Friday, 2 November 2018

राफेल डील पर झूठ बोल रहे हैं दसॉ के सीईओ : राहुल गांधी


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राहुल गांधी ने एक बार फिर राफेल सौदे पर बीजेपी को निशाना बनाते हुए कहा है कि दसॉ के सीईओ इस पूरे मामले पर झूठ बोल रहे हैं. घाटे वाली कंपनी में 284 करोड़ रुपये क्‍यों दिए गए. आठ लाख की कंपनी में 284 करोड़ रुपये का निवेश करना मुझे समझ में नहीं आता है. दसॉ के पैसे से जमीन खरीदी गई. दसॉ कंपनी को मोदी सरकार बचा रही है. हमारा काम केवल देश को सच बताना है.राफ़ेल घोटाले की परतें आए दिन बेनक़ाब हो रही हैं. भ्रष्टाचार का घिनौना खेल जगज़ाहिर है. अब पैसे के लेन-देन की पोल भी खुल रही है. राहुल गांधी ने कहा कि सीईओ ने कहा था कि एचएएल को दरकिनार कर अनिल अंबानी को कांट्रेक्ट देन का कारण था जमीन. अब बात सामने आ रही है कि 284 करोड़ से जमीन खरीदी गई है. मतलब डेसाल्ट का सीईओ साफ झूठ बोल रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि करप्शन हुआ है, डेसाल्ट के सीईओ झूठ बोल रहे हैं. ये क्लीयर कट केस ऑफ करप्शन है. बहुत जल्‍द सच बाहर आएगा.


गौरतलब है कि राफेल फाइटर जेट को लेकर चल रहे विवाद के बीच दसॉ एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने कहा है कि अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस के साथ समझौता करने का फैसला उनका था. NEWS 18 से खास बातचीत में ट्रैपियर ने कहा कि राफेल को लेकर रिलायंस के साथ पहला समझौता फरवरी 2012 में हुआ था. इसके बाद रिलायंस के साथ भारत में पार्टनरशिप करने का फैसला किया गया. बता दें कि दसॉ एविएशन ही राफेल जेट का निर्माण करती है.


क्या है राफेल डील?राफेल फाइटर जेट डील भारत और फ्रांस की सरकारों के बीच सितंबर 2016 में हुई. हमारी वायुसेना को 36 अत्याधुनिक लड़ाकू विमान मिलेंगे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सौदा 7.8 करोड़ यूरो (करीब 58,000 करोड़ रुपये) का है. सितंबर 2019 में पहला राफेल भारत पहुंचेगा.


एनडीए और यूपीए सरकार के दौरान मूल्य में कितना फर्क?
कांग्रेस का दावा है कि यूपीए सरकार के दौरान एक राफेल फाइटर जेट की कीमत 600 करोड़ रुपये तय की गई थी. मोदी सरकार के दौरान एक राफेल करीब 1600 करोड़ रुपये का पड़ेगा.


Article source: http://hindi.news18.com/news/jharkhand/ranchi/476-students-absconding-with-stipend-974420.html

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