Thursday, 31 May 2018

कैदी की संदिग्‍ध हालात में मौत,परिजनों ने इलाज में लापरवाही बरतने का लगाया अारोप


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यूपी के बहराइच जिला कारागार में बंद कैदी की संदिग्‍ध परिस्‍थतियों में मौत हो गई है. बंदी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.देर शाम बंदी की हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था,जहां डॉक्‍टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.वहीं कैदी की मौत के बाद से उसके परिजन भड़के हुए हैं. परिजनों ने जेल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है.जिले की कोतवाली देहात क्षेत्र के नगरौर निवासी हसन अब्बास उर्फ मुन्ना को कोतवाली देहात पुलिस ने 25 नवम्बर 17 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था.मृतक बंदी पर किशोरी के अपहरण और दुराचार सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था. तभी से कैदी जेल में बंद था.परिजनों के मुताबिक आज सुबह जेल प्रशासन द्वारा उन्हें सूचना दी गई कि उनके भाई की हालत गंभीर है, जिसके चलते उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जब उन्होंने जिला अस्पताल आकर देखा तो उनके भाई की मौत हो टुकी थी.


मृतक के भाई जहीर अब्बास का कहना है कि जब उन्होंने डॉक्टरों से जानकारी की तो उन्हें डॉक्टर ने बताया कि जेल प्रशासन के लोग उसे मृत अवस्था में जिला अस्पताल लेकर आए थे.


जब इस संबंध में प्रभारी जेल अधीक्षक सुरेश सिंह से बात की गई तो उन्होंने आला अफसरों द्वारा बयान दिये जाने की बात कह कर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया.


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जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ की टीम पर आतंकी हमला


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जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ की टीम पर आतंकियों ने हमला कर दिया. हालांकि इस हमले में किसी के भी जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है. दोनों तरफ से हुई फायरिंग के बाद अतांकी भागने में कामयाब हो गए हैं. फिलहाल सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन जारी है.जानकारी के अनुसार जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा के ईदगाह रोड पर हर रोज की तरह ही गश्‍त कर रही सीआरपीएफ की टीम पर आतंकियों ने हमला कर दिया. बताया जाता है कि आतंकियों ने सीआरपीएफ की टीम पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. आतंकियों की फायरिंग के जवाब में जब सुरक्षाबलों ने फायरिंग की तो आतंकी मौके से फरार हो गए. सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है. बताया जाता है कि सुरक्षाबल अभी भी इलाके में ही कहीं छुपे हुए हैं.


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क्या कैराना की जीत RLD की उभरती ताकत का संकेत है?


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(सुमित पाण्डेय)राजनीतिक तौर पर खत्म हो चुकी आरएलडी के लिए कैराना की जीत जीवदान जैसी है.  3 फरवरी को कैराना सीट से बीजेपी सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद ही इस सीट पर उपचुनाव होना लगभग तय हो गया था. आरएलडी भी इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी और अपनी राजनीतिक वापसी के लिए अच्छा अवसर मान रही थी.


लेकिन यह सीट जीतना इतना आसान भी नहीं था, क्योंकि फूलपुर और गोरखपुर संसदीय सीट पर सपा-बसपा गठबंधन को सफलता मिलने के बाद इस बात की संभावना कम ही थी कि सपा-बसपा किसी और पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन करे. बताया जाता है कि शुरुआत में सपा किसी हिंदू उम्मीदवार- जाट, गुर्जर या कश्यप को उतारना चाहती थी. उसका मानना था कि मुसलमान वोट इसमें जुड़कर पार्टी को जीत दिला देगा. लेकिन बाद में सपा ने ये सीट आरएलडी के लिए छोड़ दी क्योंकि उसे डर था कि वोट बंट जाने की वजह से वो हार सकती है.


ये भी पढ़ेंः उपचुनावों में हार पर कांग्रेस का तंज, कहा- BJP कैराना हारी है, 2019 में हिंदुस्तान हारेगीहालांकि अगर आरएलडी उम्मीदवार कैराना सीट नहीं जीत पाती तो सपा, फूलपुर और गोरखपुर संसदीय सीट पर अपनी जीत का हवाला देकर हार का सारा ठीकरा आरएलडी पर फोड़ देता. इसके अलावा कैराना उपचुनाव इस बात का भी टेस्ट था कि अगर 2019 लोकसभा चुनाव के लिए महागठबंधन बनता है तो अजीत सिंह उसके लिए कितने फायदेमंद साबित हो सकते हैं.


फिर मुसलमान उम्मीदवार को मैदान में उतारकर सांप्रदायिक दंगों के कारण जाट व मुस्लिम के बीच पड़ी दरार को खत्म करने की कोशिश भी की गई. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में काफी सीटों पर जाट, जाटव व मुसलमान वोट काफी निर्णायक हैं. जबकि सहारनपुर व अलीगढ़ के कुछ इलाकों में कांग्रेस पार्टी का दबदबा है.


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अगर कैराना उपचुनाव के ट्रेलर है तो निश्चित रूप से 2019 का चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है. लेकिन इन सबके बीच अजीत सिंह की पार्टी को एक बार फिर से जीवनदान मिल गया है और वो आने वाली दूसरी लड़ाई के लिए तैयार हो गए हैं.


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Dowry Calculator वेबसाइट को प्रतिबंधित करने पर सरकार जल्द ले सकती है फ़ैसला


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केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी के पत्र के बाद अब “डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉवरी कैलकुलेटर डॉट कॉम” को प्रतिबंधित करने पर सरकार फ़ैसला ले सकती है. आईटी सूत्रों की मानें तो इस तरह के मामलों को देखने के लिए केंद्र सरकार ने एक कमिटी का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव करते है.ये भी पढ़ेंः मेनका गांधी की मांग, ‘दहेज कैलकुलेट करने वाली’ वेबसाइट हो बैन
कमिटी में सदस्य के तौर पर आईटी के संयुक्त सचिव और टेलीकॉम के संयुक्त सचिव हैं. कहा जा रहा है कि जल्द ही इस कमिटी की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें इस वेबसाइट पर कार्यवाही पर फ़ैसला लिया जा सकता है.


ग़ौरतलब है कि देश में दहेज को लेकर कड़ा क़ानून है, जिसमें दहेज मांगने और देने दोनों पर क़ानून के तहत सज़ा का प्रावधान है. ऐसे में इस क़ानून का सरकार के नाक के नीचे उल्लंघन होना चिंता का विषय है. साथ ही ऐसे वेबसाइट देश में साइबर क़ानून के सख़्त नहीं होने की वजह से धड़ल्ले से चल रहे हैं.क्या हैं ‘Dowry Calculator’ वेबसाइट
यह वेबसाइट पुरूष की उम्र, जाति, पेशे और वेतन के आधार पर उसके लिए दहेज की राशि का अनुमान लगाती है. डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉवरी कैलकुलेटर डॉट कॉम के नाम से चल रहे इस वेबसाइट पर पुरुष अपनी पर्सनल इन्फ़र्मेशन भरते हैं, जिसके बाद वेबसाइट उनकी मार्केट वैल्यू के हिसाब से उनको मिलने वाले दहेज का अनुमान लगाती है.


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महिला मामलों की जानकार रंजना कुमारी मानती हैं कि वेबसाइट के ऊपर प्रतिबंध लगाना समस्या का समाधान नहीं है बल्कि सोशल मीडिया के इस दौर में सरकार को लोगों को जागरूक करना होगा.


 


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अवैध संबंधों के शक पर पत्‍नी को कुल्‍हाड़ी से काट डाला


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बिहार के मुंगेर जिले में अवैध संबंधों के शक में एक पति ने अपनी पत्‍नी की कुल्‍हाड़ी से काट डाला. रोजगार की तलाश में घर से दूर रह रहे पति को शक था कि उसकी पत्‍नी के गांव के ही एक शख्‍स से अवैध संबंध हैं. इसी संंदेह के आधार पर पति ने पत्‍नी को मौत के घाट उतार दिया. फिलहाल मौके पर पहुंची पुलिस ने हत्यारे पति और उसके इस काम में सहयोग करने वाले एक दोस्त को गिरफ्तार कर लिया है.धरहरा थाना क्षेत्र के बरमन्नी गांव में पप्पू सोरेन की शादी सात साल पूर्व संग्रामपुर में रेखा देवी से हुई थी. उनके दो बच्चे भी हैं. पप्पू सोरेन विशाखापट्नम में रहकर मजदूरी का काम करता था. पति को शक था कि उसके बाहर रहने पर उसकी पत्‍नी का गांव के ही एक अन्‍य शख्‍स से अवैध संबंध हैं. इस बात को लेकर कई बार दोनों के बीच झगड़ा भी होता रहता था.


लेकिन बीती शाम  इसी बात को लेकर झगड़ा कुछ ज्‍यादा ही बढ़ गया और पति अपना आपा खो बैठा. नाराज पप्पू ने घर में रखी कुल्हाड़ी से पत्नी पर कई वार कर दिया, जिससे मौके पर ही पत्‍नी की मौत हो गई.


हत्यारा पति पप्पू ने अपना जुर्म कुबूल करते हुुए बताया की इस बात को लेकर कई बार उस ने अपनी पत्नी को समझाया था पर वो नहीं मानी तो आखिरकार उसे ये कदम उठाना पड़ा. वहीं पुलिस ने पति को गिरफ्तार कर लिया है.


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'भैयाजी कहिन' : क्या कैराना का नतीजा 2019 चुनाव को प्रभावित करेगा?


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 न्यूज़ 18 इंडिया के खास पब्लिक शो 'भैयाजी कहिन' में आज का मुद्दा था कि क्या फूलपुर और गोरखपुर की हार के बाद कैराना का नतीजा 2019 चुनाव को प्रभावित करेगा? विस मुद्दे पर लोगों ने रखे अपने विचार. देखें वीडियो...

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बतौर सीएम आज पहली बार इटावा का दौरा करेंगे योगी आदित्यनाथ


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सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पहले इटावा दौरे के लिए अधिकारियों ने रात-दिन मेहनत करके शहर की कायापलट कर दी है. अधिकारियों ने शहर में सफाई करवा कर चौराहों पर संगमरमर के पत्थर लगवाकर शहर को संवार दिया है.सीएम का कार्यक्रम जिस पंडाल में होना है, उस पंडाल को दुल्हन की तरह सजा दिया गया है. शहर में बनी हर सरकारी बिल्डिंग की रंगाई-पुताई करवा दी गई है. इसके साथ ही शहर की सड़कों में बने गड्ढों को रात-दिन काम करवाकर भर दिया गया है.


जिले के राजनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है कि सपा के गढ़ से सीएम योगी 2019 के लोकसभा चुनाव का बिगुल फूंकेंगे. मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रदेश के बड़े-बड़े अधिकारियों ने अभी से ही इटावा पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया है.


आईजी जोन कानपुर आलोक सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. उसके बाद डीएम, एसएसपी समेत कई अधिकारियों ने पुलिस लाइन में बैठकर शुक्रवार को होने वाले सीएम के कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की.सीएम शुक्रवार को सुबह 10 बजे इटावा पुलिस लाइन में बने हैलीपैड पर हेलिकॉप्टर से उतरेंगे. उसके बाद राजा सुमेर सिंह वीवीआईपी गेस्ट हाउस में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे. इसके बाद कानपुर और बुंदेलखंड मंडल के सांसदों और विधायकों के साथ भी बैठक करेंगे.


ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि सीएम योगी इसी बैठक में इस सपा के गढ़ में सेंध लगाने के लिए बनाई गई रणनीति को अंतिम रूप देंगे और 2019 के लोकसभा चुनाव की रणनीति का भी आगाज करेंगे. उसके बाद कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न योजनाओं के 1000 लाभार्थियों को लाभ देने के बाद जनसभा को सम्बोधित करेंगे.


गेहूं क्रय केंद्रों का भी निरीक्षण करेंगे
जिलाद्धिकारी सेल्वा कुमारी जे ने बताया कि सीएम के आगमन को लेकर हम लोगों ने तैयारियां पूरी कर लीं हैं. एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सीएम के आगमन को लेकर शहर के हर चौराहे के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. पीएसी के एक हजार सिपाही सुरक्षा व्यवस्था में तैनात किए गए हैं.  किसी प्रकार की अराजकता होने पर अराजकतत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और संदिग्धों पर भी पैनी नजर रखी जाएगी.


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अब पूर्व बीजेपी जिलाध्यक्ष को भी मिली धमकी, कहा- 10 लाख दो वर्ना कर देंगे हत्या


उपचुनाव के नतीजों पर आजम बोले- जो इंसाफ का रास्ता छोड़ेगा, उसकी ऐसी ही जिल्लत होगी


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उपचुनावों में मिली हार के बाद बीजेपी को 2019 के लिए 'मोदी फैक्टर' पर भरोसा


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उपचुनावों के आए नतीजों से बीजेपी को कई सीटों पर मिली हार से लग रहा है कि अगले लोकसभा चुनावों में बीजेपी को एकजुट विपक्ष का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि पार्टी के नेताओं ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय मुद्दों के साथ – साथ ‘मोदी फैक्टर’ 2019 में बीजेपी को जीत दिलाएगी. गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी की करारी हार के बाद गुरुवार को कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा सीट पर उपचुनावों में पार्टी की हार ने पर्याप्त रूप से स्पष्ट कर दिया है कि अगले आम चुनावों में यदि विपक्ष एकजुट हो जाए तो राजनीतिक रूप से अहम उत्तर प्रदेश में बीजेपी की चुनावी राह बड़ी मुश्किल हो जाएगी.साल 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को उत्तर प्रदेश की कुल 80 लोकसभा सीटों में से 71 जबकि इसके सहयोगी अपना दल को दो सीटें हासिल हुई थीं. हालांकि अगले लोकसभा चुनाव में ऐसा प्रदर्शन दोहराने के लिए बीजेपी को फिर से वोटों को एकजुट करने के जोरदार प्रयास करने होंगे.


बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पिछले हफ्ते कहा था कि उनकी पार्टी एकजुट विपक्ष की चुनौती को खत्म करने के लिए 2019 में 50 फीसदी वोट प्रतिशत प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करेगी. बहरहाल , पार्टी ने उपचुनावों में अपनी हार को ज्यादा तवज्जो नहीं दी. वह महाराष्ट्र की दो लोकसभा सीट पर हुए उपचुनावों में सिर्फ पालघर सीट ही बरकरार रख पाई.


बीजेपी प्रवक्ता और  राज्यसभा सदस्य जी वी एल नरसिम्हा राव ने कहा कि ‘ मोदी फैक्टर ’ ने कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी को जीत दिलाई है. उन्होंने कहा कि  उपचुनावों में लोग स्थानीय मुद्दों , जातियों और उम्मीदवारों को देखकर वोट देते हैं , क्योंकि उन्हें पता होता है कि इन नतीजों का केंद्र या राज्यों में कोई असर नहीं होगा.ये भी पढ़ें: योगी, मोदी और बीजेपी के लिए क्या कहते हैं उप चुनाव परिणाम?


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'आर पार' : कैराना में हार, ‘मोदी लहर’ पर सवाल?


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 न्यूज़ 18 इंडिया के खास डिबेट शो 'आर पार' में आज का मुद्दा था, कैराना में हार, ‘मोदी लहर’ पर सवाल? ‘मोदी मैजिक’ पर भारी महागठबंधन उपचुनाव ‘झांकी’, 2019 बाकी! इसी मुद्दे पर बड़े पैनल ने की बड़ी चर्चा. देखें वीडियो...

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बोली लगाने की आखिरी तारीख बीती, जानें एयर इंडिया को कोई खरीदने क्यों नहीं आया


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(सिंधु भट्टाचार्य)नरेंद्र मोदी सरकार ने फैसला किया था कि एयर इंडिया को निजी हाथों में बेच दिया जाएगा. हालांकि, सरकार की इस योजना को तगड़ा झटका लगा है. नीलामी के लिए आखिरी तारीख भी खत्म हो गई है. कोई भी बतौर आवेदन आगे नहीं आया. इंडस्ट्री में ऐसी चर्चाएं थीं कि कुछ डोमेस्टिक एयरलाइन और बड़े बिजनेस घराने इसमें इंटरेस्टेड हैं, लेकिन सब महज कल्पनाएं निकलीं.


एक अकेली नीलामी भी ना आने के कारण हो सकता है कि सरकार इस पूरी प्रक्रिया को सरल नियमों के जरिए फिर से शुरू करेगी. अब क्या होगा जब एयर इंडिया में सरकार की हिस्सेदारी के लिए एक भी बोली नहीं मिली ? क्या एयर इंडिया की विनिवेश योजना को खत्म कर दिया जाएगा? इसका मतलब है कि पूरी प्रकिया, शायद ताजा नियम और शर्तों के साथ फिर से शुरू की जाएगी.


अहमदाबाद और जयपुर एयरपोर्ट के लिए निजी डेवलपर्स से बोलियां आमंत्रित करने के हालिया मामले में, इसे वापस लेना पड़ा, क्योंकि केवल एक ही बोली लगाने वाला आगे आया. पूरी प्रक्रिया को फिर से शुरू किया गया. क्या एयर इंडिया के मामले में भी ऐसा ही होगा, जहां संभावित बोली लगाने वालों ने बिक्री की शर्तों के बारे में अपनी आशंकाएं पहले से ही जाहिर की हैं?हालिया घटनाक्रम के करीबी एक स्रोत ने कहा कि इच्छुक पार्टियां सरकार की बोली शर्तों और डिइनवेस्टमेंट टाइमलाइन को कम करने का इंतजार कर रही हैं. इस व्यक्ति ने यह भी कहा कि वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने भी हालिया बयानों कोई बिक्री नहीं होने पर चेतावनी दी, अगर “पर्याप्त” कीमत प्राप्त नहीं हुई तो सरकार बड़े बदलावों के साथ विनिवेश की पूरी प्रक्रिया को खत्म करने या फिर शुरू करने के लिए जमीन तैयार कर रही है. लेकिन, अंत में एयर इंडिया के संबंध में यहां से क्या होता है यह आखिरकार मोदी के चार भरोसेमंद मंत्रियों – अरुण जेटली, सुरेश प्रभु, नितिन गडकरी और पीयूष गोयल द्वारा तय किया जाएगा.


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वास्तव में एयर इंडिया का विनिवेश कभी उड़ान भर ही नहीं पाया. पहले इसे संभावित बोली लगाने वालों से प्रतिक्रिया मिली, जिसमें एक प्रमुख एयर लाइन पूरे खेल से ही बार निकल रही थी. इसके बाद बचे हुए बोली लगाने वालों ने शर्तों में बदलाव के लिए बात शुरू कर दी, जिसमें कई बुनियादी बातों का विरोध किया गया जो एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट का डॉक्यूमेंट बनाते थे.


इसके साथ ही सरकार के दावे पर भी संशय बढ़ा, क्योंकि विनिवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी 24% हिस्सेदारी बनाए रखने का प्रस्ताव है. बोली लगाने वालों की शिकायतें तब सामने आईं जब अस्पष्ट रूप से शकतिशाली संघ की लॉबी एयर इंडिया को विदेशियों को बेचने के खिलाफ था.


एयर इंडिया के विनिवेश की प्रक्रिया इस साल 28 मार्च को शुरू हुई और इसे आजाद भारत के अब तक सबसे ज्यादा रणनीतिक विनिवेश बताया गया. सरकार ने एआईएसएटीएस में 50% हिस्सेदारी के अलावा एयर इंडिया और इसके एयर इंडिया एक्सप्रेस से 76 फीसदी का स्टेक हटाने का प्रस्ताव दिया था.


कोई भी संभावित बोलीदाता इनमें से कुछ चाहता है: सरकार के साथ पूर्ण नियंत्रण, 24% हिस्सेदारी भी, कमजोर डेब्ट लायबिल्टी और विनिवेश के बाद मैन पॉवर के मुद्दों पर स्पष्टता. सिर्फ बोली लगाने वालों से ही नहीं सरकार को अंदरूनी विरोध का सामना करना पड़ रहा है. एयर इंडिया विनिवेश का जिक्र करते हुए सुब्रमण्यम स्वामी ने पहले ही ‘घोटाला’ शब्द का इस्तेमाल किया है. स्वदेशी जागरण मंच एयरलाइन के लिए सरकारी स्वामित्व जारी रखने के लिए रोडमैप तैयार कर रहा है और कर्मचारी संघ बिक्री के विरोध में हैं.


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याद रखें, एक गैर-एयरलाइन कंपनी, जिसमें एयरलाइन चलाने में कोई अनुभव नहीं है, एयर इंडिया के लिए बोली लगा सकता है. किसी और चीज के अलावा ये वो मुद्दा है जो दिखाता है कि एयर इंडिया की बिक्री में गलत हो रहा है. यह वो संभावित बिन्दु है जो पूरी बिक्री को आखिरकार चौंका सकता है.


(लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार हैं.विचार व्यक्तिगत हैं.)


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