Monday, 30 July 2018

बच्चों की पढ़ाई के लिए अतिरिक्त मेहनत करते हैं भारतीय माता-पिता


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नई दिल्ली [प्रेट्र]। लगभग आधे भारतीय माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में मदद करने के लिए अपनी छुट्टियों का बलिदान करते हैं, अतिरिक्त मेहनत करते हैं और उनकी विश्वविद्यालयी शिक्षा पूरी कराने के लिए पैसे भी उधार लेते हैं। शिक्षा के संबंध में एचएसबीसी ग्लोबल सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक 49 प्रतिशत भारतीय माता-पिता बच्चों की पढ़ाई के लिए कुछ न कुछ दूसरा काम भी कर लेते हैं।


10000 माता-पिता पर किया गया है यह सर्वे। इसमें भारत समेत दुनिया के 15 देशों के 1500 छात्रों को शामिल किया गया। बच्चों के होमवर्क को लेकर भारतीय अभिभावक दुनियाभर में सबसे ज्यादा समय देते हैं। यह बात एक सर्वेक्षण में सामने आई है। इसमें बताया गया है कि भारतीय अभिभावक न केवल बच्चों के होमवर्क में सबसे ज्यादा समय देते हैं, बल्कि सबसे ज्यादा मदद भी करते हैं।


84 प्रतिशत माता-पिता ने माना कि वे अपने बच्चों की विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा के लिए अपनी मूल आमदनी पर भरोसा करते हैं। जबकि 41 प्रतिशत माता-पिता की राय है कि उनके पास बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई विशेष फंड नहीं है। वित्तीय दबाव के कारण तमाम माता-पिता को छुट्टी के दिनों में भी काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके अलावा उन्हें अपनी जरूरतों से भी समझौता करना पड़ता है। माता-पिता का मानना है कि बच्चों का बेहतर भविष्य उनके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है। वह इसके लिए हरसंभव कार्य करते हैं।




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60 प्रतिशत भारतीय अभिभावकों का कहना है कि उन्हें बच्चों के उच्च शिक्षा संबंधी खर्च पूरे करने के लिए अपने कई खर्च घटाने पड़ते हैं, जैसे कि बाहर खाने अथवा फिल्म देखने जैसी गतिविधियों पर रोक लगानी पड़ती है। इस लिहाज से वैश्विक औसत 53 है। 59 प्रतिशत भारतीय अभिभावकों (वैश्विक औसत 41) ने अपनी छुट्टियों की संख्या कम मानी है।


3.5 लाख रुपये औसतन खर्च करते हैं भारतीय अभिभावक अपनी बच्चों की यूनिवर्सिटी शिक्षा पर। यह औसत स्नातक स्तर की शिक्षा के किसी एक कोर्स का है। इस खर्च को पूरा करने के लिए लगभग दो तिहाई भारतीयों को किसी न किसी रूप में कर्ज लेना पड़ता है, जबकि वैश्विक स्तर की बात करें तो केवल एक तिहाई माता-पिता बच्चों की पढ़ाई के लिए लोन लेते हैं। इसके अलावा माता-पिता अपनी भविष्य निधि से भी पैसा निकालकर बच्चों पर खर्च करते हैं। 


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By Sanjay Pokhriyal


Article source: http://feedproxy.google.com/~r/ndtvkhabar/~3/LOzzeYj0cQM/story01.htm

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