Monday, 26 November 2018

CJI गोगोई की मौजूदगी में रविशंकर बोले- कार्यपालिका के क्षेत्र में आता है शासन


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सीजेआई की मौजूदगी में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को कहा कि न्यायपालिका को यह तय करना है कि शासन से जुड़े मुद्दों के अधिकार अपने हाथ में लेने के लिए वह ‘कितनी दूर’ तक जा सकती है. इसके साथ ही उन्होंने जोर दिया कि संविधान के सभी अंगों को लक्ष्मण रेखा के अंदर रहने की आवश्यकता है. प्रसाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित संविधान दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे. सीजेआई रंजन गोगोई और अदालत के अन्य  जज भी समारोह में मौजूद थे.प्रसाद ने कहा, ‘शासन एक बेहद जटिल कवायद है, हो सकता है कि अपने अंदर ही यह विचार करने की आवश्यकता है कि न्यायपालिका को कितनी दूर तक जाने की जरूरत है,. यह फैसला न्यायपालिका को करना है.’


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उन्होंने कहा कि बहुत से ‘प्रतिस्पर्धी हित’ हैं, ‘बहुत से जटिल दावे, कई अन्य निहित हित’ हैं जिन्हें सरकार चलाने के दौरान समझने की जरूरत है. उन्होंने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग कानून का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार कर लिया है लेकिन इसे रद्द करने के लिए बताए गए कुछ कारणों पर उसे आपत्ति है.यह भी पढ़ें: लोकसभा चुनाव लड़ने की उम्र नहीं होगी कम, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका


उल्लेखनीय है कि अदालत ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग कानून को रद्द कर दिया था. प्रसाद ने जनहित याचिकाओं का भी जिक्र किया और कहा कि मूल विचार हाशिए पर के और वंचित लोगों को सुनने की अनुमति देना था. प्रसाद ने अधीनस्थ न्यायपालिका में और प्रतिभाशाली लोगों को शामिल करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा की वकालत की.


उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय परीक्षा से प्रतिभाशाली युवा वकीलों को अधीनस्थ न्यायपालिका का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा. प्रसाद ने आपातकाल के दौर को भी याद किया और जस्टिस एच आर खन्ना को श्रद्धांजलि दी. उस वक्त जस्टिस खन्ना ने पांच सदस्यीय संविधान पीठ के बहुमत वाले फैसले से अलग राय व्यक्त की थी. पीठ ने फैसला दिया था कि जीवन जीने और स्वतंत्रता के अधिकार को भी निलंबित किया जा सकता है.


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