Wednesday, 30 May 2018

अफसर से चतुर राजनेता बने अजित जोगी खूब हैरान भी करते रहे हैं


READ MORE

ये महज एक सप्ताह पहले की बात है. अजित जोगी अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर सक्रिय थे. उन्होंने 20 मई को राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें कांग्रेस का महान नेता बताते हुए उनके साथ अपनी तस्वीरें डाली थीं. उसके बाद कुछ और पोस्ट किए थे. वो उन नेताओं में हैं जो फेसबुक पर लगातार सक्रिय रहते हैं. कुछ ही समय पहले उन्होंने आने वाले चुनावों में जोरशोर से उतरने की घोषणा भी की थी. लेकिन अचानक मई में उनकी तबीयत इतनी खराब हो गई कि रायपुर से उन्हें एयरलिफ्ट करके दिल्ली लाना पड़ा है.तेजतर्रार युवा जिलाधिकारी
ये आपातकाल के बाद के दिनों की बात है. मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचल के जिले शहडोल में एक युवा और तेजतर्रार जिलाधिकारी की पोस्टिंग हुई. कविताएं लिखने वाले और साहित्य प्रेमी अफसर की. तब उनकी रचनाएं धर्मयुग में प्रकाशित होती थीं. जिसने अपने काम और प्रशासनिक फैसलों से जनता के बीच अच्छी इमेज बना ली. वो अजीत प्रमोद कुमार जोगी थे, जिन्होंने डीएम के तौर पर कई अच्छे कदम उठाए. वो तेज काम करने वाले डीएम माने जाते थे. उस समय मध्य प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार थी. कहा जाता था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री कैलाश जोशी उन्हें पसंद करते हैं. हालांकि जोगी ने बाद में निष्ठाएं इतनी तेजी से बदलीं कि उन्हें जानने वाले भी हैरान रह गए.


फिर अर्जुन सिंह के खासमखास बनेमध्य प्रदेश में उन दिनों जनता पार्टी सरकार में जबरदस्त घमासान चल रहा था. तीन सालों में तीन मुख्यमंत्री बदले. फिर सरकार गिर गई. राष्ट्रपति शासन लगाया गया. नए चुनावों के बाद कांग्रेस के अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री बने. जोगी अब उनके खासमखास थे. हालांकि इससे पहले वो श्यामचरण शुक्ला और विद्याचरण शुक्ला का विश्वास जीत चुके थे.



छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जे) के सुप्रीमो अजीत जोगी

उन दिनों वो सीधी के कलेक्टर थे. नियमित तौर पर अर्जुन सिंह के सीधी दौरों में उनके साथ देखे जाते थे. कहा जाता था कि उन दिनों मध्य प्रदेश में मुख्य सचिव की उतनी तूती नहीं बोलती थी, जैसी जोगी की. वह 14 सालों तक जिलाधिकारी रहे. शायद सबसे ज्यादा चर्चित डीएम. समय और लोगों को भांपने में उन जैसा माहिर शायद कोई हो. उनकी इसी खासियत ने उन्हें आने वाले समय में घाघ नेता, सांसद और फिर मुख्यमंत्री भी बनाया.


किस तरह बने राज्यसभा सांसद
कहा जाता है कि अर्जुन सिंह के करीबी होने से ही वो जिलाधिकारी से सीधे राज्यसभा सांसद बने. 1986 में कांग्रेस को मध्य प्रदेश से एक काबिल व्यक्ति की तलाश थी जो अनुसूचित जाति या जनजाति का हो और जिसे राज्यसभा में भेजा जा सके. अर्जुन सिंह के कहने पर तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिग्विजय सिंह उन्हें लेकर राजीव गांधी के पास लेकर गए. चंद लम्हों की मुलाकात में उनके नाम पर मुहर लग गई. वैसे इसके पीछे एक रोचक किस्सा है, जो छत्तीसगढ़ के पत्रकार अक्सर सुनाते हुए मिल जाएंगे.


किस्सा कुछ यों है. जिन दिनों जोगी रायपुर में कलेक्टर हुआ करते थे, उन्हीं दिनों राजीव गांधी इंडियन एयरलाइंस के पायलट थे. संयोग था कि उनका विमान कभी-कभी रायपुर भी आता था. कलेक्टर का स्थाई आदेश था कि जिस दिन पायलट के रूप में राजीव गांधी का नाम आए, उन्हें पहले सूचना मिल जाए. नियत समय पर कलेक्टर जोगी घर से चाय नाश्ता लेकर हाज़िर होते थे.



बेहद गरीब आदिवासी घऱ के
जोगी का जन्म 1946 में हुआ था. घर में अभाव था. गरीबी बहुत ज्यादा. उनके पिता को जब मिशन ने मदद की तो उन्होंने बदले में ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया. अजित आदिवासी होने के बाद भी पढ़ने में तेज थे. उनका जन्म बिलासपुर के करीब जिस पेंड्रा कस्बे में हुआ, वो पिछड़ा हुआ इलाका है. जोगी ने भोपाल के मौलाना आजाद कालेज ऑफ टेक्नॉलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पढाई की. 1968 में उन्हें गोल्ड मेडल मिला. कुछ समय के लिए रायपुर के गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज में लेक्चरर भी रहे. उन्हीं दिनों वो पहले आईपीएस बने. फिर आईएएस में सेलेक्ट हुए. इसके बाद जोगी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.


सियासी चालें चलने में माहिर
जब 1986 में कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा में पहुंचाया तो वो लगातार दो कार्यकाल तक राज्यसभा सदस्य बने रहे. इस दौरान कांग्रेस की अलग अलग कमेटियों और पदों पर काम करते रहे. 1998 में उन्होंने पहली बार रायगढ़ से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीते. सियासत में अपनी चालें और गोटियां उन्होंने एकदम सही तरह से खेलीं. इसका उन्हें लगातार फायदा मिला.


जैसे ही छत्तीसगढ़ को नया राज्य बनाया गया. जोगी उसके पहले मुख्यमंत्री बन गए. हालांकि विवादों के साथ उनका नाता भी तभी जुड़ने लगा. विवादों की फेहरिश्त लंबी होने लगी. उनकी प्रशासनिक क्षमता और नेतृत्व की लोग तारीफ करते थे. लेकिन वो ऐसे शख्स भी हैं जिसके बारे में कहा जाता है कि वो अपना काम निकालने और फायदा देने वालों के करीब आने में माहिर हैं.



मीडिया से चर्चा करते हुए अजीत जोगी (फाइल फोटो).

जब उन्होंने वर्ष 2014 में महासमुंद सीट से कांग्रेस की सीट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा तो उनके खिलाफ बीजेपी के उम्मीदवार थे चंदुलाल साहू. जोगी ने इसी नाम से 11 निर्दलीय उम्मीदवारों से भी चुनाव के पर्चे भरवा दिये, ताकि जनता के बीच असमंजस फैल जाए. लेकिन सबकुछ करने के बाद जोगी 133 वोटों से हार गए.


राजीव गांधी से सोनिया तक
जब वो दिल्ली की सियासत में आए तो देखते ही देखते राजीव गांधी के खास बन गए. फिर उन्होंने सोनिया का विश्वास पात्र बनने की कोशिश की. राज्यसभा के कार्यकाल के दौरान रविवार को अजीत जोगी प्रार्थना करने उसी गिरजाघर में जाते रहे, जहां सोनिया गांधी जाती थीं.


नई पार्टी बनाई
छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने योजनाबद्ध तरीक़े से छत्तीसगढ़ में विकास के कामों को शुरू किया. लेकिन इसके बाद उनकी कार्यशैली और भ्रष्टाचार के आरोप उन्हें घेरने लगे तो उनका पराभव भी होने लगा. उनके बेटे तमाम तरह के आरोप लगे. जब उन्हें लगा कि कांग्रेस में उनके दिन खत्म हो गए हैं तो उन्होंने तुरंत नई पार्टी बना ली- छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस. अब वो छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय नेता हैं. भाषण देने की कला में माहिर हैं. जोड़तोड़ में उस्ताद है.


दृढइच्छाशक्ति के भी धनी
जोगी दृढइच्छाशक्ति के भी धनी हैं. वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान वह एक दुर्घटना के शिकार हुए, जिसमें उनके कमर के नीचे के हिस्से ने काम करना बंद कर दिया. इससे लगा कि अब वो निष्क्रिय हो जाएंगे लेकिन दस बरसों से अधिक समय हो गया और वे सक्रिय ही नहीं बल्कि ताक़तवर बने हुए हैं. बकौल उनके जब वो इंग्लैंड के अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे तो डॉक्टर उनके कहा कि वह अब किसी भी सूरत में जीवनभर चल नहीं सकते. लेकिन वो हार नहीं मानते. इस कोशिश में लगे रहते हैं कि ठीक हो जाएं.



विवादों का नाता
जब वो 1981 से 85 तक इंदौर में डीएम थे , तब उन पर सेंटर फॉर एडवांस टेक्नॉलॉजी के ब्लू प्रिंट सीआईए को बेचने का आरोप लगा. बाद में वर्ष 2007 में उन्हें एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी के हत्या के आरोप में बेटे के साथ गिरफ्तार किया गया. दिसंबर 2003 में उनके खिलाफ एक स्टिंग सामने आया, जिसमें वो बीजेपी विधायकों को कांग्रेस का समर्थन देने के बदले प्रलोभन दे रहे हैं. इसके बाद पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया है. हालांकि बाद में सीबीआई ने उन्हें बरी कर दिया.


किताबें भी लिख चुके हैं
जोगी प्रशासन पर दो किताबें लिख चुके हैं. इसके अलावा हिन्दी और अंग्रेजी में वो प्रशासन पर काफी लिखते और छपते रहे हैं. हिंदुस्तान टाइम्स, जनसत्ता में उनके लेख प्रकाशित होते रहे तो दैनिक भास्कर में वो नियमित कॉलम भी लिखते थे. कविताएं भी उन्होंने खूब लिखी हैं


Article source: http://feedproxy.google.com/~r/ndtvkhabar/~3/hZj5K_jIHSw/story01.htm

No comments:

Post a Comment