Monday, 30 July 2018

जानिए क्‍यों उद्धव ठाकरे ने मराठा आरक्षण पर बदला अपना स्‍टैंड


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शिवसेना ने पहली बार अपनी भूमिका बदलते हुए जाति के आधार पर मराठा आरक्षण का समर्थन किया है. उद्धव ठाकरे ने पार्टी विधायकों के साथ बैठक के बाद कहा कि सरकार को पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना ही मराठा आरक्षण देना चाहिए. उन्‍होंने इसके लिए विशेष अधिवेशन बुलाकर प्रस्ताव पारित करने की मांग भी की.उद्धव के बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि उन्‍होंने पार्टी के रूख में इतना बड़ा बदलाव क्यों कर दिया. शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे हमेशा से जाति के आधार पर आरक्षण के खिलाफ रहे है और उन्होंने कभी इस तरह के आरक्षण का समर्थन नही किया. वह केवल आर्थिक आधार पर आरक्षण का समर्थन करते थे. लेकिन उद्धव ने उनकी लाइन से हटकर बात कही है.


शिवसेना के रूख में बदलाव के पीछे जो सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है वह है वोटबैंक. कोंकण के बाद शिवसेना को सबसे ज्यादा समर्थन मराठवाड़ा से ही मिलता है और यहीं से उसके सबसे ज्यादा विधायक चुनकर आते है. जाहिर है शिवसेना इन इलाकों में मराठा वोटबैंक को नाराज नहीं करना चाहती है. लेकिन डर यह भी है कि कहीं अब ओबीसी नाराज ना हो जाए जो अब तक शिवसेना के साथ रहते हैं.


उद्धव ने पत्रकारों से साफ कहा कि मराठा आरक्षण का विषय अगर अदालत के अधिकार क्षेत्र में ही है तो फिर आयोग या कमेटी की रिपोर्ट की क्या जरुरत है. हमारा आज भी मानना है कि सबको एकजुट होकर इस मामले में केन्द्र को अपनी सिफारिश भेजनी चाहिए. इस पर विशेष अधिवेशन बुलाना चाहिए और आयोग की रिपोर्ट का इंतजार किए बिना अधिवेशन बुलाना चाहिए. बाकी समाज के आऱक्षण पर भी सिफारिश भेजना चाहिए.

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