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संसद की वित्तीय मामलों की स्टैंडिंग कमिटी ने मंगलवार को नोटबंदी के असर की जानकारी देने के लिए आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल और कृषि मंत्रालय के अफसरों को बुलाया. इसमें कृषि मंत्रालयों ने नोटबंदी के असर पर अपनी रिपोर्ट पेश की. अधिकारियों ने कहा कि कृषि मंत्रालय की जिस रिपोर्ट पर हंगामा हुआ था दरअसल उसमें नतीजे बताने में गड़बड़ी हो गई थी. इस संबंध में चार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.बता दें कि इससे पहले जो रिपोर्ट सामने आई थी उसमें कहा गया था कि नोटबंदी के चलते किसान बीज नहीं खरीद पाए. अमीर और गरीब दोनों तरह के किसानों पर इसका असर पड़ा.
अब मंत्रालय ने इस पर सफाई दे दी और कहा कि यह यू टर्न नहीं है. पहले वाले ड्राफ्ट में राष्ट्रीय बीज निकाय के आंकड़े ही शामिल थे. मंत्रालय के जवाब को कमिटी के चेयरमैन और विपक्षी सदस्यों ने इसे यू टर्न बताया और इस बात पर जोर दिया कि रिपोर्ट को सर्वसम्मति से मंजूर किया जाए.
इसके बाद बीजेपी सदस्यों ने कहा कि पिछली बैठक में उन्होंने सचिव की बात नहीं सुनी थी और वे आज उनकी बात सुनेंगे. बीजेपी सांसदों ने जोर दिया कि संसद में सभी सवालों को ठीक करने का मौका दिया जाता है.मंत्रालय ने कहा कि सचिव ने पहले वाले ड्राफ्ट पर दस्तखत नहीं किए. मंत्री या सचिव के दस्तखत के बिना कोई फाइल आगे नहीं बढ़ सकती. इसलिए वह कथित रिपोर्ट प्रमाणित नहीं थी.
वहीं उर्जित पटेल ने आरबीआई से जुड़े सवालों के जवाब दिए. उन्होंने नोटबंदी कर समर्थन किया और कहा कि यह अच्छा कदम है. क्रेडिट ग्रॉथ अब 15.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. डिजिटल लेनदेन 900 मिलियन से बढ़कर 1.75 बिलियन का हो चुका है जो कि लगभग दुगुना है.
किसी ने साफ नहीं किया कि कमिटी लोकसभा के इस कार्यकाल में रिपोर्ट को स्वीकार किया जाएगा या नहीं. संसद के विंटर सेशन में कमिटी की बैठक नहीं होगी.
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