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(आकाश हसन)कश्मीर में हाल ही में पत्थरबाजी की एक घटना में सेना का एक जवान शहीद हो गया. कम से कम एक दशक में पहली बार ऐसा हुआ जब पत्थरबाजी में किसी जवान की जान गई हो. पहले से ही अशांत जम्मू-कश्मीर में हिंसा तेजी से बढ़ रही है. पिछले रविवार से अब तक घाटी में जवानों, आम नागरिकों और आतंकियों समेत कम से कम 23 लोगों की मौत हो चुकी है.
अक्टूबर में ही अब तक 59 लोग मारे गए हैं. इनमें 31 आतंकी, 14 आम नागरिक और 14 सुरक्षाबल के जवान शामिल हैं. जुलाई 2016 के बाद अक्टूबर 2018 में घाटी में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं. जुलाई 2016 में हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद भड़की हिंसा में 62 लोग मारे गए थे.
कश्मीर में सुरक्षाबलों के लिए चुनौती बने पाकिस्तानी स्नाइपर, रणनीति बदल रही है सेनाघाटी में तैनात सुरक्षा अधिकारियों ने न्यूज 18 को बताया कि आगामी पंचायत चुनाव और सर्दी के मौसम को देखते हुए आतंकी मुठभेड़ें बढ़ी हैं. सूत्रों ने न्यूज18 को बताया कि घाटी का इतिहास है कि पंचायत चुनावों में आतंकी अधिक सक्रिय हो जाते हैं इसलिए चुनाव से पहले ही जवान उनका खात्मा करने की कोशिश में लगे हुए हैं.
जम्मू कश्मीर पुलिस के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “जब कोई बड़ी रैंक का आतंकी मारा जाता है तो उनके संगठन के लोग झुंझला जाते हैं और उनका मूवमेंट शुरू हो जाता है. इंटेलिजेंस इनपुट की मदद से हम ऑपरेशन लॉन्च करने में सफल होते हैं. कश्मीर में फिलहाल ऐसा ही हो रहा है.”
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आतंकियों के मारे जाने के बाद यह नियम बन गया है कि उसके सहयोगी बंदूकें लेकर उसके अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं. सूत्रों ने बताया कि इससे इंटेलिजेंस को यह पता करने में मदद मिलती है कि किन इलाकों में आतंकियों की उपस्थिति कैसी है. अधिकारी मानते हैं कि आतंकियों की मौत के बाद ऑपरेशन लॉन्च करना उनके लिए अधिक आसान होता है.
जम्मू कश्मीर पुलिस के एडिशनल डीजीपी मुनीर खान कहते हैं कि अच्छी इंटेलिजेंस इनपुट के चलते ऑपरेशंस की संख्या बढ़ी है.
एंटी मिलिटेंसी ऑपरेशंस की बढ़ती संख्या के बाद भी कश्मीर के हालात बदलते नहीं दिख रहे हैं. यहां हिंसा, प्रदर्शन और आतंकियों के जनाजे में शामिल होने वालों की संख्या कम नहीं हो रही है.
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सिविल राइट्स ग्रुप के डेटा के मुताबिक पिछले 10 महीने में मुठभेड़ में 472 लोग मारे गए हैं. आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर तक 207 आतंकी, 131 आम नागरिक और 132 जवानों की मौत हुई है.
दूसरे शब्दों में कहें तो कश्मीर में औसतन 14 घंटे में एक मिलिटेंट मारा जाता है. वहीं हर दूसरे दिन यहां एक जवान और एक नागरिक की मौत होती है. घाटी में पिछले साल कुल 379 लोगों की मौत हुई थी. जिनमें 100 जवान, 102 आम नागरिक और 177 आतंकी शामिल थे.
Article source: https://hindi.news18.com/news/nation/mahishasura-has-been-dressed-as-doctor-in-kolkata-1117381.html
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