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2019 की लड़ाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस ने राफेल सौदे को बोफोर्स घोटाले की तरह इस्तेमाल करने की रणनीति बनाई है. यही नहीं पार्टी ने धार्मिक ध्रुवीकरण रोकने के लिए दलित-अल्पसंख्यक गठजोड़ पर भी काम करना शुरू कर दिया है. पार्टी ने तय किया है कि हिन्दू-मुस्लिम बहस से बचने के लिए पार्टी मुस्लिम शब्द के बजाय ज्यादा से ज्यादा अल्पसंख्यक शब्द का इस्तेमाल करेगी.सूत्रों ने बताया कि लोकसभा चुनाव में मोदी का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस ने शुरुआती ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है. मोदी और बीजेपी ने राहुल गांधी के साथ मुस्लिम बुद्धिजीवियों की मुलाकात को जिस तरह से मुद्दा बनाया उससे सजग होकर कांग्रेस ऐसी गलती अब नहीं दोहराना चाहती. 2014 की तरह वोटों का ध्रुवीकरण न हो इसके लिए कांग्रेस ने ब्लूप्रिंट बनाया है.
इसके अनुसार, पार्टी मुस्लिम शब्द के इस्तेमाल की बजाए ज्यादातर अल्पसंख्यक शब्द का इस्तेमाल करेगी. अल्पसंख्यक वर्ग के अन्य बुद्धिजीवियों से भी राहुल मुलाकात करेंगे. दलित-मुस्लिम गठजोड़ बनाया जाएगा लेकिन इस सावधानी के साथ की इसे दलित-अल्पसंख्यक गठजोड़ दिखाया जाए.
दलित अत्याचार पर राहुल की हालिया लिखी चिट्ठी में दलितों के साथ धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय का भी ज़िक्र किया गया है. राहुल गांधी ने पार्टी प्रवक्ताओं और अखबारों में लेख लिखने वाले नेताओं को ताकीद की है कि धार्मिक भावनाएं उभारने वाले मुद्दों पर लिखने और बोलने से बचें.
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पार्टी ने राफेल विमानों की खरीद में तथाकथित रूप से भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है. पार्टी राफेल को बोफोर्स की तरह इस्तेमाल करेगी.
बीजेपी इन दोनों मुद्दों से निपटने के कांग्रेस के नज़रिए को तवज्जो नहीं दे रही. सुब्रमण्यम स्वामी ने कांग्रेस के 2019 के चुनावों में राफेल मुद्दा उठाने के मसले पर कहा कि तब तक पूरी कांग्रेस तिहाड़ में होगी और वहीं कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक भी हुआ करेगी. स्वामी ने दलित-मुस्लिम गठजोड़ की संभावना को भी खारिज़ कर दिया. कांग्रेस राहुल गांधी द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पीएम को गले लगाने को भी भुनाएगी.
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