अहम फैसले दिए हैं. यही नहीं, दोनों जजों की वजह से सुप्रीम कोर्ट में कई बदलाव भी आए हैं.


ट्रिब्यूनल्स और कोर्ट रूम में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस उदय यू ललित की बेंच ने मार्च 2017 में यह आदेश दिया था. इस आदेश के बाद पहली बार कोर्टरूम में कैमरे का प्रवेश हुआ. दोनों जजों की बेंच ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के कम से कम दो जिलों के कोर्ट में सीसीटीवी कैमरे के इंस्टॉलेशन का आदेश दिया. ताकि, कोर्ट की कार्यवाही रिकॉर्ड की जा सके. दोनों जजों ने बेहतर तरीके से केस की सुनवाई और न्याय में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से यह आदेश दिया.जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस उदय यू ललित की बेंच ने फैसला सुनाते हुए देश की 24 हाईकोर्ट को आदेश दिया कि वे तीन महीने के अंदर यह सुनिश्चित करें कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की कम से कम दो जिला व सत्र न्यायालयों के अंदर और बाहरी परिसर में बगैर ऑडियो के सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं.


बता दें कि सरकार और न्यायपालिका के बीच इस मसले को लेकर पहले भी बातचीत होती रही है. अगस्त 2013 में केंद्रीय कानून मंत्री ने देश के चीफ जस्टिस को न्याय में पारदर्शिता के संदर्भ में कोर्ट कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए चिट्ठी लिखी थी.


लोअर कोर्ट में जमानत और ट्रायल की डेडलाइन तय करना
न्यायिक व्यवस्था का उद्देश्य समाज को न्याय देना है. लेकिन, अगर न्याय समय पर नहीं मिला, तो इसका कोई मतलब नहीं. इसी बात का ख्याल रखते हुए जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस उदय यू ललित ने लोअर कोर्ट में जमानत और ट्रायल की डेडलाइन तय करने का आदेश दिया. ताकि, लोगों में न्यायपालिका के प्रति आस्था बनी रहे.


बेंच ने कहा, “देश में निचली अदालतों में ऐसी परिपाटी चल रही है और हमने कई ऐसे मामले देखे हैं तो अब वक्त आ गया है कि निचली अदालतों को यह बताया जाए कि ऐसी परिपाटी बंद हो और अगर ऊपरी अदालत में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी लंबित है, तो निचली अदालत में जमानत अर्जी पर विचार ना किया जाए.”


वैवाहिक मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का इस्तेमाल
दोनों जजों ने वैवाहिक मामलों के निपटारे के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के इस्तेमाल को भी मंजूरी दी. अपने सुझाव में बेंच ने कहा कि निचली अदालत की बेंच यह सुनिश्चित करे कि अलग हो चुके पति-पत्नी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वैवाहिक स्थिति निर्धारित करने से कहीं उनकी निजता के अधिकार का तो हनन नहीं होगा.


बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में बड़ी तादाद में तलाक के मामले लंबित हैं. इन मामलों में दंपती अपने अलग हो चुके पति या पत्नी विभिन्न दलीलों के साथ तलाक के मामले को एक शहर से दूसरे शहर या फिर एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने की अपील करते हैं.


सेक्शन498A पर दिया अहम फैसला
दोनों जजों की बेंच ने सेक्शन 498A पर अहम फैसला दिया. इस कानून के तहत अगर कोई विवाहित महिला मजिस्ट्रेट जज के सामने यह कहे कि उसे ससुराल वालों ने दहेज के लिए प्रताड़ित किया या किसी प्रकार की यातना दी है, तो जिसके खिलाफ वो बयान देगी उसे तुरंत जेल में डाल दिया जाएगा. लेकिन, बेंच के फैसले के बाद ऐसे मामलों में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लग गई है.


बेंच ने अपने आदेश में कहा कि दहेज प्रताड़ना के इस तरह के मामलों में तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी. सभी आरोपों की जांच किए बगैर किसी को भी अरेस्ट करना नागरिक और मानवीय अधिकारों का हनन होगा.


लॉयर्स फीस बनाम जस्टिस एक्सेस
भारत में हर चीजों की तरह न्याय भी महंगी है. किसी भी मामले के लिए केस करने, उसे लड़ने के लिए वकील हायर करने और न्याय पाने के लिए कोर्ट की पूरी प्रक्रिया में काफी खर्च होता है. एक आम आदमी के लिए इसका वहन करना आसान नहीं होता. दोनों जजों की बेंच ने जस्टिस एक्सेस यानी आम लोगों तक न्याय की पहुंच के लिए भी अहम फैसले दिए.


दिसंबर 2017 में दोनों जजों की बेंच ने लॉयर्स फीस तय करने को लेकर अपना फैसला दिया. ताकि गरीबों और जरूरतमंदों को भी जल्दी न्याय मिल सके.


(Utkarsh Anand )


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Article source: https://hindi.news18.com/news/nation/raj-thackeray-appeals-people-to-contact-him-if-trolled-1121094.html

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