Friday, 2 November 2018

आपकी गाड़ी 15 साल पुरानी हो गई है तो बैन से होने वाले पैसों के नुकसान से ऐसे बचें


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भारत में जैसे यूज कारों को खरीदने का एक सिस्टम है, वैसा सिस्टम उन्हें हटाने का नहीं है. यही यूज कारें दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में प्रदूषण का एक बड़ा कारण हैं. हाल ही में, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली में 15 साल से पुरानी कारों पर रोक लगा दी है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग को आदेश दिए थे कि वह 10 साल पुराने डीज़ल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों की पहचान करके उनके परिचालन पर रोक लगाए. रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस यानि RTO ने ऐसे वाहनों को फिर से रजिस्टर करना और उनकी फिटनेस चेक करना बंद  कर दिया है.फिर भी अभी तक पुराने वाहनों के लिए कोई पॉलिसी देश में नहीं है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का यह फैसला पुरानी कारों के मालिकों के लिए नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है क्योंकि उन्हें पता नहीं है कि उन्हें पुराने वाहनों का क्या करना है?


फिलहाल कार मालिकों के पास यही विकल्प है कि वे अपने वाहनों को पड़ोसी राज्यों में ट्रांसफर करा लें या बेच दें, वह भी उस वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानि RC एक्सपायर होने से पहले. लेकिन RC एक्सपायर होने से पहले ही ऐसा करना जरूरी है क्योंकि अगर गाड़ी के 15 साल हो गए हैं तब आपकी RC रिन्यू नहीं होगी.


जब आपकी कार दूसरे राज्य में ट्रांसफर होगी तो यह नए RTO में फिर से रजिस्टर हो जाएगी. और पुराने RTO में यह बात रजिस्टर कर ली जाएगी. वरना गैरकानूनी गतिविधियों के लिए उनके वाहन के प्रयोग का खतरा बना रहेगा. जो लोग अपनी कार को दूसरे राज्य में ट्रांसफर नहीं करना चाहते, उनके लिए कार को स्क्रैप (खत्म करना) करवा देना ही एक विकल्प बचता है.यह भी पढ़ें: 10 साल पुरानी 40 लाख गाड़ियां दिल्ली की सड़कों से हटेंगी, की जा सकती हैं जब्त


कार स्क्रैपिंग के बारे में जो बातें आपको जान लेनी चाहिए-
कार को दूसरे राज्य में ट्रांसफर कराने के झमेले से बचने के लिए, कारों के मालिक इन्हें स्क्रैप करवा सकते हैं. किसी पुराने वाहन को स्क्रैप करवा देना ही वो सबसे सही विकल्प है जो इस परिस्थिति के लिए लोगों के पास मौजूद है. इसमें कार को टुकड़ों-टुकड़ों में बांटकर फिर से रिसाइकिल किया जाता है. जिससे कि गैरकानूनी गतिविधियों में इसके प्रयोग के चांस पूरी तरह से खत्म हो जाते हैं. हालांकि इसमें किसी को चलती गाड़ी बेचने जितने पैसे तो नहीं मिलते लेकिन आप भविष्य के लिए सेफ हो जाते हैं.


लेकिन कार-स्क्रैपिंग के वक्त इन बातों को जरूर ध्यान रखें-


2. कार मालिक के लिए जरूरी है कि वह इस काम को किसी ऑथराइज्ड डीलर से ही करवाए. डीलर यह भी


3. सुनिश्चित करे कि कार को बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए खत्म किया जाएगा.


  1. कार मालिक के लिए जरूरी है कि वह RTO को भी इस बारे में जानकारी दे दे. कार को RTO में डिरजिस्टर भी करा सकते हैं.


  2. स्क्रैपिंग करने वाला पहले कार का मुआयना करता है और फिर कार के भार के आधार पर तय करता है कि उसका दाम कितना होगा. एक बार सहमति बनने के बाद, स्क्रैप डीलर कार के हिस्सों को अलग-अलग कर उसे रबड़, प्लास्टिक, लोहा आदि अलग-अलग हिस्सों में बांट देता है.




  3. कार का मालिक कार के अलग-अलग हिस्सों जैसे बैटरी या टायर आदि के दाम के लिए उनकी कंडीशन के हिसाब से मोल-तोल कर सकता है. वहीं अगर कार में CNG किट लगी है तो कार का दाम आम कारों से अलग तरीके से तय होता है.




  4. हां, कार मालिकों को हमेशा यह सावधानी बरतनी चाहिए कि वे सुनिश्चित कर लें कि कार स्क्रैप करने वाले ने कार को पूरी तरह से खत्म कर दिया है कि नहीं. क्योंकि कई बार ऐसे मामले भी सामने आए हैं कि कार को ठीक कंडीशन में देखते हुए स्क्रैपर ने उसे गैरकानूनी तत्वों को बेच दिया है. अगर ऐसा होता है तो कार मालिक (जिसके नाम से कार रजिस्टर है) के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है.




  5. कार मालिकों के लिए यह जरूरी नहीं होता कि वे असली RC स्क्रैप करने वाले डीलर को दें. आप उसे RC की फोटोकॉपी भी दे सकते हैं.




  6. आप RTO में आगे की कार्यवाही के लिए स्क्रैप की गई कार की फोटो भी ले सकते हैं.



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Article source: http://hindi.news18.com/news/jharkhand/ranchi/476-students-absconding-with-stipend-974420.html

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