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बंगलुरु की सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने में नाकाम रही बंगलुरु नगर महापालिका (बीबीएमपी) शहर से कचरा हटाने के लिए तय की गई 31 अक्टूबर की डेडलाइन से भी चूक गई है.दरअसल कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दिनेश महेश्वरी ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए बीबीएमपी से दिवाली से पहले शहर से कचरा साफ करने को कहा था. हालांकि नगर निकाय ने बुधवार को कोर्ट से शहर को कचरा मुक्त करने के लिए और समय की मांग की है.
नगर निकाय ने अपने बचाव में अदालत से कहा कि कचरा उठाने के लिए बीबीएमपी के ऑटो के इलाके में पहुंचने तक भी कुछ लोग सोए रहते हैं और फिर सड़क किनारे कचरा फेंक देते हैं.
निकाय ने यह भी कहा कि शहर से कचरा हटाने के तमाम उपाय किए जाने बावजूद ऐसी कई जगहें हैं, जहां लोग अब भी कचरा फेंक रहे हैं. हालांकि नागरिक निकाय ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि 95 प्रतिशत शहर साफ किया चुका है और बाकी का कचरा अगले 48 घंटों में साफ कर लिया जाएगा.ये भी पढ़ें: #SerialKillers: उसे मंदिरों में मिलते थे शिकार और पूजापाठ था उसका हथियार
कोर्ट इससे पहले भी लोगों की समस्याओं के निपटारे में निश्क्रियता को लेकर बीबीएमपी की आलोचना कर चुका है. अदालत ने तब बेहद सख्त लहजे में पूछा था कि नगर निकाय को क्यों न भंग कर किया जाए और शहर की परेशानियों को दूर करने के लिए किसी दूसरी एजेंसी को जिम्मा दिया जाए.
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काउंसिल ने हाई कोर्ट से ये भी कहा कि कुछ लोग सफर करते समय भी कचरा सड़क पर फेंकते हैं.
इस पर कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए सरकार पूरे शहर में सीसीटीवी कैमरे लगाए और ऐसे लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाए.
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