Tuesday, 27 March 2018

कपिल सिब्बल को बाबरी मस्जिद केस छोड़ने को कहा गया, लेकिन ये नेता बिना रोक टोक के केस लड़ते रहे


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((सुमित पांडे))पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे ने लंदन के इनर टेम्पल में ट्रेनिंग ली थी. सन 1 9 46 में उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट में रजिस्ट्रेशन करवाया था. 15 साल बाद शंकर रे सक्रिय राजनीति में आ गए. इसके बाद वो कभी कोर्ट में नहीं गए. लेकिन दिसंबर 2010 में अंतिम सांस लेने से पहले करीब दो दशक बाद वो केस के सिलसिले में कोर्ट गए थे.


लखनऊ में आयोजित रे की एक शोक सभा में, अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के नेता और वकील जफरयाब जिलानी ने 1988 में रे के साथ उनकी मुलाकात को याद किया. रे ने बोर्ड के सदस्यों को धैर्य से सुना और केस लड़ने के लिए तैयार हो गए.


सिद्धार्थ शंकर रे ने बाबरी मस्जिद केस में अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लिए लड़ते रहे. इसके लिए उन्होंने एक पैसा नहीं लिया. आखिरी बार उन्होंने अप्रैल 2007 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच के लिए केस लड़ा.सिद्धार्थ शंकर रे आमतौर पर पत्नी के साथ लखनऊ आते थे. कोर्ट में मामले पर बहस करने के बाद वो चुपचाप लौट जाते थे. शंकर रे कांग्रेस के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सबसे करीबी सहयोगियों में से थे.


एक दशक बाद, जब हाईकोर्ट के फैसले के बाद के सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो तस्वीर बदल गई. पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने कहा कि एआईएमपीएलबी के वकील को संसद में प्रतिनिधित्व वाले राजनीतिक दल के आधिकारिक स्टैंड के रूप में लिया गया है. लिहाजा बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद से जुड़े केस में कपिल सिब्बल को ये केस छेड़ने के लिए कहा गया है.


पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, सिब्बल से कहा गया कि इस केस से हाथ अपने खींचना ही राजनीतिक रूप से उनके लिए समझदारी भरा कदम होगा. बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अकसर ही सिब्बल सहित कई कांग्रेसी नेताओं की कोर्ट में भूमिका को लेकर राजनीतिक प्रहार करते रहे हैं.


प्रधानमंत्री मोदी ने इस केस में सिब्बल की दलीलों को लेकर गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान भी काफी आलोचना हुई थी. तब सिब्बल ने अदालत से यह मांग की थी कि इस बेहद संवेदनशील बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई 2019 के आम चुनाव के बाद ही की जाए, तब मोदी ने कहा था कि क्या सिब्बल का राम मंदिर को चुनावी राजनीति से जोड़ना सही है.


सिद्धार्थ शंकर रे के साथ ऐसा नहीं हुआ था. बाबरी मस्जिद को लेकर देशभर में राजनीति हो रही थी लेकिन फिर भी वो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लिए लड़ते रहे. लेकिन अब हालात बदल गए हैं. कांग्रेस बीजेपी के हिंदुत्व के मुद्दे को बेअसर करना चाहती है.


राजनीति धारणाओं पर आधारित है. इसे बनाने और खत्म करने के लिए दशकों का समय लग जाता है.


Article source: http://hindi.news18.com/videos/nation-odisa-man-carries-chlid-death-body-1023408.html

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