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गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को असम के मुख्यमंत्री सर्वदानंद सोनोवाल को भरोसा दिलाया कि नगा शांति समझौते को अंतिम स्वरूप देते समय असम की क्षेत्रीय संप्रभुता का ख्याल रखा जायेगा.मुख्यमंत्री सोनोवाल ने राज्य के दीमा हासो ज़िले की स्थिति से राजनाथ सिंह को अवगत कराया, जहां ‘ग्रेटर नगालिम’ के विरोध के चलते दो लोगों की जानें चली गई.
गृहमंत्री ने कहा कि किसी के दिमाग में किसी तरह का कोई संदेह नहीं होना चाहिए. असम की एक इंच ज़मीन भी किसी दूसरे राज्य को नहीं दी जायेगी और असम व दूसरे राज्यों की संप्रभुता को बना के रखा जायेगा.
दीमा हासो ज़िले में स्थिति तब तनावपूर्ण हो गयी थी जब आरएसएस के एक नेता ने बयान दिया कि सरकार NSCN-IM के साथ शांति वार्ता का जो हल निकाला जा रहा है उसके तहत सरकार दीमा हासो ज़िले को ग्रेटर नगालिम या ग्रेटर नगालैंड में शामिल कर देगी.गुरुवार को उस वक्त दो लोगों की मौत हो गयी जब पुलिस को एक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी.
8 दिसंबर 2017 को नगालैंड के दौरे के समय भी जब गृहमंत्री राजनाथ सिंह से पूछा गया कि क्या NSCN-IM के साथ शांति समझौते के तहत अरुणांचल प्रदेश, असम व मणिपुर की क्षेत्रीय संप्रभुता के साथ समझौता किया जायेगा. इस पर राजनाथ सिंह ने कहा था कि किसी भी पूर्वोत्तर राज्य की संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं होगा.
बता दें कि NSCN-IM की मांग है कि अरुणांचल प्रदेश, असम व मणिपुर के नगा बाहुल्य वाले इलाकों को मिलाकर ‘ग्रेटर नगालिम’ बना दिया जाये. पर ये तीनों बीजेपी शासित राज्य लगातार इसका विरोध करते रहे हैं.
देश की आज़ादी के बाद से ही ग्रेटर नगालैंड की मांग उठने लगी थी, इसके चलते तमाम हिंसक आंदोलन भी हुए. पर 1997 में NSCN-IM और केंद्र सरकार के एक वार्ताकार के साथ हुई बातचीत के बाद सीज़फायर की घोषणा की गयी.
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