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त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड के सियासी संग्राम में सबसे बड़ा झटका कांग्रेस को लगा है. अब तक आए रुझानों के मुताबिक, मेघालय में वह अपनी सरकार बचाती नजर आ रही है लेकिन त्रिपुरा और नगालैंड में उसे भारी नुकसान हुआ है.मेघालय में अब तक आए रुझानों पर नजर डालें तो वहां पेंच फंसता दिख रहा है और यहां अभी से ही सियासी जोड़तोड़ का खेल शुरू हो गया है. केंद्रीय गृह राज्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता किरण रिजिजू ने भी कहा कि उनकी पार्टी त्रिपुरा और नगालैंड के अलावा मेघालय में भी सरकार बनाएगी. बीजेपी की नजर सहयोगियों के साथ मेघालय में भी किसी तरह से सरकार बनाने की है. क्योंकि उसने पूर्वोत्तर राज्यों को भी कांग्रेस मुक्त बनाने का अभियान छेड़ा हुआ है. पूर्वोत्तर में मेघालय के अलावा सिर्फ मिजोरम में कांग्रेस की सरकार बची है.
मेघालय में बीजेपी की सरकार बनाने की कोशिशों को देखते हुए ही कांग्रेस ने वहां स्थिति संभालने के लिए पार्टी नेता अहमद पटेल, कमलनाथ और मुकुल वासनिक को शिलांग भेज दिया है. क्योंकि गोवा और मणिपुर में सबसे बड़ी पार्टी रहते हुए भी उसे सत्ता नहीं मिली. जबकि बीजेपी ने जोड़ तोड़ करके सरकार बना ली थी.
पूर्वोत्तर में राहुल गांधी के सामने हैं कई सवालमेघालय में 2013 के चुनाव में कांग्रेस के पास 29 सीट थीं. जबकि अब तक के रुझानों के मुताबिक वह सिर्फ 22 सीट पर ही सिमटती नजर आ रही है. पहले उसके पास 34.78 फीसदी वोट शेयर थे, देखना यह है कि इस बार गिनती पूरी होने के बाद उसके पास कितना जनाधार बचता है.
बात करें नगालैंड की तो यहां कांग्रेस के 08 विधायक हुआ करते थे. उसका वोट शेयर था 24.89 फीसदी. लेकिन अब वह यहां शून्य पर सिमटती नजर आ रही है. रही बात त्रिपुरा की तो यहां 25 साल से सत्ता में रही वामपंथी सरकार ही उखड़ गई तो कांग्रेस कहां ठहरती. कांग्रेस यहां 10 विधायकों के साथ 36.53 फीसदी वोट लेकर दूसरी बड़ी पार्टी थी. लेकिन रुझानों के मुताबिक वह खाता खोलने की स्थिति में भी नहीं दिख रही है.
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